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आखिर क्यों लाखों के आशयानें में नहीं रहना चाहते लोग, जानिए इस खबर में

Puspendra Tiwari

Publish: Sep 22, 2019 04:01 AM | Updated: Sep 21, 2019 19:02 PM

Damoh

साढ़े पांच लाख का मिला अनुदान फिर भी खाली पड़ी पीएम आवास योजना के तहत तैयार हुई कॉलोनी

दमोह. शहर के बांदकपुर बाइपास पर करोड़ों की लागत से नगरपालिका द्वारा पीएम आवास योजना के तहत तैयार कराई गई कॉलोनी के ९५ फीसदी मकान खाली पड़े हैं। जबकि जिन हितग्राहियों के नाम से मकान आवंटित किए गए हैं उन्हें मकान की चॉबी सौंपे जाने का क्रम लगभग दो साल पहले शुरु कर दिया गया था। कॉलोनी के अब तक वीरान रहने को लेकर जब पड़ताल की गई तो प्रमुख बात यह सामने आई है कि कॉलोनी में अभी तक स्थाई जल सप्लाई की व्यवस्था नहीं हो सकी है। यहां के वासिंदो के लिए पानी की टंकी का कार्य निर्माणाधीन है। जिसमें अभी लगभग छह माह का समय और लगना बताया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीएम आवास योजना के तहत चयनित 1346 हितग्राहियों के लिए मकान आवंटित किए गए हैं। बीपीएल कार्ड धारियों को नगरपालिका द्वारा ईडब्लूएस श्रेणी के मकान बनाए गए हैं। प्रति मकान की कीमत साढ़े सात लाख रुपए है। इसके अलावा नगरपालिका द्वारा एलआईजी व एमआईजी श्रेणी के मकान भी तैयार किए गए हैं।
पानी के लिए यह बनाई व्यवस्था
आवास कॉलोनी के लोगों के लिए फिलहाल पानी की व्यवस्था अस्थाई तौर पर की गई है। इस संबंध में आवास योजना प्रभारी सब इंजीनियर सुशील अग्रवाल ने बताया है कि कॉलोनी के समीपस्थ धरमपुरा वार्ड की पानी टंकी से पानी कॉलोनी तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा टैंकरों से जल सप्लाई की जाती है। हालांकि उन्होंने कहा है कि यह व्यवस्था अस्थाई तौर पर है। कॉलोनी के लोगों के लिए साढ़े तैरह लाख लीटर क्षमता की पानी टंकी का निर्माण किया जा रहा है। टंकी के निर्माण में अभी लगभग पांच माह का समय लग जाएगा।
पांच फीसदी लोगों ने ही किया रहना शुरु
दो साल पहले बनकर तैयार हो चुके मकानों को आवंटित किए जाने के बाद कॉलोनी में महज 140 मकानों में ही लोगों ने रहना शुरु किया है। जबकि लगभग 1200 मकानों में लोगों का रहवास बनना अभी शेष है। वहीं यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने रहवास तो शुरु किया लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते वह वापस हो गए। सुशील अग्रवाल से मिली जानकारी के मुताबिक 400 से अधिक लोगों को मकानों की चॉबी सौंपी जा चुकीं हैं। जिन हितग्राहियों को मकान दिए जाने हैं उनका पूर्व में ही चयन हो चुका था जिसकी सूचना उन्हें दी जा चुकी थी साथ ही उनके द्वारा मकान की राशि भी जमा की जा चुकी है।
साढ़े सात लाख के मकान में पांच लाख का अनुदान
कॉलोनी के ईडब्लूएस श्रेणी के जो 95 फीसदी मकान खाली पड़े हैं उनकी कीमत साढ़े सात लाख रुपए प्रति ईडब्लूएस की है। हितग्राही को यह रकम खुद नहीं भरनी पड़ी थी। जिन हितग्राहियों को यह मकान आवंटित हुए उन्हें 02 लाख रुपए की राशि किस्त में देनी पड़ी। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना से 03 लाख रुपए की राशि हितग्राही को मिली व 2 लाख 50 हजार रुपए का अनुदान चयनित हितग्राही को नगरपालिका प्रशासन द्वारा दिया गया। इस तरह कुल साढ़े सात लाख कीमत के यह मकान बनकर तैयार हो चुके हैं जो लोगों के रहवास बनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।
इधर भी लोगों का रुझान कम
नगरपालिका द्वारा करोड़ों की लागत से तैयार किए गए एलआईजी व एमआईजी मकानों के प्रति भी लोगों का रुझान कम होना सामने आया है। इन दोनों श्रेणियों के कई मकान लोगों ने लिए नहीं है जो आवंटित किया जाना शेष हैं। वहीं मकानों के लिए नपा द्वारा लगभग तीन बार आमंत्रण जारी किया जा चुका है। मकानों की कीमत को भी दो माह पहले नपा द्वारा कम कर दिया गया है। बताया गया है कि एलआईजी मकान की कीमत 24 लाख रुपए है जिसमें दो लाख रुपए कम कर दिए गए हैं। वहीं एमआईजी मकान की कीमत 30 लाख 50 हजार रुपए है।

वर्जन
शीघ्र ही कॉलोनी में पानी की स्थाई व्यवस्था हो जाएगी। अभी टैंकर व धरमपुरा पानी टंकी से पानी पहुंचाया जा रहा है। कुछ मकानों का फिनिसिंग का कार्य शेष है जो शीघ्र ही पूरा हो जाएगा।
सुशील अग्रवाल, आवास योजना प्रभारी