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ऐसा क्या हो गया कि पांचवें दिन भी बंद रहा स्टेट हाइवे

Vijay

Publish: Sep 11, 2019 23:48 PM | Updated: Sep 11, 2019 23:48 PM

Chittorgarh

चित्तौडग़ढ़/राशमी. मातृकुण्डिया बांध से गत ७ सितंबर से बनास नदी में लगातार पानी छोड़े जाने से यातायात पर प्रतिकूल असर पड़ा। बनास के बहाव एरिया में सांखली के निकट एनिकट कम काजवे पर बुधवार को लगातार पांचवें दिन भी पानी बहने से कपासन से कारोई को जोडऩे वाले स्टेट हाइवे ९६ पर आवागमन बंद रहा।

चित्तौडग़ढ़/राशमी. मातृकुण्डिया बांध से गत ७ सितंबर से बनास नदी में लगातार पानी छोड़े जाने से यातायात पर प्रतिकूल असर पड़ा। बनास के बहाव एरिया में सांखली के निकट एनिकट कम काजवे पर बुधवार को लगातार पांचवें दिन भी पानी बहने से कपासन से कारोई को जोडऩे वाले स्टेट हाइवे ९६ पर आवागमन बंद रहा। इस दौरान कुछ लोगों ने जान जोखिम में डालकर काजवे को पार भी किया। सांखली में एनिकट कम काजवे की जगह पुलिया बनाए जाने की आवश्यकता सालों से महसूस की जा रही हैं। लेकिन पुलिया का निर्माण नहीं हो पाया। ७ सितंबर शाम से ही स्टेट हाइवे पर आवागमन बंद हो जाने का क्षेत्र में व्यापारिक एवं सरकारी कामकाज पर असर पड़ा हैं। सांखली के निकट से बनास नदी पार नहीं हो पाने से सोमी, सांखली, रेवाड़ा, पहुंना, लसाडिय़ा कलां ग्राम पंचायतों सहित कई गावों के लोगों को उपखण्ड मुख्यालय पर आने के लिए लम्बा चक्कर लगाकर मातृकुण्डिया बांध के ब्रिज से गुजरना पड़ रहा हैं। इससे पूर्व भी वर्ष २००६ में बनास नदी में मातृकुण्डिया बांध से पानी छोड़े जाने से उक्त मार्ग पर लगातार १५ दिन यातायात बंद रहा था। लेकिन उस समय उक्त सड़क सामान्य सड़क श्रेणी में आती थी।
क्षेत्र में बनास नदी का बहाव करीब २५ किलोमीटर है। बनास नदी पर बने मातृकुण्डिया, देवपुरा, गेगपुरा, राशमी, सोमी, सांखली, मरमी माता, पहुंना व ऊंचा के पास बने एनिकट कम काजवे से आवागमन होता है। लेकिन मातृकुण्डिया बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नदी में उफान आ जाता हैं तथा आवागमन बंद हो जाता हैं। चित्तौडग़ढ़ से गंगापुर एवं कपासन से कारोई प्रमुख सड़क मार्ग होने से करीब चार दशक पूर्व बनास नदी पर मातृकुण्डिया व सांखली में एनीकट कम काजवे बनाए गए। लेकिन काजवे पर पानी आने के साथ ही आवागमन बंद हो जाता हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को आवागमन के लिए ३५-४० किलोमीटर दूर हमीरगढ़ फोरलेन पर बनी पुलिया से होकर गुजरना पड़ता है। विधायक अर्जुनलाल जीनगर ने बताया कि सांखली काजवे को पुलिया में बदले जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मेगा हाइवे निर्माण के दौरान पुलिया का निर्माण करवाया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग उपखण्ड राशमी के सहायक अभियंता वीआर नागर ने बताया कि सांखली एनिकट कम काजवे की जगह पुलिया निर्माण को लेकर प्रस्ताव उच्च स्तर पर भिजवाए गए थे। लेकिन बजट स्वीकृति नहीं मिल पाई हैं।
पिंड बांध पर चली चादर, पहली बार में छलका
बड़ीसादड़ी. उपखण्ड के पिंड गांव की सीमा पर बना पिंड बांध पहली बरसात में छलक गया और शनिवार को चादर चल गई। बांध से निकलती जलराशि को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे। बड़वल ग्राम पंचायत के जियाखेड़ी गांव का मुख्य मार्ग झमाझम बारिश की वजह से शनिवार को दिन में तीन घंटे तक बाधित रहा। एनीकट कम कॉजवे पर सड़क के ऊपर से बहते पानी से आवागमन बाधित रहा। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन से पुलिया को ऊंचा करने की मांग की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। गांव में बीमार आदमी को अस्पताल तक ले जाना संभव नहीं होता है। ऐसे में बीमार की स्थिति और गंभीर हो जाती है। खेरमालिया से बड़ीसाद़़ी मार्ग पर मूसलाधार बारिश पुलिया के ऊपर से पानी बहने से गांवों का सम्पर्क टूट गया।