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गोशाला ऐसी जहां गायों को नहीं है चारा और पानी

Sanjay Singh Tomar

Publish: Jul 25, 2019 10:30 AM | Updated: Jul 24, 2019 18:14 PM

Dabra

मक के महाराजपुर गांवों में बनाई गई है चंदे से गोशाला

 

डबरा. ग्राम पंचायत महाराजपुर में 12 गांवों की पंचायतों द्वारा ग्रामीणों से चंदा एकत्रित कर गोशाला बनवाई गई थी। गोशाला संचालन के लिए ग्राम पंचायतों ने एक-एक हजार रुपए प्रतिमाह देने की बात कही थी, लेकिन गोशाला शुरू होने के बाद पंचायतों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते गोशाला का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। गोशाला में चारा, पानी की व्यवस्था न होने के साथ ही उसकी बाउंड्रीवॉल भी न होने व इसकी देखरेख करने वाला कोई न होने से इसमें गायें रखी नहीं जा रही हैं।
12 गांवों ने किया था चंदा
ग्राम पंचायत महाराजपुर के रामप्रसाद कुशवाहा, किरण सिंह, कमल सिंह, कैलाश ने बताया कि 12 गांव के ग्रामीणों द्वारा चंदा कर पंचायतों को दिया गया था, ताकि महाराजपुर में गोशाला चालू हो सके और किसानों की फसलों को नुकसान ना हो।

पंचायतो ंने नहीं दी राशि
तीन महीने पहले गोशाला बनवाने के बाद इसका शुभारंभ भी सिंचाई विभाग के चौकीदार की गाय का पूजन कर किया गया था। शुभारंभ के समय ग्राम पंचायतों ने वादा किया था कि गोशाला संचालन के लिए वे 1000 हजार रुपए प्रतिमाह देंगे।गोशाला में चारा, पानी की व्यवस्था न होने के साथ ही उसकी बाउंड्रीवॉल भी न होने व इसकी देखरेख करने वाला कोई न होने से इसमें गायें रखी नहीं जा रही हैं।

देखभाल को नहीं कर्मचारी
इस राशि से गायों के चारे, पानी की व्यवस्था के साथ ही गोशाला में रहने वाले कर्मचारियों का वेतन निकल सके, लेकिन गोशाला शुरू होने के बाद किसी भी पंचायत ने इस पर ध्यान नहीं दिया। न तो इसमें चारा है और इसकी देखभाल के लिए कोई कर्मचारी। गोशाला की बाउंड्रीवॉल भी टूटी पड़ी है। इसके चलते पशु चाहे जब बाहर निकल जाते हैं। देखभाल के लिए कर्मचारी नहीं होने से कई बार यह पशु काफी दूर निकल जाते हैं। इससे यह गोशाला पूरी तरह से असुरक्षित भी है।