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गाय का गौबर बदल सकता हमारे खेतों की दशा

Nilesh Kumar Kathed

Publish: Jan 26, 2020 22:17 PM | Updated: Jan 26, 2020 22:17 PM

Chittorgarh


- जीव दया सम्मेलन में गौशाला संचालकों का सम्मान
- समस्त महाजन संस्था ने की पहल


चित्तौडग़ढ़. गाय एवं गौवंश भारतीय सभ्यता व अर्थतंत्र का आधार है। गौपालन को बढ़ा व जैविक खेती की ओर लौट हम गांव व घर को खुशहाल बना सकते है। ये बात गौवंश संवर्धन के क्षेत्र में कार्यरत संस्था समस्त महाजन द्वारा चित्तौडग़ढ़ में स्टेशन रोड स्थित श्वेताम्बर जैन धर्मशाला में आयोजित गौ संरक्षण प्रशिक्षण एवं सम्मेलन में उभरकर आए। कार्यक्रम में भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं समस्त महाजन संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतिलाल शाह ने बेटी कोमल के हाथों से मारवाड़ प्रांत के सभी गौशालाओं को 11 लाख रुपए का चेक प्रदान किया ताकि गौशालाओं में पलने वाले बूढ़े निराश्रित अपाहिज बीमार पशुओं की सेवा की जा सके । शाह ने कहा कि देश में इस प्रकार की सोच रखने वाले युवा पीढ़ी के लोग ही देश में एक परिवर्तन की लहर ला सकते हैं। इस अवसर पर चित्तौडग़ढ़ के शिवकुमार शर्मा ने इस तरह के नवाचार को समाज की चिंतन धारा को बदलने का एक सशक्त माध्यम बताया। एडीजे सुनील ओझा ने समस्त महाजन के नए-नए प्रयोगों और गौ संवर्धन के दिशा में काम करने के तरीके की सराहना की। अतिरिक्त जिला कलेक्टर मुकेश कलाल गौशाला विकास के कार्यों की महत्ता बताते हुए समस्त जीवधारियों एवं पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बताया.
आयोजन के दूसरे सत्र में गो संरक्षण संवर्धन के विभिन्न विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। बंसी गिर गौशाला के संस्थापक गोपाल सुतारिया ने ऑर्गेनिक खेती की विधि बताई और खेतों में यूरिया और फास्फेट खाद डालने के प्राकृतिक तरीके बताएं। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों से खेत की उर्वरता अब करीब करीब नष्ट हो चुकी है और अब किसान अपनी लागत मूल्य निकालने में पूरी तरह से फेल है आत्महत्या का शिकार हो रहा है. ऐसी परिस्थिति में गोबर गोमूत्र के प्रयोग को बढ़ाए जाने की परम आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऑर्गेनिक विधि से पैदा की गई खाद्य सामग्री का बाजार में तेजी से मांग बढ़ रही है। संचालन रविन्द्र जैन ने किया। आयोजन में मेवाड़ क्षेत्र की विभिन्न गौशाला संचालकों ने भाग लिया।

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