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रात भर तड़पता रहा घायल बछड़ा, डॉक्टरों ने नहीं उठाए फोन, जानिए फिर क्या हुआ

Laxmi Kant Tiwari

Publish: Sep 21, 2019 22:11 PM | Updated: Sep 21, 2019 22:11 PM

Damoh

पशुधन संजीवनी 1962 पर धमकी भरे अंदाज में की अटैंडर ने बात घबरा गया कॉलर

दमोह. शासन द्वारा चलाई जा रही पशुधन योजना के टोल फ्री हैल्प लाइन नंबर १९६२ से मवेशियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जारी किए गए इस नंबर पर न तो फोन अटैंड करने वाले द्वारा कॉलर से सही तरीके से बात की जा रही है। न ही पशुओं के घायल होने पर दिए गए नंबर पर डॉक्टर फोन अटैंड कर रहे हैं। जिससे लोगों को निजी तौर पर आम मवेशियों का इलाज कराने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
शुक्रवार रात करीब १२ बजे इसी तरह का मामला देखने मिला है। जिसमें बालाकोट बाइपास मार्ग पर रात करीब १२ बजे गाय के दो साल के बछड़े को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। जिसे गंभीररूप से घायल होने पर वह खून से लथपथ तड़प रहा था। वहां हर दिन की तरह आवारा मवेशियों के सींगों में रेडियम लगाने निकले ऋषभ अग्रवाल तथा नीरज सैनी ने बछड़े को तडफ़ते देखा तो तुरंत ही पशुधन संजीवनी योजना के टोल फ्री नंबर १९६२ पर फोन लगाया। कई बार फोन लगाने के बाद जैसे-तैसे फोन अटेंड किया लेकिन जिसने भी बात की तो वह इस तरह से बात कर रहा था कि जैसे उसने फोन लगाकर कोई अपराध कर दिया हो। कॉलर से डॉक्टर के नहीं आने तक वहीं खड़े रहने तथा डॉक्टर के आने पर उसे कुछ रुपए देने व बछड़े के मर जाने पर उसकी जिम्मेदारी लेने की बात कही गई। इस बीच दो डॉक्टरों के नंबर दिए गए।
डॉ. व्ही बी शुक्ला तथा किसी चरन गुरु पशुचिकित्सक का नंबर दिया गया। दोनों ने फोन ही अटैंड नहीं किया। बाद में जब पत्रिका ने फोन लगाया तो चरन गुरु का नंबर उठा उन्होंने कहा कि वह जबलपुर में हैं दूसरे डॉक्टर का नंबर देते हैं। फिर उन्होंने फोन काटने के बाद दोबारा फोन अटैंड ही नहीं किया।
रातभर तड़पता रहा बछड़ा -
घटना में गंभीररूप से घायल बछड़ा रात भर तडफ़ता इस बीच समीप ही बालाकोट चौराहा पर चाय का टपरा चलाने वाले सुनील यादव के सहयोग से बछड़े को बीच सड़क से उठाकर सभी ने साइड में रखा। फिर शनिवार सुबह ६.३० पर ऋषभ अग्रवाल अपने पारिवारिक मित्र पशु चिकित्सक को लेकर मौके पर पहुंचे। जिन्होंने बछड़े का इलाज करते हुए करीब २० टांके लगाए और उसकी मल्हम पट्टी करने के बाद उसे इंजेेक्शन सहित अन्य दवाएं भी दीं। जिससे बछड़े की जान वापस आ सकी। लेकिन दूसरे दिन तक न तो सरकारी डॉक्टर का फोन आया और न ही कोई रिप्लाई मिल सका।
मैं पता करता हूं, कार्रवाई की जाएगी-
मैं पता करता हूं, लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी शासकीय योजना में लापरवाही करने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मैं अभी पता करता हूं।
तरुण कुमार राठी - कलेक्टर दमोह