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आठों विधायकों की लीड से भी अधिक लीड से जीते भाजपा के प्रहलाद

Samved Jain

Publish: May 25, 2019 13:13 PM | Updated: May 25, 2019 13:13 PM

Damoh

कांग्रेस, जातिय समीकरण, विरोधाभास व भितरघात भी नहीं टिके मोदी की आंधी में

दमोह. 2019 का लोकसभा चुनाव सदियों तक याद किया जाएगा। यह लोकसभा चुनाव उन निर्वाचित विधायकों के लिए भी एक संदेश दे गया है, कि विधानसभा के लिए जितनी वोटों से वह जीते थे, लोकसभा में उससे अधिक वोटों से भाजपा प्रत्याशी ने लीड ली थी।
विधानसभा चुनाव के परिदृश्य की बात करें तो दमोह लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभाओं में चार सीट कांग्रेस के खेमे में थी, तीन पर भाजपा काबिज थी और एक पर बसपा जीती थी। विधानसभा के परिणामों की तुलना की जाए तो सीटों के हिसाब से कांग्रेस का मजबूत पलड़ा था, जिसमें उसे बसपा का समर्थन भी मिला था, इस तरह पांच सीटों पर अपने को काबिज मानकर कांग्रेस लोकसभा में जीत की संभावनाएं तलाश रही थी। इसके अलावा उसे भरोसा था कि प्रदेश में उसकी सरकार है और किसानों की कर्जमाफी का लाभ उसे मिल जाएगा। इसके अलावा भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद सिंह पटेल के खिलाफ विरोध के स्वर भी मुखर हो रहे थे। जिसमें लोधी-महालोधी, देवेंद्र चौरसिया कांड के अलावा भाजपाई विरोधी स्वर मुखर कर रहे थे। विरोधाभाष की आग में घिर रहे प्रहलाद सिंह पटेल को मोदी की आंधी ने उबारकर बाहर निकाल लिया।

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मंत्री व नेता प्रतिपक्ष के क्षेत्र में लीड
सबसे पहले हम देवरी विधानसभा की बात करें तो यहां से कांग्रेस के विधायक हर्ष यादव हैं, जो कैबिनेट में मंत्री पद पर हैं। इन्होंने विधानसभा चुनाव महज 4304 मतों के अंतर से जीता था। इस बार इन्होंने पूरी ताकत झौंक दी थी, इनका भाजपा समर्थक को धमकाने का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। इस सबके बाद भी प्रहलाद पटेल ने यहां से 44 हजार 233 मतों की लीड से जीत दर्ज की है। अब हम बात करते हैं भाजपा के रहली विधायक गोपाल भार्गव की जो नेता प्रतिपक्ष हैं, इन्होंने विधानसभा चुनाव 26 हजार 888 मतों के अंतर से जीता था। इनका विरोधाभाष भी प्रहलाद सिंह पटेल से चल रहा था और सबसे कम वोटिंग भी रहली विधानसभा क्षेत्र में हुई थी। इसके बावजूद प्रहलाद पटेल 36 हजार 67 वोट की लीड ली है।
दो भाईयों के वार्ड व विधानसभा भी जीते
हिंडोरिया के दो भाई दमोह व बड़ामलेहरा से विधायक हैं, दमोह विधायक राहुल सिंह लोधी व बड़ामलेहरा विधायक प्रदुम्मन सिंह हिंडोरिया के निवासी हैं। इनका निवासी शिवाजी वार्ड में है। इस वार्ड में प्रहलाद पटेल को 583 मत मिले हैं, जबकि कांग्रेस के प्रताप को महज 96 वोटों से संतुष्ट होना पड़ा है। अब हम बात करें दमोह विधानसभा की तो राहुल सिंह विधानसभा चुनाव महज 798 वोटों के अंतर से जीते था, लेकिन प्रहलाद ने यह विधानसभा 44 हजार 124 मतों के अंतर से जीत ली है। इसी तरह बड़ामलेहरा विधानसभा में प्रदुम्मन सिंह लोधी ने विधानसभा चुनाव 15 हजार 779 की लीड से जीता था, जहां से लोकसभा में प्रहलाद पटेल ने ५१ हजार ६६१ की बढ़त ली है। इन्हीं भाईयों के रिश्ते के भाई कांग्रेस के बंडा विधायक तरबर सिंह भी है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव 24 हजार 164 मतों के अंतर से जीता था, लेकिन प्रहलाद पटेल ने यहां भी उनसे दुगनी 48 हजार 117 मतों की लीड प्राप्त की है।
भाजपा विधायकों के क्षेत्र में भी बढ़त
हटा से भाजपा के विधायक पीएल तंतुवाय ने विधानसभा चुनाव में 19 हजार 905 से जीत प्राप्त की थी। इनके विधानसभा क्षेत्र में प्रहलाद पटेल ने 53 हजार63 मतों से जीत प्राप्त की है। इसी तरह जबेरा विधायक धर्मेंद्र सिंह लोधी ने विधानसभा चुनाव में 3485 मतों की लीड से जीता था। यहां प्रहलाद सिंह पटेल ने 22 हजार 842 मतों से जीत हासिल की है। गौरतलब है कि जबेरा विधानसभा से पूर्व में प्रताप सिंह लोधी चुनाव लड़े थे और कम अंतर से हारे थे, लेकिन लोकसभा चुनाव में वह पिछला अंतर भी बरकरार रखने में नाकामयाब हुए हैं।
बसपा के गढ़ में भी जबरदस्त सेंधमारी
पथरिया से बसपा की विधायक रामबाई हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव महज 2205 मतों के अंतर से जीता था, भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद सिंह पटेल ने बसपा के गढ़ में जबरदस्त सेंधमारी की है। यहां से प्रहलाद सिंह पटेल ने 53 हजार 88 मतों की लीड प्राप्त की है। गौरतलब है कि बसपा प्रत्याशी जित्तू खरे बादल भी इसी विधानसभा किशुनगंज के रहवासी है, जो अपने ही गढ़ से महज 11 हजार 746 वोट ही ले पाए हैं।