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खून की कमी से जूझ रही तेरह हजार से ज्यादा प्रसूताएं

Jitender Saran

Publish: Dec 07, 2019 07:00 AM | Updated: Dec 06, 2019 22:09 PM

Chittorgarh

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत 13 हजार 495 प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन की मात्रा निर्धारित से कम पाई गई है। जबकि ३२५ प्रसूताओं में तो इसकी मात्रा सिर्फ सात ग्राम और इससे कम पाई गई है। खानपान में संतुलित आहार की कमी से यह समस्या सामने आ रही है। प्रसव के समय प्रसूता के खून में हिमोग्लोबिन की मात्रा ११ ग्राम से अधिक होनी चाहिए।

चित्तौडग़ढ़
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से अप्रेल २०१९ से अक्टूबर २०१९ तक जिले में कुल १७ हजार ९९६ प्रसूताओं का पंजीयन किया गया, जिनके रक्त की जांच में १३ हजार ४९५ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन की कमी पाई गई। इनके अलावा ३२५ प्रसूताओं के रक्त में हिमोग्लोबिन की मात्रा सिर्फ सात ग्राम ही पाई गई, जो बहुत ही कम है। हालाकि इन महिलाओं में इंजेक्शन या दवाइयों के जरिए हिमोग्लोबिन की मात्रा बढाने के चिकित्सकीय प्रयास किए जाते हैं। विभाग की ओर से शहरी यूनिट में ३४९६ प्रसूताओं का पंजीयन किया गया, इनमें २८३८ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन कम पाया गया। जबकि १२२ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन की मात्रा सात ग्राम या इससे कम पाई गई। निम्बाहेड़ा क्षेत्र में २५८९ प्रसूताओं में खून की कमी पाई गई और ६५ में हिमोग्लोबिन की मात्रा सात और इससे कम पाई गई। बड़ीसादड़ी में १३१६ में से १०६१ में खून की कमी पाई गई और १ में अत्यधिक रक्ताल्पता पाई गई। बेगूं में १६७९ में से ११८९ में रक्ताल्पता और १८ में अत्यधिक रक्ताल्पता पाई गई। भदेसर में १४०० में से ८६७ में खून की कमी पाई गई और ६ प्रसूताओं में इसकी अत्यधिक कमी पाई गई। भूपालसागर में १००३ में से ८५७ प्रसूताओं में रक्ताल्पता और ६ में अत्यधिक रक्ताल्पता पाई गई। चित्तौडग़ढ़ में ३४९६ प्रसूताओं का पंजीयन हुआ, इनमें २८३८ प्रसूताएं खून की कमी से ग्रसित पाई गई जबकि १२२ में हिमोग्लोबिन की अत्यधिक कमी पाई गई। डूंगला में १२४६ में से १००० प्रसूताओं में रक्ताल्पता व ८ में खून की अत्यधिक कमी पाई गई। गंगरार क्षेत्र में पंजीकृत १३४४ प्रसूताओं में से १९७ में रक्ताल्पता पाई गई। जबकि १३ प्रसूताओं में हिमोग्लोबिन सात ग्राम से कम पाया गया है। कपासन क्षेत्र में १३६८ में से ११४० में खून की कमी और ३५ में अत्यधिक खून की कमी पाई गई। राशमी क्षेत्र में पंजीकृत १०१९ प्रसूताओं में से ५३४ में खून की कमी पाई गई। रावतभाटा क्षेत्र में १६४४ में से १२२३ में खून की कमी और ४३ में हिमोग्लोबिन की मात्रा अत्यधिक कम पाई गई।
ऐसे होता है उपचार
डीपीएम विनायक मेहता ने बताया कि प्रसव पूर्व जांच में प्रसूताओं के खून में हिमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगा लिया जाता है। जिन प्रसूताओं में खून की कमी होती है उन्हें आयरन सुक्रोज इंजेक्शन लगाकर हिमोग्लोबिन की मात्रा बढाने के प्रयास किए जाते हैं। इसके अलावा जिन प्रसूताओं के खून में हिमोग्लोबिन की मात्रा सात या इससे कम पाई जाती है, उन्हें खून चढाने की व्यवस्था की जाती है। हिमोग्लोबिन की जांच सब सेंटर स्तर तक भी उपलब्ध है।
इसलिए होती है खून की कमी
महिला एवं प्रसूती रोग विशषज्ञ डॉ. हेमलता बक्षी के अनुसार पोषक तत्वों की कमी, चालीस से पैंतालीस की उम्र के बाद, हारमोंस संबंधी बीमारी, अधिक बार प्रसव होने जैसे कारणों से महिलाओं में खून की कमी की समस्याएं आती है। इन बातों का ध्यान रखकर चिकित्सकीय सलाह से दवा के जरिए इस समस्या से निजात पाई जा सकती है।

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