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स्कूलों परिसर को तंबाकू मुक्त बनाने की रणनीति, जनप्रतिनिधियों से लेकर पालक तक करेंगे मॉनिटरिंग

Rajendra Sharma

Publish: Oct 23, 2019 08:03 AM | Updated: Oct 23, 2019 00:20 AM

Chhindwara

जिले के शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने के संबंध में बैठक आयोजित

छिंदवाड़ा/ स्कूलों के परिसर को तंबाकू मुक्त बनाने की रणनीति बनाई गई है। इसके लिए एक समिति गठित होगी, जिसमें जनप्रतिनिधियों से लेकर पालक तक शामिल होंगे। बकायदा मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
दरअसल, केंद्र सरकार के दिशा निर्देश अनुसार 30 नवंबर 2019 तक जिले के सभी शासकीय, अशासकीय एवं अध्र्दशासकीय स्कूलों को तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान बनाया जाना है।
तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान के अंतर्गत शासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के संबंध में कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेंद्र सिंह नागेश, अपर कलेक्टर राजेश शाही, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नोडल अधिकारी एनटीसीपी डॉ.राहुल श्रीवास्तव सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

30 नवंबर तक का समय

बैठक में कलेक्टर ने कहा कि भारत सरकार ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) अधिनियम ( कोटपा) 2003 बनाया है। इस कानून की धारा 6 के अंतर्गत नाबालिगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। कम उम्र से ही बच्चे तंबाकू एवं तंबाकू उत्पादों की लत का शिकार ना हो इसके लिए उन्हें अभी से तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान उपलब्ध कराना है। शासन के निर्देशानुसार यह कार्य 30 नवंबर तक किया जाना है। संबंधित सभी विभाग पूर्ण आपसी समन्वय और सहयोग द्वारा इस कार्य को समय सीमा के अंदर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। राजस्व अनुविभागीय अधिकारी भी इस कार्य में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

यह है प्लानिंग

बैठक में नोडल अधिकारी एनटीसीपी डॉ.श्रीवास्तव ने तंबाकू मुक्त शैक्षिक संस्थान के लिए शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले प्रत्येक शैक्षिक संस्थान के एक अधिकारी अथवा शिक्षक को तंबाकू नियंत्रण के लिए नोडल शिक्षक नामांकित किया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक शिक्षण संस्थान में प्रधानाचार्य अथवा प्रभारी संस्था प्रमुख की अध्यक्षता में तंबाकू नियंत्रण समिति का गठन होगा। इस समिति द्वारा तंबाकू नियंत्रण के अंतर्गत गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। क्षेत्र के विधायक अथवा सरपंच, क्षेत्र के दो पंचायती राज्य के सदस्य अथवा पार्षद, विज्ञान शिक्षक या अन्य शिक्षक, एनएसएस अथवा एनसीसी अथवा स्काउट गाइड के कम से कम दो विद्यार्थी और दो अभिभावक प्रतिनिधि इस समिति के सदस्य होंगे। समिति की तिमाही बैठक आयोजित कर जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से सूचित करना होगा। इसी तरह प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान को छात्रों के बीच से तंबाकू नियंत्रण मॉनिटर को नामांकित करना होगा, जिनकी संख्या एक से अधिक हो सकती है।

सूचना बोर्ड अनिवार्य

उन्होंने बताया कि कोटपा 2003 अधिनियम की धारा 6 के अनुसार शैक्षणिक संस्थान परिसर के 100 गज के दायरे में तंबाकू पदार्थों की बिक्री नहीं होनी चाहिए एवं इस संबंध में प्रवेश द्वार और विद्यालय के मुख्य स्थानों पर आवश्यक बोर्ड प्रदर्शित होने चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि परिसर के अंदर और परिसर से 100 गज के अंदर किसी भी तंबाकू उत्पाद की बिक्री ना हो। अधिनियम के प्रावधानों का पालन ना करने पर 200 रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। पीली लाइन अभियान के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत परिसर के बाउंड्री वॉल से 100 गज की दूरी पर तंबाकू मुक्त क्षेत्र का संकेत देने वाली एक पीली लाइन ऑयल पेंट से खींची जाना है । यह लाइन 4 इंच चौड़ी और सडक़ के एक छोर से दूसरे छोर तक होनी चाहिए। तंबाकू मुक्त क्षेत्र को भी पीले रंग में निर्धारित फोंट आकार में लिखा जाना चाहिए।

जागरुकता कार्यक्रम होंगे

तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान के अन्तर्गत विद्यार्थियों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में जानकारी पोस्टर के माध्यम से विद्यालय के मुख्य स्थानों पर प्रदर्शित करनी होगी, विद्यार्थियों को स्वयं तंबाकू नियंत्रण विषय पर पोस्टर बनाने और तंबाकू विरोधी नारों को विद्यालय में सामग्री में लिखने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। तंबाकू के खिलाफ प्रतिज्ञा लेने के लिए पोस्टर, स्लोगन, निबंध, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और नुक्कड़ नाटक आदि का आयोजन किया जाएगा। तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान बनाए जाने के संबंध में विद्यालय के लिए स्व-मूल्यांकन प्रपत्र तैयार किया गया है जिसके आधार पर प्रत्येक विद्यालय अपना स्कोर जान सकता है।