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जन्म के 25 दिन बाद नन्ही जान को मरने के लिए छोड़ा, बचा ली जान

Madhu Sudhan Sharma

Publish: Sep 12, 2019 13:07 PM | Updated: Sep 12, 2019 13:07 PM

Churu

नन्ही आंखों में बस एक ही सवाल था, मां मेरी क्या गलती थी कि तुमने मुझे इस तरह मरने के लिए छोड़ दिया। क्या मेरी यही गलती है कि मैं बेटा नहीं होकर बेटी हूं।

चूरू. नन्ही आंखों में बस एक ही सवाल था, मां मेरी क्या गलती थी कि तुमने मुझे इस तरह मरने के लिए छोड़ दिया। क्या मेरी यही गलती है कि मैं बेटा नहीं होकर बेटी हूं। इसलिए रात के अंधेरे में मुझे मरने के लिए छोड़ दिया। मंगलवार को कलक्ट्रेट सर्किल के पास लावारिस हालत में मिली बेटी छोटी-छोटी आंखों से भीड़ में अपनी मां को तलाश करने की कोशिश कर रही थी। वजह चाहे कुछ भी रही हो, लेकिन मां का आंचल नहीं मिलने पर अचानक रो पड़ी। वहां से गुजर रहे राहगिर शमशेर की नजर पडऩे पर उसने पास जाकर देखा और कोतवाली पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी राहगिर के साथ उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। जानकारी लगने पर चाइल्ड लाइन के जिला समन्वयक कपिल भाटी मौके पर पहुंचे। चिकित्सकों ने बताया कि मासूम का जन्म करीब 25 दिन पूर्व ही हुआ है। मासूम को देखरेख के लिए राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण चूरू को सौंपा गया है।

यूं कर सकते पता
जानकारों की माने तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व एएनएम शहर सहित गांवों में गर्भवती महिलाओं की जानकारी रखती है। समय पर जाकर उनका टीकाकरण कराया जाता है। इसके लिए विभाग की ओर से उन्हें मोटी तनख्वाह दी जाती है।अगर विभाग की ओर से जांच कराई जाए तो ऐसे आरोपियों का आसानी से पता लगाया जा सकता है।

फैंके नहीं पालने में रखें
प्रदेश में बच्चियों को इस तरह फैंकने की घटनाओं के बाद जिला अस्पतालों में पालना गृह बनाए गए हैं। पालना गृह में बच्चों को रखने वाले के बारे में पुलिस की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाती है। साथ ही व्यक्ति से किसी तरह की पूछताछ नहीं की जाती है। इधर जिले में लिंगानुपात पर नजर डालें तो सादुलपुर तहसील के हालात ज्यादा खराब नजर आते हैं। जिस पर ध्यान देना जरूरी है।

अब तक नवजात शिशुओं को फैंकने की प्रमुख घटनाएं
-21 सितंबर 2013 को जिला मुख्यालय पर ट्रेन में नवजात बच्ची मिली, जिसे बाद में बाल कल्याण समिति के सहयोग से जिला प्रशासन ने कार्रवाई कर किसी परिवार को गोद दे दिया।

-12 जून 2014 को साहवा-धीरवास बड़ा के बीच नवजात बच्ची को अज्ञात लोग डिब्बे में बंद कर पेड़ पर लटकाकर छोड़ गए। मामला दर्ज हुआ, लेकिन परिजनों का खुलासा नहीं हुआ।

- जुलाई 14 में भानीपुरा थाना इलाके के गांव आसपालसर के पास नवजाज बालक मिला। बाल कल्याण समिति की ओर से बच्चे की देखभाल की गई, जिसकी बाद में मौत हो गई। मां बाप का पता नहीं चला।

-अगस्त 2014 में एक मां-बेटी नवजात बच्ची को चूरू शहर में चूरू-जयपुर पैसेंजर ट्रेन में छोड़ कर चली गई। मां की ओर से मना करने पर बाल कल्याण समिति की ओर से बालिका को जयपुर बाल शिशु गृह में भिजवा दिया गया।
- 24 अप्रेल 2015 को बीदासर तहसील के दूंकर बस स्टैण्ड के पास ईंटों के ढेर में नवजात शिशु अज्ञात फैंककर चला गया। जीवित नवजात था और सफेद कपड़ों में लिपटा हुआ मिला।

- एक सितंबर 2017 को नवजात बालक को कोईअज्ञात डीबी अस्पताल में छोड़कर चला गया।

- 29 सितंबर 2017 को डीबी अस्पताल में नवजात बालिका को छोड़कर चला गया।

- 23 अक्टूबर 2017 को भी डीबी अस्पताल में एक नवजात बालिका मिली।

- 12 नवंबर 2017 को चूरू के वार्ड 44 में कोई अज्ञात नवजात बालिका को फैंककर फरार हो गया।

-10 दिसंबर 2018 को डीबी अस्पताल में कोई अज्ञात नवजात बालक को छोड़कर फरार हो गया।

- 20 नवंबर 2018सुजानगढ़ के वार्ड नंबर छह में अज्ञात नवजात बालिका को फैंककर फरार हो गया।

- 24 जुलाई 2019रतनगढ़ के संगम चौराहे से जिंदा नवजात बालिका लावारिश हालत में मिली।

- 11 सितंबर 2019 को कलक्टे्रट के पास लावारिश हालत में एक नवजात बालिका मिली।

प्रति हजार बेटों पर बेटियों की संख्या
तहसील वर्ष 2001 2011
रतनगढ़ 899 900
सरदारशहर 927 915
तारानगर 910 897
चूरू 906 894
सुजानगढ़ 919 893
राजगढ़ 875 874