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यहां पर खुले में रात बितानी पड़ रही असहाय व दिहाड़ी मजदूरों को

kalulal lohar

Publish: Dec 08, 2019 14:12 PM | Updated: Dec 08, 2019 14:12 PM

Chittorgarh

हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में खुले आसमां में फुटपाथ पर रात गुजराने की कल्पना मात्र से ही लोगों की कंपकंपी छूट जाती है पर सच्चाई तो यही है कि बेघर लोगों का ताले लगे रैन बसेरे मुंह चिढा रहे हैं। रैन बसेरे शुरू नहीं होने से बेघर लोगों को फुटपाथ पर खुले में रात गुजारनी पड़ रही है।

चित्तौडग़ढ़. हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में खुले आसमां में फुटपाथ पर रात गुजराने की कल्पना मात्र से ही लोगों की कंपकंपी छूट जाती है पर सच्चाई तो यही है कि बेघर लोगों का ताले लगे रैन बसेरे मुंह चिढा रहे हैं। रैन बसेरे शुरू नहीं होने से बेघर लोगों को फुटपाथ पर खुले में रात गुजारनी पड़ रही है।
शहर के प्रमुख रैन बसेरों की शुक्रवार रात पत्रिका ने पड़ताल की तो सर्दी से बचाव के लिए नगर परिषद की ओर से किए गए प्रयास और सरकार की मंशा की हकीकत सामने आ गई। हर वर्ष नगर परिषद की ओर से स्थाई के साथ अस्थाई रैन बसेरों का संचालन किया जाता है। पिछले कुछ दिनों से रात का तापमान १०-१२ डिग्री दर्ज किया जा रहा है, इसके बाद भी जिम्मेदारों द्वारा अस्थाई रूप से संचालित किए जाने वाले रैन बसेरों को शुरू करना तो दूर की बात, स्थायी रूप से संचालित रैन बसेरों पर भी ताले लटके हुए है।
पड़ताल के दौरान कहीं लोग खुले में रात बिताते मिले तो कई लोग अलाव जलाकार सर्दी से बचाव करते हुए दिखे। फुटपाथ पर बड़ों के साथ मासूम भी सर्दी से कांपते हुए मिले। फुटपाथ पर रात गुजारने वाले लोगों से पूछा तो उन्हें रैन बसेरों के बारे में जानकारी ही नहीं थी। कुछ का कहना था कि जहां हर बार रैन बसेरे लगाए जाते वहां पर ताले लगे हुए हंै।

स्थान : निजी बस स्टैंड समय: रात्रि 11 बजे
गांधी नगर स्थित निजी बस स्टैंड पर स्थायी रूप से रैन बसेरा बना हुआ है, लेकिन यहं पर भी ताला लगा हुआ था।


स्थान: रेलवे स्टेशन समय: रात्रि 11.30
रात साढ़े ग्यारह बजे रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरे पर पहुंचे तो जहां रैन बसेरा संचालित किया जाता, वहां पर ताला टूटा हुआ था। अंदर कपड़े बिखरे हुए थे और अंदर शराब की खाली बातलें भी पड़ी हुई थी। इस भवन के हालात देखकर ऐसा लगा जैसे यहां पर समाज कंटकों का जमावड़ा रहता हो। जबकि रेलवे स्टेशन क्षेत्र में सैकड़ों लोग फुटपाथ पर रात गुजार रहे थे।

स्थान: जिला अस्पताल समय: रात्रि 11.45
जिला अस्पताल में संचालित रैन बसेरे पर पहुंचे तो वहां नजारा कुछ अलग ही था। जहां अस्पताल में मरीजों के परिजन वार्ड की गलियों में सो रहे थे और ठंड से कांप रहे थे तो दूसरी ओर यहां संचालित रैन बसेरे में दो व्यक्ति सोते हुए मिले। अंदर एक स्कूटी भी रखी हुई थी। रैन बसेरे का दरवाजा खोलने के लिए काफी देर तक आवाज लगाई लेकिन किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला। दरवाजा अंदर से बंद था।

स्थान: रोडवेज बस स्टैंड समय : रात्रि 12 बजे
रोडवेज बस स्टैंड पर हर साल नगर परिषद की ओर अस्थाई रूप से रैन बसेरा संचालित किया जाता है, लेकिन अब तक यहां पर इस रैन बसेरा शुरू नहीं किया गया जिसके चलते यहां पर कई लोग खुले में सोते हुए मिले। रोडवेज बस स्टैंड पर प्लेटफार्म पर कई लोग ठंड से बचाव करते हुए। कई ठंड से बचने के लिए अलाव का सहार लेते भी दिखे।

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