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कुंडलपुर में बड़े बाबा निर्वाण महोत्सव में लाडू चढ़ाने उमड़े श्रावक, हुए कई कार्यक्रम

Sanket Shrivastava

Publish: Jan 24, 2020 10:20 AM | Updated: Jan 24, 2020 00:44 AM

Damoh

शहर सहित जिले के अन्य मंदिरों में भी हुए कार्यक्रम

दमोह. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव आदिनाथ भगवान कुंडलपुर के बड़े बाबा का निर्वाण महोत्सव मनाया गया। जिसका मुख्य कार्यक्रम कुंडलपुर में आयोजित हुआ। जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वहीं शहर सहित जिले के अन्य मंदिरों में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।
गुरुवार को कुंडलपुर में मुनि प्रशांत सागर महाराज व मुनि निर्वेग सागर महाराज के मंगल सानिध्य में निर्वाण लालू चढ़ाया गया। इस अवसर पर भक्तगणों के द्वारा बड़े बाबा का अभिषेक किया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य रीतेश जैन गुनौर को प्राप्त हुआ।
बड़े बाबा आदिनाथ भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य कमल सिंघई दमोह को प्राप्त हुआ। भक्तजनों ने बड़े बाबा की आरती की व छत्र चढ़ाने का सौभाग्य अर्जित किया। इस मौके पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष संतोष सिंघई, संतोष इलेक्ट्रिकल, शैलेंद्र मयूर, संदीप अभाना, संजीव शाकाहारी सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।
कृषि करो या ऋषि बनो
मुनि प्रशांत सागर ने कहा कि भगवान आदिनाथ का निर्वाण महोत्सव ऐतिहासिक दिन है, इस युग के प्रारंभ में मानव जाति को मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हुआ।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने सबसे पहले मानव जाति के कल्याण के लिए ऋषि बनो या कृषि करो का उपदेश दिया था। उन्होंने मानवता को असी मासी कृषि वाणिज्य कला व शिल्प का ज्ञान दिया था। इसके पूर्व कल्पवृक्ष से ही मानव की आवश्यकताएं पूर्ण हो जाती थीं, आदिनाथ भगवान ने ही अपनी बेटियों को ब्राहृमी लिपि सिखा कर मानवता का कल्याण किया था।
आदमकद प्रतिमा कुुंडलपुर में
भगवान आदिनाथ की पद्मासन प्रतिमा कुंडलपुर में विराजमान है, जो देश भर की आस्था का केंद्र है। इस क्षेत्र में जयपुर सहित राजस्थान के लोगों की विशेष आस्था जिससे यहां प्रति वर्ष हजारों तीर्थ यात्री राजस्थान से कुंडलपुर पहुंचते हैं। आदिनाथ भगवान के निर्वाण महोत्सव पर भी राजस्थान के साथ देश के अन्य हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचे थे। कुंडलपुर में भगवान आदिनाथ को कुंडलपुर के बड़े बाबा के नाम से भी पुकारा जाता है।
अन्य मंदिरों में भी हुए कार्यक्रम
कुंडलपुर के अलावा शहर के पलंदी मंदिर सहित अन्य जैन मंदिरों में भी प्रथम तीर्थंकर निर्वाण महोत्सव मनाया गया। जिसमें श्रावकों ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया।

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