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जहां लंका दहन के बाद आज भी विराजमान हैं हनुमान वहां अब रोप वे से दर्शन को पहुचेंगे श्रद्धालु

Akansha Singh

Publish: Jul 18, 2019 16:00 PM | Updated: Jul 18, 2019 16:00 PM

Chitrakoot

यूपी-एमपी(मध्य प्रदेश) सीमा पर ऊंचे पर्वत पर स्थित इस धार्मिक स्थान पर अब जल्द ही रोप वे की सुविधा मिलने की उम्मीद है

चित्रकूट: प्रभु श्री राम की तपोभूमि में न जाने ऐसे कितने स्थान हैं जो आज भी कई रहस्यों को अपनी आगोश में समेटे हुए हैं. जहां पहुंचकर भगवान राम की ऊर्जा का अलौकिक एहसास भक्तों को आह्लादित कर देता है. ऐसा ही एक स्थान है हनुमानधारा. यूपी-एमपी(मध्य प्रदेश) सीमा पर ऊंचे पर्वत पर स्थित इस धार्मिक स्थान पर अब जल्द ही रोप वे की सुविधा मिलने की उम्मीद है. पर्वत की चोटी पर विराजमान हनुमान जी के दर्शन के लिए अभी भक्तों को लगभग एक हजार सीढियां चढ़नी पड़ती हैं. रोप वे चालू हो जाने से लोगों को काफी सहूलियत होगी और सबसे खास बात इससे धर्मनगरी में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे पहले तीर्थ क्षेत्र स्थित लक्ष्मण पहाड़ी पर यूपी का पहला रोप वे बनकर तैयार हो चुका है और शुरू भी. अब हनुमानधारा के रोप वे का लोगों को बेसब्री से इंतजार है.

 

दिखेगा अलौकिक सौंदर्य


उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित हनुमान धारा पर जल्द ही रोप वे की शुरुआत हो जाएगी. यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो इसी साल अक्टूबर-नवम्बर माह में रोप वे चालू हो जाएगा. ऊंचे पर्वत पर स्थित हनुमान जी की गुफा(हनुमान धारा) तक पहुंचने के लिए अभी भक्तों को कठिन चढ़ाई चढ़नी पड़ती है सीढ़ियों के माध्यम से. लगभग एक हजार सीढियां चढ़ते समय कई श्रद्धालुओं खासकर बुजुर्गों व बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. रोप वे चालू होने से काफी हद तक आस्थावानों की मुश्किलें कम हो जाएंगी. यही नहीं रोप वे से यात्रा के दौरान प्रकृति के अनुपम अलौकिक सौंदर्य का आनंद भी श्रद्धालु ले सकेंगे.

 

लक्ष्मण पहाड़ी के बाद दूसरा रोप वे

 

तीर्थ क्षेत्र स्थित लक्ष्मण पहाड़ी के बाद यह दूसरा रोप वे होगा. लक्ष्मण पहाड़ी जहां चित्रकूट यूपी में स्थित है वहीं हनुमान धारा दो प्रदेशों यूपी व एमपी के बीच पड़ता है और मध्य प्रदेश के चित्रकूट के तहत आता है. लगभग 317 मीटर ऊंचे रोप वे का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. रोप वे का निर्माण करने वाली कम्पनी दामोदर रोप वे इंफ्रा लिमिटेड से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार्य अंतिम चरण में है. 317 मीटर ऊंचे रोप वे के 10 पिलर तैयार हो चुके हैं कुल 13 पिलर बनाए जाने हैं. प्लेटफार्म का निर्माण कार्य भी जारी है. उम्मीद है कि अक्टूबर-नवम्बर माह में इसे चालू कर दिया जाएगा.

 

 

लंका दहन के बाद यहां आज भी विराजमान हैं हनुमान

 

यूं ही नहीं एक हजार सीढियां चढ़कर भक्त हनुमान धारा पहुंचते हैं. इस स्थान का उल्लेख कई पौराणिक ग्रंथों धार्मिक पुस्तकों में भी मिलता है. मान्यता के अनुसार लंका दहन व विजय के बाद हनुमान जी अपने शरीर में उतपन्न हुई गर्मी के कारण विचलित थे. उन्होंने प्रभु श्री राम से इसे शांत करने का उपाय पूछा. तब श्री राम ने उन्हें चित्रकूट के इसी स्थान पर निवास करने की आज्ञा दी. पर्वत की गुफा में जहां हनुमान विराजमान हैं आज भी एक जलधारा निरंतर उनके शरीर पर गिरती रहती है और आगे जाकर ये जलधारा अदृश्य हो जाती है. तभी से इस स्थान का नाम हनुमानधारा पड़ा. हर साल दीपावली मेले में 20 से 25 लाख श्रद्धालु यहां हनुमान जी के दर्शन के लिए उमड़ते हैं.