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सोशल मीडिया का शौकीन था बबुली गैंग, इसलिए मार दी सरगना को गोली

Akansha Singh

Publish: Sep 24, 2019 14:04 PM | Updated: Sep 24, 2019 14:04 PM

Chitrakoot

बीहड़ों में भी डकैत बाहरी दुनिया से लगातार संपर्क में रहते थे।

चित्रकूट. कुख्यात डकैत बबुली कोल के खात्में के बाद गैंग से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं जिनसे यह साफ़ हो जाता है कि मौत के बीहड़ों में भी डकैत बाहरी दुनिया से लगातार संपर्क में रहते थे। मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से डकैतों को बियावान जंगल के बाहर क्या हो रहा है इसकी पूरी खबर रहती थी। वहीं गैंग के सदस्य टिक टॉक जैसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी एक्टिव रहते थे।


इसलिए मार दिया बबुली को
खूंखार डकैत साढ़े 6 लाख के इनामी बबुली कोल को पुलिस मुठभेड़ या गैंगवार में मारा गया ये तो अब खासा जांच का विषय बन गया है लेकिन अगर उसके खास सिपहसलार डकैतों की मानें तो गैंग के सरगना को उन्होंने ने ही मौत के घाट उतारा है। सोहन कोल व संजय कोल की यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तारी व इन डकैतों के मीडिया के सामने कुबुलनामे के बाद एक बात स्पष्ट हो गई है कि गैंग में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा था। बबुली व उसके दाहिने हांथ लवलेश कोल को मौत की नींद सुलाने का दावा करने वाले गैंग के विश्वासपात्र सदस्य संजय कोल ने बताया कि उसने सोहन कोल लाले कोल के साथ मिलकर बबुली को मारा क्योंकि वो उन्हें प्रताड़ित करता था घर नहीं जाने देता था। बबुली की थर्टी स्प्रिंग फील्ड रायफल से उसे गोली मारी गई।

 

तो चूक गई यूपी एसटीएफ व पुलिस
इसे यूपी एसटीएफ व पुलिस की बदकिस्मती कहें या मुखबिरों से गड़बड़ हुआ कम्युनिकेशन कि आज दस्यु सरगना बबुली की मौत के बाद खुल रहे राज ने कई सवाल उठा दिए हैं एमपी पुलिस के गैंग से मुठभेड़ के दावे पर। सूत्रों के मुताबिक बबुली को ठिकाने लगाने का ब्लू प्रिंट तैयार कर पिछले कुछ वर्षों से यूपी एसटीएफ सक्रीय थी। अपनी रणनीति के मुताबिक गैंग के हार्डकोर मेंबर को तोड़ने में एसटीएफ कामयाब हो गई और मौका मिलते ही बबुली को ठिकाने लगा दिया गया। लेकिन इस दौरान मुखबिरों से एसटीएफ का कम्युनिकेशन बिगड़ गया और मुखबिर भी लालच में पड़ गए और उधर एमपी पुलिस ने इस पूरे मामले को अपनी सीमा में होने के कारण भुना लिया। सूत्रों के मुताबिक गैंग का संजय कोल कई महीनों से यूपी एसटीएफ के सम्पर्क में था।