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यहां सरकारी योजनाएं लूट लेते हैं डकैत, हर काम में तय है कमीशन

Hariom Dwivedi

Publish: Aug 08, 2019 15:22 PM | Updated: Aug 08, 2019 15:22 PM

Chitrakoot

- बुंदेलखंड के पाठा क्षेत्र की खूबसूरती मोह लेती है लोगों का मन
- कुख्यात डाकुओं की यह शरणस्थली रहा है बुंदेलखंड के पाठा क्षेत्र

विवेक मिश्र
पत्रिका एक्सक्लूसिव
चित्रकूट. प्रकृति ने बुंदेलखंड के पाठा क्षेत्र को अनुपम सौंदर्य बख्शा है। जंगल हैं। पहाड़ हैं। बीहड़ हैं। ...तो यहां खूंखार डकैत भी हैं। ऐसी खोह हैं जिनमें एक बार घुसने के बाद कई-कई दिन गुम हो जाने का अहसास होता है। लेकिन, आजादी के बाद से अब तक हुक्मरानों और नौकरशाहों ने यहां के लिए कुछ नहीं किया।

डकैतों की दहशत से कांपता पाठा
चित्रकूट का मानिकपुर और मारकुंडी थाना क्षेत्र पाठा के नाम से जाना जाता है। कुख्यात डाकुओं की यह शरणस्थली रहा है। ददुआ, ठोकिया, बलखडिय़ा, रागिया जैसे दस्यु सरगना यही हुए। घने जंगलों और बीहड़ों के बीच स्थित पाठा में डाकुओं के सुरक्षित रहने के कई ठिकाने हैं। बीहड़ में सक्रिय 6 लाख का डकैत बबुली कोल भी है। इसके गैंग से अब तक कई बार खाकी की मुठभेड़ हो चुकी है लेकिन, बबुली अब तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है।

सरकारी योजनाएं लूट लेते हैं डकैत
पाठा में कोई भी सरकारी कार्य व योजना बगैर डाकुओं के हस्तक्षेप के जमीन पर उतर नहीं पाती। दस्यु ददुआ की तो ऐसी दहशत थी कि पूरा सिस्टम उसकी इजाज़त के बगैर क्षेत्र में इंट्री नहीं कर सकता था। हर काम का कमीशन तय था। सडक़ निर्माण हो या कोई अन्य विकास कार्य डाकुओं की मंजूरी के बाद ही ठेकेदार व सिस्टम इलाके में काम शुरू कर पाता था। बुंदेलखंड का हरा सोना कहे जाने वाले तेंदुपत्ता तोड़ान में डकैतों को लाखों करोड़ों रूपए कमीशन डकैत ही ले जाते हैं। कमोबेश यही स्थिति आज की भी है।

सफेदपोशों ने भी उठाया फायदा
पाठा में सफेदपोशों ने दादु, दबंगों और डाकुओं का फायदा उठाया है। कई तो इनके सहयोग से माननीय बन गए। आज भी दस्यु सरगना ही बुंदेलखंड की राजनीति तय करते हैं। हजारों कोल आदिवासी अब भी वोटबैंक ही हैं।

सिस्टम भी कम कसूरवार नहीं
आज भी इलाके के कई सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन हेतु सडक़ रपटे व छोटे पुल तक नहीं हैं। बारिश में इलाकाई नदी नाले उफान पर आते हैं तो कई गांवों का मुख्य मार्गों से सम्पर्क कट जाता है। बारिश में भी पेयजल संकट है। लेकिन जिम्मेदार कहते हैं पाठा के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है।

तस्वीर बदलने का प्रयास
बावजूद इसके पाठा अब खुद अपनी तस्वीर बदलने के प्रयास में है। डकैतों से जूझने वाली पुलिस दस्यु प्रभावित इलाकों में पाठा की पाठशाला कार्यक्रम चला कर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रही है ताकि भविष्य में फिर कोई डकैत न बने। एसपी मनोज कुमार झा का कहना है की शिक्षा के माध्यम से ही जागरूकता सम्भव है बांकी डकैतों के खात्मे का प्रयास लगातार जारी है।