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जंगल में कर रहे शौच, शौचालय में बांधी बकरियां, भर दिए कंडे

Jitender Saran

Publish: Sep 22, 2019 23:10 PM | Updated: Sep 22, 2019 23:10 PM

Chittorgarh

स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में भले ही लक्ष्य निर्धारित कर शौचालयों का निर्माण पूरा करवा लिया गया हो। इन शौचालयों पर सरकार की करीब पौने दो अरब से ज्यादा राशि भी खर्च हो चुकी है, लेकिन जिले के ग्रामीण अंचल में आज भी पचास फीसदी लोग खुले में शौच कर रहे हैं। ऐसे हालात भी तब है जब चित्तौडग़ढ़ जिले पर पूरी तरह ओडीएफ होने की मुहर लग चुकी है। हालात यह है कि अधिकांश सरकारी शौचालय भी उपयोग के योग्य नहीं है। कोई जर्जर हो चुका है तो कहीं पानी की व्यवस्था तक नहीं है। कई गांवों में शौचालयों में गोबर के कण्डे

जितेन्द्र सारण. चित्तौडग़ढ़
भारत मिशन के तहत शौचालय को लेकर जिले में 267203 घरों का सर्वे किया गया था। इनमें से मात्र 33089 घरों में ही शौचालय पाए गए थे। जिले में २,३४,११४ परिवार ऐसे थे, जिन्होंने घरों में शौचालय नहीं बनवा रखे थे। इनमें 40,766 बीपीएल परिवार भी शामिल थे। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर युद्ध स्तर पर प्रयास किए गए और जिले में करीब सवा दो लाख शौचालयों का निर्माण करवा दिया गया। इस योजना के तहत अब तक लाभार्थियों को 1 अरब 81 करोड़ २६ लाख ७२ हजार रूपए का भुगतान किया जा चुका है।
इसलिए जरूरी है शौचालयों का उपयोग
गांवों की आबादी का बड़ा भाग खुले में शौच को जाता है। मल जल के साथ मिलकर पेयजल को दूषित करता है। खुले में शौच के कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खुले में शौच से डायरिया, पीलिया, पोलियो जैसी बीमारी की आशंका है। शौच के लिए वक्त-बेवक्त बाहर जाने में परेशानी होती है। वहीं बारिश और सर्दी के दिनों में शौच के लिए बाहर जाने में भी कई दिक्कतें महसूस होती है।
12 हजार रूपए राशि
पात्र परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत १२ हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसका लाभ बीपीएल के साथ एपीएल परिवारों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन मजदूर, शारीरिक असक्षम और महिला मुखिया वाले परिवारों को भी दिया जाता है। ग्राम पंचायतों में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन कार्यों के लिए सात से बीस लाख रुपए तक का प्रावधान है।
यह है शौचालयों के हालात
पत्रिका संवाददाता ने जब ओछड़ी की कालबेलिया बस्ती में जाकर शौचालयों के बारे में जानकारी ली तो वहां कुछ शौचालयों के छत नहीं थी तो किसी के दरवाजे टूटे हुए थे। एक शौचालय तो धराशायी हो चुका था। यहां लोगों का कहना था कि शौचालयों की गुणवत्ता अच्छी नहीं होने से अब ये उपयोग के योग्य नहीं रहे, ऐसे में बस्ती के लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। ओछड़ी के अहिंसा नगर में बना एक शौचालय कबाड़ में तब्दील हो चुका है। इस पर लाभार्थी का नाम भी अंकित है, लेकिन यह उपयोग के योग्य नहीं है। सेमलिया गांव में बने शौचालय के बाहर बकरियां बांधी हुई थी और शौचालय में चारा भरा हुआ था। इसके दरवाजा भी नहीं था। इसी तरह सेगवा गांव में बने शौचालय में गोबर के कण्डे भरे हुए थे। यह तो सिर्फ रेण्डम सर्वे है। हकीकत में जिले के ग्रामीण अंचल में बनाए गए शौचालयों के हालात भी ऐसे ही है।
हर गांव में चार पेन्टिग, अब ओडीएफ प्लस योजना
जिला प्रशासन की ओर से भी यह पूरे प्रयास किए जा रहे है कि शौचालय बनाने वाले लाभार्थी खुले में शौच नहीं जाकर शौचालयों का उपयोग करे। इसके लिए जागृति पैदा करने के लिए हर गांव में चार पेन्टिंग बनवाई जा रही है, जिस पर शौचालयों के उपयोग के संदेश लिखे जा रहे है। जिले में रेट्रोफिटिंग सर्वे भी करवाया जा रहा है। सरकार की तरफ से अब ओडीएफ प्लस योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत शौचालयों की मरम्मत आदि के कार्यों पर सरकार की ओर से साढे चार हजार रूपए प्रति शौचालय खर्च करने का प्रावधान है।

जिले में शौचालयों की हकीकत
जिले में 2,14,787 शौचालय बन चुके हैं
इनमें से 151056 शौचालयों का भुगतान कर दिया गया है।
ग्रामीण अंचल में अब भी पचास फीसदी लोग करते हैं खुले में शौच
50 फीसदी सरकारी शौचालय भी नहीं है उपयोग योग्य
जिले में 2014 से अब तक बनाए गए शौचालयों का अब तक १ अरब ८१ करोड़ २६ लाख ७२ हजार रूपए का भुगतान किया जा चुका है।
प्रत्येक लाभार्थी को १२ हजार रूपए का भुगतान किया गया है।

यह है शौचालयों के आंकड़े
ब्लॉक कुल शौचालयों निर्माण शौचालयों का भुगतान भुगतान की गई राशि
बड़ीसादड़ी 15513 11055 132660000
बेगूं 17855 17388 208656000
भदेसर 17899 15890 190680000
भैंसरोडग़ढ़ 17698 14110 169320000
भूपालसागर 16137 9995 119940000
चित्तौडग़ढ़ 33032 20008 240096000
डूंगला 16968 11556 138672000
गंगरार 14314 11000 132000000
कपासन 19462 10719 128628000
निम्बाहेड़ा 28457 20114 241368000
राशमी 17452 9221 110652000
कुल 214787 151056 1812672000