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जब पैदा हुआ था तो मां रोई थी

Chandra Shekhar Sakarwar

Publish: Aug 20, 2019 11:11 AM | Updated: Aug 20, 2019 11:11 AM

Chhindwara

दिव्यांग क्रिकेट वल्र्ड कप जीतकर गांव पहुंचे दिव्यांग खिलाड़ी गुरुदास का ग्रामीणों ने किया स्वागत

आज कमजोरी को ही ताकत बनाकर वल्र्ड कप जीता तो गर्व करती है: गुरुदास
छिंदवाड़ा/ पांढुर्ना. जब में पैदा हुआ था तो मेरी मां मुझे बिना एक हाथ के देखकर रोने लगी थी। मां को रोते देख पिता के आंसू निकल गए थे, लेकिन भगवान का ऐसा आशीर्वाद रहा कि अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बना लिया। शंकराचार्य स्वामी नित्यानंद सरस्वती ने कहा था कि गुरुदास के एक हाथ में दोनों हाथों के बराबर ताकत है और ये बात सच साबित हुई।
विदेशों में अपने एक हाथ से बल्लेेबाजी और गेंदबाजी के साथ ऑलराउंडर का डंका बजा चुके और हाल ही में इंग्लैंड में संपन्न हुई अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेट वल्र्ड कप सीरीज जीतकर अपने गांव लौटे क्रिकेट खिलाड़ी गुरुदास ने अपने अनुभव सांझा किए।
ग्राम पंचायत भवन में गुरुदास का ग्रामीणों ने स्वागत किया। अपने स्वागत से अभिभूत गुरुदास ने बताया कि जब वे किसी गांव में क्रिकेट खेलने के लिए जाते थे तो उन्हें दूसरी टीम के खिलाड़ी हंसते थे, लेकिन उनके साथी खिलाडिय़ों ने कभी हार नहीं मानने दी और इसी हौसले का परिणाम है कि वे भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के कप्तान के तौर पर लगातार सीरीज जीतते चले आ रहे हैं। इस मौके पर उपस्थित गुरुदास के पिता रामदास राउत ने बताया कि गरीबी में दिन गुजारे, लेकिन गुरुदास ने कभी कोई जिद नहीं की। उसका यह धैर्य आज सफलता की कहानी बयां कर रहा है। कांग्रेस नेता डॉ. साहेबराव टोन्पे, जनपद पंचायत की सीइओ विजयलक्ष्मी मरावी, कैलाश जैसवाल, पूर्व प्राचार्य एसबी चोपड़े, तुकाराम वानोड़े, क्षीरसागर गुरुजी, विलास महाले, केशवराव हुरडे, मोहन राउत, मधुकर धांदल आदि गांव वालों ने गुरुदास के खिताब को गांव के लिए गौरान्वित करने वाला बताया। साथ ही कहा कि इस तरह की प्रतिभाएं बिरले ही होती हैं जो छोटे से गांव से निकलकर देश का नाम विदेशों में चमकाती हैं। सभी ने गुरुदास को उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।