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खुश होता है भगवान तब घर में जन्म लेती है बेटियां

Nilesh Kumar Kathed

Publish: Sep 21, 2019 23:51 PM | Updated: Sep 21, 2019 23:51 PM

Chittorgarh


- बेटियाों ने छोड़ी छाप, किसी से कम नहीं हर क्षेत्र में
- बिटिया एट वर्क अभियान में टॉक शो


चित्तौडग़ढ़. बेटियां किसी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं है। जहां भी उन्हें अवसर मिला ये साबित कर दिया। घर की रौनक एवं माता-पिता की शान बेटियां होती है। बेटियां दो परिवारों का गौरव व खुशियों का आधार होती है। ये विचार राजस्थान पत्रिका के बिटिया एट वर्क अभियान में फेसबुक लाइव कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों ने व्यक्त किए। कुंभानगर स्थित न्यू सीकर एकेडमी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने काव्य रचनाओं एवं संवाद के माध्यम से बेटियों के प्रति मन के उद्गार व्यक्त किए। जिला प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी कल्याणी दीक्षित ने कहा कि उनके तीन बेटे है लेकिन एक बेटी नहीं होने की कसक अब भी मन में है। बेटियों के बीच रहकर हमेशा खुशी महसूस हुई। उनके पिता ने उन्हें कभी बेटे से कम होने का अहसास नहीं होने दिया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीता शर्मा ने कहा कि उन्हें उस समय अफसोस होता है जब लोग कहते है कि बेटी तो है लेकिन एक बेटा भी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जब सुनीता विलिम्यस व कल्पना चावला जैसी महिलाएं पूरी दुनिया में भारत का नाम कर रही है तब इस तरह की सोच को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि उनके एक ही बेटी है लेकिन कभी नहीं लगा कि बेटा भी जरूरी है। समाज के लिए दोनों को समान महत्व देना जरूरी है। राधाकृष्ण हॉस्पिटल के प्रबन्ध निदेशक अधिवक्ता प्रशान्त शर्मा ने कहा कि बेटियों ने हमेशा परिवारों का गौरव बढ़ाया है एवं उनके प्रति समाज के नजरिये को बदलना होगा। बेटी बचाओ-बेटी पढ़़ाओ मुहिम का सार्थक असर दिखना चाहिए। व्याख्याता डॉ. कनक जैन ने कहा कि गांवों में अब लोग बेटियों को स्कूल भेजने लगे है लेकिन अब भी भेदभाव की स्थिति सामने आती है। लोग बेटो को महंगी शिक्षा दिलाना चाहते है लेकिन बेटियों को सामान्य शिक्षा तक सीमित कर देना चाहते है। उन्होंने कहा कि बेटियां माता-पिता की जितनी सेवा करती है उतनी शायद पुत्र नहीं कर पाते है। उद्घोषक अजय गगरानी ने कहा कि भगवान खुश होता है तभी किसी घर में बेटी का जन्म होता है। बेटी को ईश्वर प्रदत उपहार मानना चाहिए। न्यू सीकर एकेडमी के निदेशक डॉ. प्रहलाद शर्र्मा ने कहा कि बेटियों के प्रति नजरिया बदल रहा है। हर क्षेत्र में उन्होंने विशिष्ठ पहचान कायम कर परिवारों को गर्व की अनुभूति कराई है। स्कूल की छात्रा रोलिका व्यास, यशस्वी आमेटा एव मोनिका ने काव्य रचनाओं के माध्यम से बेटियों के मन की भावनाएं जताई। श्ििाक्षका नीता भट्ट, उप प्रधानाचार्य आशीष जांगिड़, शिक्षक अशोक वर्मा व राजपाल वर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। पत्रिका के चित्तौडग़ढ़ ब्यूरो प्रभारी निलेश कांठेड़ ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। काव्यमय संचालन अजय गगरानी ने किया।
बेटियों को बढ़ावा देने में पत्रिका की भूमिका को सराहा
प्रतिभागियों ने बिटिया एट वर्क जैसे अभियानों को अनुकरणीय एवं बेटियों का समाज मेंं मान बढ़ाने की पहल बताया। उन्होंने कहा कि बेटियों को गर्र्व की अनुभूति कराने एवं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए निरन्तर कोई पहल पत्रिका करता आया है। बेटियों को बढ़ावा देने के लिए मीडिया के साथ समाज के हर वर्ग की सहभागिता जरूरी है।