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वारदातों केे खुलासों के बाद भी पुलिस की बढ़ गई चिंता

kalulal lohar

Publish: Oct 20, 2019 15:05 PM | Updated: Oct 20, 2019 15:05 PM

Chittorgarh

मौज-शौक पूरे करने के लिए पैसे की जरूरत होने पर पढ़े लिखे युवा व किशोर चोरी व लूट की राह पर जाने से नहीं हिचक रहे है। हाल ही कुछ ऐसी वारदातों का खुलासा होने के बाद पुलिस की चिंता बढ़ी है। पहले जरायमपेशा जातियों के लोग ही चोरियों व लूट में लिप्त माने जाते थे लेकिन अब आधुनिक युवाओं के भी इस कार्य में लिप्त मिलना पुलिस के लिए नई चुनौती है।

मौज-शौक पूरा करने के लिए पकड़ रहे अपराध की डगर
आरोपियों ने कबूला शौक पूरा करने के लिए की वारदातें
कालूलाल लौहार/ चित्तौडग़ढ़. मौज-शौक पूरे करने के लिए पैसे की जरूरत होने पर पढ़े लिखे युवा व किशोर चोरी व लूट की राह पर जाने से नहीं हिचक रहे है। हाल ही कुछ ऐसी वारदातों का खुलासा होने के बाद पुलिस की चिंता बढ़ी है। पहले जरायमपेशा जातियों के लोग ही चोरियों व लूट में लिप्त माने जाते थे लेकिन अब आधुनिक युवाओं के भी इस कार्य में लिप्त मिलना पुलिस के लिए नई चुनौती है। पहले जब युवाओं द्वारा आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते थे तो उसका प्रमुख कारण बेराजगारी, आपसी रंजिश सहित अन्य कारणों के चलते आरोपी के अपराध की राह चुनने का कारण सामने आता है। हाल में जिले में गठित कुछ वारदातों के खुलासों में जो कारण सामने आए है उसके चलते हर कोई हैरान है। आज की युवा पीढ़ी मौज-शौक पूर करने के लिए अपराध की राह चुनना सबसे उपयुक्त समझता और यह राह चुन लेते है। ऐसा ही नहीं यह राह चुनने वाले युवा निम्न व मध्यम परिवार से जुड़े होते बल्कि इसमें अधिकांशत: सक्षम परिवारों से भी जुड़े होते है। हाल में जिले में हुई लूट, चोरी जैसी वारदातों के खुलासों हुए तो इनके कारण सामने आए तो एक बार तो पुलिस भी हैरान हो गए है।

केस-१: शहर के व्यस्त मीरा नगर इलाके में १० अक्टूबर की आधी रात को एटीएम से रूपए निकालकर बाहर निकले युवक को हमला कर लहूलुहान करने और टेम्पो चालक से कंबल, नकदी व सोने का लोंग लूटने के आरोपी को १२ अक्टूबर को कोतवाली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। आरोपी ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि महिला मित्र पर खर्चा करने, नशा और शौक-मौज पूरी करने के लिए उसने साथियों के साथ मिलकर लूट की वारदात को अंजाम दिया।
केस-२: सदर थाना पुलिस ने शहर के प्रतापनगर क्षेत्र में एक दुकान से ऑनलाइन खरीदे गए एक लाख रुपए से अधिक कीमत के मोबाइल के चोरी होने का मामले का १७ अक्टूबर को खुलासा करते हुए दो नाबालिग को डिटेन किया था। खुलासे में चौकाने वाले यह तथ्य सामने आए थे कि शहर के निजी स्कूल में पढऩे वाले संभा्रन्त परिवारों के दो बच्चों ने ही इस घटना को अंजाम दिया। उन्होंने अपने मौज-शौक पूरे करने के लिए इस तरह की घटना को अंजाम दिया।

अभिभावक इन बातों पर दें ध्यान
- बच्चों को नहीं बनाए एकांतप्रिय, उन्हें दे पूरा समय।
- बच्चा देर रात तक घर नहीं पहुंचता है तो उसका कारण जरुरी जानने और इसको गंभीरता से लें।
- बच्चों के मित्रों के बारे में जरुर रखे जानकारी। उनके अभिभावकों से भी सम्पर्क में रहे।
-बच्चा किसी के लिए जिद करता है तो उसको संतुष्ट करते हुए इंनकार करें।
- अभिभावक बच्चों के शिक्षक, मित्रों से भी समय-समय पर बात करें।
-बच्चा देर रात कोचिंग या कहीं जाने की बात कहता है तो उसके बारे में जानकारी जुटा ले वास्तव में ऐसा है या नहीं।

युवाओं के साथ अभिभावक भी जिम्मेदार
युवा व किशोर चोरी व लूट की राह पर चलकर अपने मौज-शौक पूरे करने का प्रयास करता है तो इसमें जितना अपराध स्वयं का है उतना ही अपराध अभिभावक का भी है। हॉल में कई वारदातों में जो खुलासे हुए उसमें देखने को मिला है कि बच्चों व युवाओं ने जो वारदात को अंजाम दिया है वह देर रात को दिया है। ऐसे में गंभीर बात यह है कि बच्चा देर रात तक घर से बाहर घूमता रहा और अभिभावक अनजान बने रहे।
नाबालिग भी पीछे नहीं: अपने मौज-शौक पूरे करने के लिए ऐसा नहीं है कि युवा की अपराध की राह पकड़ रहा है बल्कि नाबालिग भी पढऩे लिखने की उम्र में अपराध की राह पर चल रहे है। हाल ही मोबाइल चोरी की घटना में शहर के ही संभ्रान्त परिवार के कुछ नाबालिग शामिल पाए गए।


आज की जो युवा पीढ़ी अपने मौज-शौक पुरे करने के लिए अपराध की राह चुन रहे है इसके लिए जिम्मेदार अभिभावक भी है। सोशल मीडिया का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। आज के युग में आध्यात्मिकता को भूल भौतिकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। परिवार वालों द्वारा बच्चों पर ध्यान कम दिया जा रहा है। मूल रुप से संस्कारों का महत्व कम होता जा रहा है। संयुक्त परिवार को कम होने से भी युवा अपराध ही राह पर चल रहे है। अभिभावकों को बच्चों को पूरा समय देना चाहिए। बच्चों के दोस्तों सहित घर से आने-जाने के बारे में जानकारी होनी चाहिए। देखने में आता है स्कूल वाले भी बच्चों पर ध्यान नहीं देते है।
डॉ. दीपक पंचोली, समाजशास्त्री, महाराणा प्रताप राजकीय पीजी कॉलेज, चित्तौडग़ढ़