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चार माह में जांच की कछुआ चाल, ऑडिट को बनाया आड

kalulal lohar

Publish: Oct 19, 2019 14:14 PM | Updated: Oct 19, 2019 14:14 PM

Chittorgarh

जिले के सबसे बड़े महाविद्यालय महाराणा प्रताप राजकीय पीजी कॉलेज में अभिभावकों की गाढ़ी कमाई से छात्रों द्वारा शुल्क के नाम पर जमा कराई गई लाखों रुपए की राशि का गबन हो गया।

रिपोर्ट दर्र्ज होने के चार माह बाद भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
चित्तौडग़ढ़. जिले के सबसे बड़े महाविद्यालय महाराणा प्रताप राजकीय पीजी कॉलेज में अभिभावकों की गाढ़ी कमाई से छात्रों द्वारा शुल्क के नाम पर जमा कराई गई लाखों रुपए की राशि का गबन हो गया। पहले तो पांच वर्ष तक कॉलेज में छात्रकोष में जमा हो रही राशि में गड़बड़ी होती रहने का पता ही नहीं चला। गबन का दायरा ८९ लाख रुपए से अधिक तक पहुंचने के बाद किसी तरह २१ जून को पुलिस में रिपोर्ट ेे हो गई लेकिन कार्रवाई ठण्डे बस्ते में चली गई। हालत ये है कि सरकारी कोष से लाखों रुपए के गबन के इस मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सदर थाना पुलिस अब तक जांच पड़ताल भी नहीं कर पाई है। पुलिस रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से ही ऑडिट रिपोर्ट मिलने पर आगे कार्रवाई का राग अलाप रही है लेकिन ये रिपोर्ट कितने समय में मिलनी है इस बारे में ठोस जवाब नहीं है। इधर,गबन राशि की फाइलों की ऑडिट हुए बिना पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ पाने पर दो माह बाद सरकारी तंत्र की नींद खुली और २० अगस्त से कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के दल ने विशेष अंकेक्षण शुरू कर दिया। ये अंकेक्षण दो माह बाद भी पूरा नहीं होने से पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ा रही है। पुलिस का तर्क है कि ऑडिट रिपोर्ट आने पर वे आगे कार्रवाई कर पाएंगे तो कॉलेज प्रशासन ऑडिट जारी होने का तर्क दे रहा है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राकेश भट्टड़ ने गबन के इस मामले में २१ जून को सदर थाने में निलंबित चल रहे कैशियर विक्रमसिंह के खिलाफ ८८ लाख ८९ हजार ९०५ रुपए गबन की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी रिपोर्ट में मांग की गर्ई थी कि विक्रम सिंह व अन्य दोषी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सरकारी कोष की ८८ लाख ८९ हजार ९०५ रुपए की वसूली की जाए। इस मामले में कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने २१ मई व १० जून को पत्र भेज प्राचार्य को विक्रम सिंह के अलावा गबन अवधि में रहे प्राचार्य, कार्यवाहक प्राचार्य, डीडीओ व सहायक लेखाधिकारी के खिलाफ भी एफआईआर के निर्देश दिए थे लेकिन प्राचार्य ने रिपोर्ट में इनमें से किसी को नामजद नहीं किया।

ऑॅडिट में गबन का दायरा बढऩे की आशंका
माना जा रहा है कि कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय का ऑडिट दल कॉलेज के लेखाजोखा खंगाल ये तय करने का प्रयास कर रहा है कि गबन का वास्तविक आंकड़ा कितना है। इस बारे में अभी कोई खुलकर बात करने तो तैयार नहीं लेकिन सूत्रों के अनुसार ऑडिट में ये आंकड़ा दो करोड़ से अधिक की राशि तक पहुुंच चुका है। इस मामले में विक्रमसिंह के अलावा अन्य कौनसे अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका रही इसकी भी जांच हो रही है। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार प्रथम दृष्टया ८८ लाख ९४ हजार ९०५ रुपए का गबन प्रमाणित होने पर महाविद्यालय प्रशासन ने कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय को पत्र भेज अंकेक्षण विभाग से ऑडिट कराने का आग्रह किया था। इस ऑडिट के बाद ही गबन की वास्तविक राशि का खुलासा हो सकेगा।

पैसे निकलते गए लेकिन रिकॉर्ड ही नहीं रखा
गत वर्ष जनवरी में कॉलेज में जनसहभागिता से नए कक्षाकक्ष बनाने की घोषणा की गई। इस कार्य के लिए तत्कालीन प्राचार्य ने २५ लाख रुपए की राशि का चेक बैंक में जमा कराने को दिया तो वहां से बैलेंस कम बताया गया। कॉलेज की कैश बुक इससे अधिक राशि जमा होना बता रही थी तो प्राचार्य को छात्र कोष की राशि में गबन की आशंका हुई। प्रारम्भिक पड़ताल के बाद कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय को मामले की रिपोर्ट भेजने के बाद पता चला कि पांच वर्ष से इस तरह की गड़बड़ी हो रही है। पुलिस में दी रिपोर्ट के अनुसार ८८ लाख ९४ हजार ९०५ रुपए की राशि विक्रमसिंह द्वारा अलग-अलग तिथियों में जरिये चेक व नगद बैंक से आहरित की गई लेकिन इस राशि के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार के वाउचर एवं दस्तावेज महाविद्यालय के लेखा एवं रोकड़ विभाग में उपलब्ध नहीं है। इस अवधि की रोकड़ बही का संधारण भी नहीं किया गया।

चित्तौडग़ढ़ पीजी कॉलेज में गबन के मामले में पुलिस गंभीर है। आगे कार्रवाई के लिए ऑडिट की रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। इसके आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विक्रमसिंह, थानाधिकारी सदर थाना चित्तौडग़ढ़