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Organic farming: बदलेगा खेती का स्वरूप, किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी मिलेगा फायदा

Prabha Shankar Giri

Publish: Jan 22, 2020 18:24 PM | Updated: Jan 22, 2020 18:24 PM

Chhindwara

Organic farming: nature of farming will change, farmers as well as common people will get benefit

छिंदवाड़ा/ रासायनिक खादों के उपयोग से खाद्य उत्पादों की स्वाद गुणवत्ता तो मार खा रही रही है जमीन को भी नुकसान हो रहा है। यही कारण है कि अब खेती की जमीन को जैविक रूप में और विस्तार देने की कोशिश इन दिनों की जा रही है। जिले में पिछले कुछ वर्षों से किसानों का रुझान इस खेती की ओर बढ़ा है। रोजमर्रा के लिए उपयोग में लाई जाने वाली सब्जियों में जैविक उत्पादों की डिमांड बढ़ रही है। इस समय पूरे जिले में लगभग छह से सात हजार हैक्टेयर क्षेत्र में ही सब्जियां इस रूप में ली जा रहीं हैं, हालांकि पूर्ण जैविक रूप से उत्पादन के लिए इसका सर्टिफिकेशन किसानों को अलग से लेना पड़ता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मानें तो किसान इस ओर रुचि ले रहे हैं। जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर पर भी प्रयास शुरू हो गए हैं। अन्य अनाज का जैविक रकबा ज्यादा नहीं है हालांकि विकासखंडवार इसमें विस्तार देने की कोशिश विभाग कर रहा है। आत्मा प्रोजेक्ट के तहत यह प्रयास किए जा रहे हैं।
जबलपुर स्थित क्षेत्रीय जैविक कृषि केंद्र इन दिनों एक महीने का सर्टिफिकेट कोर्स भी किसानों के लिए आयोजित कर रहा है। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय से सम्बद्ध इस केंद्र में ग्रेज्युएट पास किसानों को एक महीने का रहवासी प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों को इसमें जैविक उत्पाद लेने, खेतों को जैविक उत्पादनों के लायक तैयार करने, उसमें डालने वाली दवाओं और उसके बाजार के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। गौरतलब है सरकार और विभाग कई स्तर पर खेती में नवाचार कर रही है। किसानों को पारम्परिक खेती से हटकर खेती करने के लिए कहा जा रहा है। जिले में कई युवा किसान हैं जो संतरे के साथ मसाले और टमाटर के साथ जैविक सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। इनकी संख्या बढ़ाना है।

निजी कम्पनियों के साथ भी करार
प्रदेश सहित जिले में खेती की सूरत बदलने के लिए सरकार अब निजी कम्पनियों से करार कर रही है। जिले में ऐसे किसानों को चुना जा रहा है जो जैविक खेती करने के इच्छुक हैं। उनके खेतों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। किसानों का पूरा डाटा निकालकार उन्हें नए तरीके से खेती कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जैविक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी निजी संस्थाएं किसानों को बता रहीं हैं, ताकि उन्हें इस उपज का सही दाम मिल सके।


बदलाव की बेहद जरूरत है और किसानों को चाहिए वे इस मौके का फायदा उठाएं। किसान को अपनी सोच बदलनी होगी। प्रशिक्षण में किसान जाएंगे तो उन्हें नई जानकारियां मिलेंगी और वे खेती किसानी को और उन्नत तरीके से कर सकेंगे।
डॉ. वीके पराडकर, सहायक संचालक, कृषि अनुसंधान केंद्र चंदनगांव

समय की मांग के अनुसार खेती को जैविक रूप देना जरूरी है। किसानों को इस सम्बंध में और गम्भीर होना पड़ेगा। किसानों को रासायनिक खाद का मोह छोडऩा होगा। जैविक खेती से बहुत फायदे हैं। किसानों को समझाने की कोशिश की जा रही है।
जेआर हेडाऊ, उपसंचालक, कृषि विभाग, छिंदवाड़ा

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