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दमोह के नए फिल्टर प्लांट पर ऐसे होता है पानी शुद्ध

Puspendra Tiwari

Publish: Aug 17, 2019 05:04 AM | Updated: Aug 16, 2019 18:57 PM

Damoh

नए फिल्टर प्लांट पर पांच चरणों में पानी को किया जा रहा शुद्ध फिर भी कुछ इलाकों में पहुंच रहा मटमैला पानी

दमोह. शहर की करीब 01 लाख 40 हजार आबादी की प्यास बुझाने वाले पानी को नए फिल्टर प्लांट पर पांच चरणों में शुद्ध किया जाता है। इसके बाद भी लोगों के घरों तक जो पानी पहुंच रहा है वह दूषित व मटमैले रंग का है। जब इस मामले की पड़ताल की गई तो नए फिल्टर प्लांट से जल सप्लाई का कार्य करने वाली एजेंसी एसएमसी के कर्मचारियों का कहना था कि फिल्टर प्लांट से जो पानी छोड़ा जा रहा है वह शुद्धता के मानकों को पूरा करता है। हालांकि उन्होंने इस बात की पुष्टि भी कह है कि लोगों के घरों में मटमैले रंग का पानी पहुंच रहा है इसकी शिकायतें प्राप्त हो रहीं हैं। कर्मचारियों ने मटमैला पानी घरों तक पहुंचने का कारण शहर की पाइप लाइन के लीकेज होना बताकर अपना पल्लाझाड़ लिया। वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों द्वारा दिए गए तर्क की हकीकत पता करने पर एक प्रमुख तथ्य यह सामने आया कि कुछ इलाकों में नई पाइप लाइन को नालियों से होकर बिछाई गई है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर पाइप लाइन लीकेज होने की बात भी सामने आई है।
पानी शुद्धता को इस तरह समझें
जुझारघाट से ब्यारमा नदी का पानी सीधे शहर के नए फिल्टर प्लांट पर पहुंच रहा है। एक घंटे के भीतर 7 लाख 85 हजार लीटर पानी फिल्टर प्लांट से शुद्ध कर शहर की टंकियों को लिए सप्लाई किया जा रहा है। सप्लाई के पहले पानी को शुद्ध किया जाना होता है। इसके लिए पानी पांच चरणों को पूरा करता है।
पहला चरण- फिल्टर प्लांट पर नदी का पानी एक फुब्बारे का रुप लेकर शुद्धता के लिए दूसरे चरण की ओर बढ़ता है। पानी का फुब्बारा इसलिए बनाया गया है जिससे पानी में किसी तरह की दुर्गंध हो तो वह दूर हो जाए।
दूसरा चरण- पानी एक बड़े कुएं में पहुंचने के पहले उसमें फिटकरी मिलाई जाती है। इस कार्य की देखरेख कर रहे एजेंसी के इंजीनियर आकाश गुरु ने बताया कि एक घंटे में करीब 72 किलो फिटकरी पानी में मिक्स की जाती है और फिटकर मिक्स पानी को एक बड़े कुएं में पहुंचा दिया जाता है।
तीसरा चरण - बड़े कुएं में फिटकरी युक्त पानी को एक ब्रिज के जरिए घुमाया जाता है। जिससे फिटकरी के साथ मिट्टी निचली सतह में बैठ जाए। विदित हो कि इस चरण की मुख्य भूमिका होती है क्योंकि कुएं के अंदर से ही निकली एक नाली के सहारे मिट्टी को बाहर किया जाता है। यहां पानी का रंग बदलता है। यहां पहुंचने वाला पानी मटमैले रंग का होता है जो चौथे चरण में पहुंचने से पहले नीले रंग का दिखाई देना चाहिए।
चौथा चरण- बड़े कुएं से निकाले गए पानी को रेत व चार कोल के जरिए शुद्ध किया जाता है। यहां भी पानी से मिट्टी के कण दूर किए जाते हैं। रेत से होकर पानी अगली प्रक्रिया की ओर बढ़ता है।
पांच चरण- रेत व चार कोल से शुद्ध होकर पानी संप में पहुंचता है और यहां पहुंंचे पानी में क्लोरीन मिलाई जाती है। बताया गया है कि एक घंटे के भीतर तकरीब एक से डेढ़ किलो क्लोरीन पानी में मिक्स कर दी जाती है। क्लोरीन का कार्य पानी के रंग को बंदलना नहीं होता बल्कि यह पानी के कीटाणु को नष्ट कर देती है।
पांच चरण पूरे होने के बाद पानी भारी क्षमता के मोटर पंपों के प्रेशर से विभिन्न टंकियों के लिए फिल्टर प्लांट से बाहर सप्लाई कर दिया जाता है। बताया गया है कि १२ घंटे के भीतर करीब 01 करोड़ लीटर पानी से शहर के विभिन्न वार्डों में बनी 16 टंकियों को भर दिया जाता है।
आखिर मटमैला क्यों
सवाल यह है कि जब पानी को शुद्ध करने के बाद सप्लाई किया जाता है तो घरों में पहुंचने वाला पानी मटमैला क्यों होता है। इस पड़ताल के दौरान एक बात यह सामने आई कि जब पानी दूसरे चरण में होता है तो इस दौरान इन दिनों बारिश की वजह से फिल्टर प्लांट तक आ रहे हल्के पीले रंग के पानी को ठंड, गर्मी के दिनों की अपेक्षा शुद्ध करना अधिक कठिन होता है। चूंकि इस पानी को भी उतने ही समय तक शुद्ध किया जाता है जितना अन्य मौसम में नदी से आने वाले पानी को। अन्य मौसम में नदी का पानी काफी हद तक शुद्ध होता है। लेकिन इस समय पानी में मिट्टी की मात्रा अधिक है। इसके अलावा कुछ इलाकों में पानी की सप्लाई नई पाइप लाइन से किया जा रही है तो कुछ वार्ड ऐसे हैं जहां पर वर्षों पुरानी पाइप लाइन से ही जल सप्लाई हो रही है। नपा अधिकारियों का कहना है कि यह पाइप लाइन जर्जर हो चुकी है। इसके अलावा कुछ वार्डों में अभी भी पुराने फिल्टर प्लांट से पानी की सप्लाई होती है। पुराने फिल्टर प्लांट पर पानी को शुद्ध किए जाने के वह मानक पूरे नहीं होते जो नए फिल्टर प्लांट पर किए जाते हैं। पुराने फिल्टर प्लांट पर पानी को फिटकरी व ब्लीचिंग पाउडर से शुद्ध किया जाता है जो वर्षों पुरानी प्रक्रिया है।
वर्जन
शुद्ध पानी हर हाल में सप्लाई हो यह जिम्मेदारी पानी को शुद्ध करने का कार्य करने वाली एजेंसी को सौंपी गई है। मैं पता करता हूं कि पानी को कितने मानक पर शुद्ध किया जा रहा है। मैंने एजेंसी के कर्मचारियों से पानी की शुद्धता का विशेष ख्याल रखने के लिए हाल ही में निर्देशित किया है।
कपिल खरे, सीएमओ