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उड़नखटोले में बिठाकर भगवान राम का दर्शन कराने ले जाएंगी महिलाएं, देश का पहला रोप-वे जिसका जिम्मा महिलाओं पर

Akansha Singh

Publish: Sep 14, 2019 12:29 PM | Updated: Sep 14, 2019 12:29 PM

Chitrakoot

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चित्रकूट में देश के पहले ऐसे रोप-वे का उद्धाटन किया जिसकी बागडोर महिलाओं के हाथ में है।

चित्रकूट. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चित्रकूट में देश के पहले ऐसे रोप-वे का उद्धाटन किया जिसकी बागडोर महिलाओं के हाथ में है। इसका पूरा संचालन महिलाएं करेंगी। यह रोप वे कमदगिरी परिक्रमा मार्ग लक्ष्मण पहरी के बीच 256 मीटर का बना हुआ है। इसका किराया 50 रु, प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। इस रोप में एक बार में 18 यात्री सैर कर सकते हैं। इस तरह से एक घण्टे में कुल 400 लोग इसका लुफ्त उठा सकते हैं। आने जाने के लिए 6 ट्रॉली लगाई गई हैं। टूरिज्म ऑफिसर शकि्त सिंह का कहना है कि यहां पर प्रतिदिन लगभग 400-500 आदमी काम करने आते हैं।

ये है लक्ष्मण पहाड़ी की मान्यता

लक्ष्मण पहाड़ी के विषय में मान्यता है कि भगवान श्री राम के 14 वर्षों के वनवासकाल के दौरान चित्रकूट में बिताए गए साढ़े 11 वर्षों के समय के दौरान उनके अनुज लक्ष्मण ने इसी पहाड़ी पर रहकर अन्न जल त्यागकर अपने माता सीता की रखवाली की थी। लक्ष्मण ने इस स्थान पर तपस्या भी की थी। त्याग व तपस्या की कहानी कहती है लक्ष्मण पहाड़ी। भगवान कामतानाथ पर्वत परिक्रमा मार्ग पर स्थित इस पहाड़ी तक पहुंचने के लिए अभी तक श्रद्धालुओं को लगभग 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थी। लक्ष्मण पहाड़ी से तीर्थ क्षेत्र की अनुपम सुंदरता दिखाई पड़ती है। पहाड़ी के ऊपर प्राचीन मंदिर बना हुआ है जिसमें लक्ष्मण वीर आसन में धनुष बाण लिए बैठे हुए हैं। पहाड़ी पर एक चबूतरा भी स्थित है ऐसी मान्यता है कि इसी पर बैठकर लक्ष्मण रखवाली किया करते थे। पहाड़ी पर एक कूप भी स्थित है जिसमें साल भर पानी भरा रहता है जबकि गर्मी में आस पास के अधिकांश कूप तालाब सूख जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी मनोकामना मांगी जाती है वो अवश्य पूरी होती है।

स्वच्छता सेवा से मैं भी जुड़ा हूं-सीएम योगी

सीएम योगी ने कहा कि दो अक्टूबर 2014 को पीएम मोदी ने मिशन स्वच्छ भारत शुरू किया था। इससे व्यापक परिवर्तन आया है। स्वच्छता सेवा मिशन स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण शिकागो में 1893 में विश्व संसद में भारतीय परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई थी। उसकी 125वीं जयंती पर लीलाधर की नगरी से पीएम नरेंद्र मोदी ने शुरुआत की। आज कामदगिरि परिक्रमा के साथ स्वच्छता सेवा से मैं भी जुड़ा हूं। कामदगिरि की परिक्रमा कर रहे थे तो स्वच्छता की बात मन में आई। इसके लिए यहां पर आम जन सहभागी बने। कामदगिरि परिक्रमा पथ पर गंदगी की टीस भी दिखी। अब हर गरीब को शौचालय मिलने के साथ ही पूरे देश में प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चले। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्लास्टिक रक्तबीज है। रक्तबीज राक्षस के खून की एक-एक बून्द रक्तबीज है। प्लास्टिक ही कैंसर, पर्यावरण संरक्षण तथा वन संरक्षण में बाधा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक पर्यावरण प्रदूषण तथा कैंसर का बड़ा कारक है। प्लास्टिक मुक्त चित्रकूट, उप्र, गांव व नगर बने। धार्मिक सामाजिक व्यापारी संगठन समाज का हर व्यक्ति प्लास्टिक त्यागे। घर का सामान सब्जी थैले में लाएं। परिक्रमा मार्ग पर होर्डिंग, गुटखा पर पाबंदी लगाएं। आज ही अभियान चले। यहां होर्डिंग का प्लास्टिक बड़ी समस्या है। सीएम योगी ने कहा कि सार्वजनिक स्थल पर होर्डिंग कतई न लगाएं। इसका पालन करें और प्रशासन इसके लिए सख्त रुख अपनाए। पान गुटखा, खैनी को प्रतिबंधित कर दें, परिक्रमा पथ पर बिक्री व खाना दोनों। इससे स्वच्छता सेवा का भाव बढ़ेगा। इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रोटोकॉल में कुछ बदलाव हुआ था, इस दौरान योगी ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से मुलाकात की। सीएम योगी चित्रकूट से लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

सीएम ने प्रोटोकॉल बदल तुलसीपीठाधीश्वर से की मुलाकात

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने व्यस्ततम कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल बदल तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से उनके आश्रम जाकर मुलाकात की। करीब आधे घण्टे तक सीएम व जगद्गुरु के बीच बन्द कमरे में गहन मन्त्रणा हुई। हालांकि मुलाकात के दौरान मीडिया को दूर रखा गया। सूत्रों के मुताबिक सीएम ने तुलसीपीठाधीश्वर से आशीर्वाद लिया और कई विषयों पर चर्चा की। इससे पहले मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने आश्रम में स्थित कांच मंदिर में श्री राम जानकी की आरती भी की। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य चित्रकूट स्थित तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर व रामकथा वाचक हैं। संस्कृत व हिंदी व्याकरण के देश दुनिया के प्रसिद्द विद्वानों में उनकी गिनती होती है। चित्रकूट में उन्होंने विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना की। पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान के नौ रत्नों में शामिल हैं। कई धार्मिक ग्रन्थ पुराण स्वामी रामभद्राचार्य को कण्ठस्थ हैं।