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बुक बैंक से लगातार जुड़ रहे लोग, पढ़ें पूरी खबर

Rajendra Sharma

Publish: Dec 11, 2019 18:00 PM | Updated: Dec 11, 2019 18:00 PM

Chhindwara

पढ़ो-पढ़ाओ का दिया संदेश

छिंदवाड़ा/ सर्व जागृृति गण (सजग) परिषद के अन्तर्गत बुक बैंक शुरू किया है। इससे लगातार लोग जुड़ रहे हैं।
संस्था के कृपाशंकर यादव के निर्देशन व मार्गदर्शन में अपना बुक बैंक संचालित किया जा रहा है। यादव ने बताया कि अपना बुक बैंक का संचालन को सजग कार्यालय इएलसी हास्टल कक्ष -13 में किया जा रहा है। अपना बुक बैंक का मुख्य कार्य परमार्थ सेवा में पढ़ो-पढ़ाओ के रूप में सुपात्र को विद्या दान करना है। इस अपना बुक बैंक में आमजन से आग्रह है कि आप जो किताबें, ग्रथ , साहित्य, कापियां, स्कूल बैग, पेन, रबर, पैंसिल, पैंसिल कटर, रंग एवं ब्रस, बच्चों के खिलौने, कुर्सी, टेबल, टिफिन बॉक्स, कम्पास बाक्स आदि जो कि आमजन रद्दी समझते हुए रद्दी में बेच देते हैं या फेंक देते है या कूड़ा दान में डाल देते हैं। आमजन से निवेदन है कि ऐसी स्टेशनरी को नहीं फैके/बेचें। ऐसी सामग्री हमें दे। इस सामग्री को हम जरूरत मंदों तक पहुंचाएंगे।
यदी आप सहभागिता निभाना चाहते हैं तो बुक बैंक में सामग्री जमा करा सकते हैं। आपके सहयोग से दूसरे का विद्या दान के माध्यम से भविष्य बन सकता है। आपका प्रयास किसी को फर्स से अर्स तक पहुंचा सकता है। इससे बढकऱ भी कोई सहयोग करना चाहता है तो नई किताबों, स्टेशनरी का दान कर सकता है। इसी क्रम में रविवार को प्रति दिन की क्रम में प्रात: 06 से 07 बजे तक सजग स्वसाधना की गई तत्पष्चात उसी कार्यक्रम के विषय में प्रात: 08 से 09 बजे सजग प्रबुद्धजन प्रकोष्ठ, सजग वरिष्ठगण प्रकोष्ठ एवं अन्य गाताविद्् द्वारा गीता जयंती का महत्व, गीता सार, इतिहास एवं स्वाध्याय का महत्व की मर्मविवेचना हुई। इस गीता जयंती के अवसर पर यादव के कहा की जिस बिंदु पर स्वार्थ समाप्त होता है वहीं से परमार्थ प्रारम्भ होता है। आपने नि:शुल्क विद्या दान हेतु, अपना बुक बैंक का संचालन की प्रक्रिया से अवगत कराया। गीता जयंती पर ग्रामों में जाकर जरूरतमंद लोगों को आज गीता ग्रंथ को वितरित किए। अपना बुक बैंक इसके पहले सजग बुक बैंक एवं सजग पुस्तकालय के रूप में संचालित है। इनके अलग-अलग कार्यप्रणाली है।
इस अपना बुक बैंक को व्यवस्ति रूप में संचालित करने में सजग स्व साधना मंडल के इंजी. रोशनलाल माहोरे, इंजी. वासुदेव साधवानी, इंजी. केपी चौरिया, डॉ. केएल पाल, वृृक्ष मित्र रविन्द्र कुशवाह, विजय सिंह कुसरे, शोभाराम बैठवार, मुरलीधर ओकटे, देवेन्द्र प्रताप मालवी, राधे, उमेश कुमार वर्मा, गुलाब चंद सोनी, मानसिंह कुशवाह, सुजीत सिंह, केपी चौरिया आदि का सराहनीय सहयोग है।

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