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बेटियों ने जाना उनके पापा की भूमिका कितनी अहम

Nilesh Kumar Kathed

Publish: Sep 22, 2019 00:04 AM | Updated: Sep 22, 2019 00:04 AM

Chittorgarh

समाचार पत्र तैयार करने में उनके पिता के कार्य की भूमिका कितनी अहम है ये बेटियों ने कार्यालय में आकर जाना। इस दौरान उन्होंने किस तरह समाचार पत्र तैयार होकर पाठक तक पहुंचता ये भी जाना।


पत्रिका के चित्तौडग़ढ़ कार्यालय में आई बेटियां
चित्तौडग़ढ़. समाचार पत्र तैयार करने में उनके पिता के कार्य की भूमिका कितनी अहम है ये बेटियों ने कार्यालय में आकर जाना। इस दौरान उन्होंने किस तरह समाचार पत्र तैयार होकर पाठक तक पहुंचता ये भी जाना। राजस्थान पत्रिका के बिटिया एट वर्क अभियान के तहत शनिवार को चित्तौडग़ढ़ ब्यूरो कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों की बेटियां कार्यस्थल पर आई। उनके पिता ने ये समझाया कि कार्यालय में वे किस तरह अपने कामकाज को सम्पादित करते है। बेटियां छवि शर्मा, कनिष्का भाटी, भूमि चतुर्वेदी पहली बार पिता के कार्यालय में आकर उनके कामकाज को जान उत्साहित दिखी। उन्होंने मन की भावनाएं भी जताई कि वे अपने पिता के कामकाज के बारे में क्या सोचती है। बेटियों ने ये भी जाना कि उनके पिता जो काम करते है उसकी समाचार पत्र तैयार करने में क्या भूमिका है। ब्यूरो प्रभारी निलेश कांठेड़ ने उन्हें समाचार पत्र का निर्माण किस तरह होता है एवं उसमें किस विभाग की क्या भूमिका है इस बारे में समझाया। बेटियों को मल्टीमीडिया के बारे में भी बताया गया।
खुश होता है भगवान तब घर में जन्म लेती है बेटियां
बेटियां किसी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं है। जहां भी उन्हें अवसर मिला ये साबित कर दिया। घर की रौनक एवं माता-पिता की शान बेटियां होती है। बेटियां दो परिवारों का गौरव व खुशियों का आधार होती है। ये विचार राजस्थान पत्रिका के बिटिया एट वर्क अभियान में फेसबुक लाइव कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों ने व्यक्त किए। कुंभानगर स्थित न्यू सीकर एकेडमी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने काव्य रचनाओं एवं संवाद के माध्यम से बेटियों के प्रति मन के उद्गार व्यक्त किए। जिला प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी कल्याणी दीक्षित ने कहा कि उनके तीन बेटे है लेकिन एक बेटी नहीं होने की कसक अब भी मन में है। बेटियों के बीच रहकर हमेशा खुशी महसूस हुई। उनके पिता ने उन्हें कभी बेटे से कम होने का अहसास नहीं होने दिया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीता शर्मा ने कहा कि उन्हें उस समय अफसोस होता है जब लोग कहते है कि बेटी तो है लेकिन एक बेटा भी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जब सुनीता विलिम्यस व कल्पना चावला जैसी महिलाएं पूरी दुनिया में भारत का नाम कर रही है तब इस तरह की सोच को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि उनके एक ही बेटी है लेकिन कभी नहीं लगा कि बेटा भी जरूरी है।राधाकृष्ण हॉस्पिटल के प्रबन्ध निदेशक अधिवक्ता प्रशान्त शर्मा,व्याख्याता डॉ. कनक जैन, न्यू सीकर एकेडमी के निदेशक डॉ. प्रहलाद शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। स्कूल की छात्रा रोलिका व्यास, यशस्वी आमेटा एव मोनिका ने काव्य रचनाओं के माध्यम से बेटियों के मन की भावनाएं जताई। काव्यमय संचालन अजय गगरानी ने किया।
बेटियों को बढ़ावा देने में पत्रिका की भूमिका को सराहा
प्रतिभागियों ने बिटिया एट वर्क जैसे अभियानों को अनुकरणीय एवं बेटियों का समाज मेंं मान बढ़ाने की पहल बताया। उन्होंने कहा कि बेटियों को गर्र्व की अनुभूति कराने एवं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए निरन्तर कोई पहल पत्रिका करता आया है। बेटियों को बढ़ावा देने के लिए मीडिया के साथ समाज के हर वर्ग की सहभागिता जरूरी है।