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मेले का समापन: सीता स्वयंवर में भगवान राम ने तोड़ा शिव धनुष

Sanket Shrivastava

Publish: Jan 24, 2020 12:20 PM | Updated: Jan 24, 2020 01:39 AM

Damoh

सुनार नदी के बीच टापू पर दिगी गांव में प्रत्येक वर्ष संक्रांति पर्व पर लगने वाले मेले

मडिय़ादो. जिला मुख्यालय से लगभग 75 किमी दूर सुनार नदी के बीच टापू पर दिगी गांव में प्रत्येक वर्ष संक्रांति पर्व पर लगने वाले मेले का बुधवार समापन हो गया है। इस मेले की खास पहचान यहां होने वाली रामलीला है, बीते कई सालों से स्थानीय रामलीला मंडली के द्वारा मेले में रामलीला का मंचन किया जाता है।
मेले का समापन राम सीता विवाह के साथ ही समापन हो जाता है। मेले के आयोजन के दौरान रामलीला देखने के लिए काफी भीड़ पहुंची। ताड़का वध और सीता स्वयंवर का मंचन हुआ।
रामलीला में धनुष भंग के संवादों को रोचकता से पात्रों द्वारा प्रस्तुत किया गया। रावण बाढ़ासुर संवाद बड़ा ही मार्मिक रहा। राजा जनक का अभिनय सराहनीय रहा। पुष्प वाटिका का दृश्य दर्शकों को बहुत भाया, सखियों वाला दृश्य बहु़त अच्छे से कलाकारों ने प्रस्तुत किया।
स्वंयवर में कलाकारों ने मंचन के माध्यम से बताया कि सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थी। इनका विवाह अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र राम से स्वयंवर में शिवधाम को भंग करने के उपरांत हुआ था। कलाकारों ने मंचन के जरिए दिखाया कि सीता राम के लिए योग्य वर प्राप्त करना है। कठिन हो गया था, क्योंकि सीता ने मानव योनि से जन्म नहीं लिया था। अंत में राजा जनक ने सीता का स्वयंवर रचाया। स्वयंवर में पहुंंचे भगवान राम ने शिवधनुष को उठाकर उसे तोड़ दिया। इसके बाद सीता से भगवान राम का विवाह हुआ। कार्यक्रम के दौरान रामलीला मंडली के वरिष्ठ सदस्य पंडित मूलचंद गर्ग, मंहत कुंवर कल्याण सिंह, संचालक बद्री प्रसाद गर्ग सहित मंचन देने श्रद्धालु मौजूद रहे।

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