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राजनगर जलाशय लबालब हुआ, नहीं होगा शहर में इस साल जलसंकट

Samved Jain

Publish: Sep 22, 2019 17:55 PM | Updated: Sep 22, 2019 17:55 PM

Damoh

शहर की प्यास बुझाने वाला राजनगर जलाशय लबालब हुआ, नहीं होगा शहर में इस साल जलसंकट,क्षमता से अधिक भर जाने के कारण लाखों लीटर पानी बेस्ट बियर से हो रहा ओवर फ्लो

दमोह. शहर की जलापूर्ति करने वाला राजनगर जलाशय वर्ष 2016 के बाद इस साल क्षमता अनुरुप भरा है और जलाशय का पानी झरने के रुप में बेस्ट बियर से ओवर फ्लो हो रहा है। जलाशय में पर्याप्त पानी भर जाना शहरवासियों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। क्योंकि पिछले साल लोगों को जलसंकट से जूझना पड़ा था। लेकिन इस साल ऐसा नहीं होने की उम्मीद जताई गई है। नपा अधिकारियों का मानना है कि जलाशय में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष क्षमता के मुकाबले पर्याप्त पानी भर चुका है जिससे अब इस साल शहर में जलसंकट की स्थिति निर्मित नहीं होगी। गर्मी के दिनों में 80 एमसीएफटी पानी रिजर्व में स्टॉक रखा जा सकेगा। वहीं दूसरी ओर लबालब हो चुका राजनगर जलाशय इस समय पर्यटक स्थल के रुप में आकर्षण का केंद्र भी बना है।

183 एमसीएफटी पानी का स्टॉक हुआ
राजनगर जलाशय की क्षमता 183 एमसीएफटी अर्थात 183 मिलियन क्यूविक फुट है। इस क्षमता के अनुरुप जलाशय में 183 एमसीएफटी पानी का स्टॉक हो चुका है। जलाशय पूरा भरने के बाद अतिरिक्त पानी बेस्ट बियर से होकर बह रहा है। जिसका अनुमानित आंकलन लाखों लीटर पानी प्रति घंट बहना माना जा सकता है। वहीं पिछले साल 2018 में जलाशय में स्टॉक हुए पानी की बात की जाए तो 5.18 एमसीएम क्षमता वाले राजनगर जलाशय में मात्र 130 एमसीएफटी पानी का स्टॉक हो सका था जो इस साल के स्टॉक से 53 एमसीएफटी कम है।

बताया गया है कि जलाशय का वर्तमान एरिया 19 वर्ग किलोमीटर है। इस जलाशय को अंग्रेजी शासन के कार्यकाल में बनाया गया था। उस समय से लेकर वर्ष 2006 तक जलाशय में पानी स्टॉक की क्षमता 68 एमसीएफटी थी। लेकिन नगरपालिका द्वारा जलाशय की क्षमता बढ़ाने सिंचाई विभाग से जलाशय की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य कराया गया था। फलस्वरुप जलाशय की क्षमता 68 एमसीएफटी से बढ़कर 100 एमसीएफटी हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2013 में पुन: सिंचाई विभाग ने जलाशय की क्षमता बढ़ाने के लिए केचमेंट एरिया में कार्य शुरु किया और जलाशय में स्टॉक की क्षमता 100 से बढ़कर 183 एमसीएफटी पहुंच गई।

जलाशय के आसपास पानी भरपूर बरसने नहीं होता फुल टैंक
शहर अथवा जलाशय के आसपास भरपूर बारिश होने के बाद भी यह जरुरी नहीं है कि जलाशय फुल टैंक हो जाए। क्योंकि जलाशय तभी फुल टैंक हो सकता है जब जलाशय के केचमेंट एरिया में पर्याप्त बारिश हो। सब इंजीनियर मेघ तिवारी ने बताया है कि केचमेंट वह एरिया होता है जहां से पानी ढड़ककर जलाशय में पहुंचता है। यदि केचमेंट में बारिश पर्याप्त नहीं होती है तो फुल टैंक होना संभव नहीं है। भले ही जलाशय से सटकर जोरदार पानी बरसता रहे। तिवारी का कहना है कि साल 2016 के बाद इस साल केचमेंट एरिया में भरपूर पानी गिरा है जो ढड़ककर जलाशय में पहुंचा जिससे जलाशय क्षमता अनुरुप भरा है।

यह है शहर की जलापूर्ति क्षमता
शहर की जलापूर्ति खपत 2 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन की है। इस हिसाब से जलाशय में जमा 183 एमसीएफटी पानी में से प्रतिदिन की खपत के हिसाब से पानी शहर भेजा जाए तो एकत्र हुआ पानी छह माह तक शहर की जलापूर्ति कर सकेगा। हालांकि शहर की जलापूर्ति राजनगर जलाशय के अलावा वर्ष 2017-18 से ब्यारमा नदी से भी होने लगी है।
जलाशय की क्षमता बढ़ाया जाना अब संभव नहीं
सब इंजीनियर मेघ तिवारी ने बताया है कि ओवर फ्लो हो रहे पानी को रोकने के लिए यदि यह सोचा जाए कि जलाशय की क्षमता को और बढ़ा दी जाए तो यह संभव नहीं है। तिवारी के अनुसार क्षमता बढ़ाए जाने की वजह से जलाशय टूट सकता है और जिससे इसका असतित्व ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए ओवर फ्लो हो रहे पानी को रोकने का कोई प्रयास अब नहीं किया जा सकता है।
मनोमहक हुआ नजारा
राजनगर जलाशय का नजारा इन दिनों आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। बेस्ट बियर से ओवर फ्लो हो रहा पानी एक बड़े झरने की सख्ल लिए हुए है। इस झरने को निहारने और जल क्रीड़ा करने के लिए यहां लोगों की भीड़ सैकड़ों की संख्या में बनी रहती है। बेस्ट बियर बनने के बाद यहां का मनमोहक नजारा दूसरी बार देखने को मिल रहा है। सुबह से लेकर शाम तक यहां हर उम्र वर्ग के लोगों मौज मस्ती करते देखे जा रहे हैं। खासतौर से फोटोग्राफी करने वालों, सेल्फी के शौकीनों की भीड़ यहां अधिक देखने को मिल रही है।


जलाशय की जो क्षमता है उसके हिसाब जलाशय लबालब भर चुका है। ओवर फ्लो हो रहे पानी को रोकना संभव ही नहीं है। 14 साल पहले जलाशय में पानी के स्टॉक की जो क्षमता थी उससे तीन गुनी क्षमता अब हो चुकी है।
मेघ तिवारी, राजनगर जलाशय प्रभारी