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Forestland: निरस्त दावों की फिर से खुलेगी फाइल

manohar soni

Publish: Jan 22, 2020 12:20 PM | Updated: Jan 22, 2020 12:20 PM

Chhindwara

वन मित्र एप में दर्ज केस को ग्राम वन समितियों को पहुंचाया, निरस्त दावे सहीं हुए मिलेंगे पट्टे

 

छिंदवाड़ा/जंगल की जमीन पर कब्जे के ढाई हजार से ज्यादा निरस्त दावों की फिर से फाइल खुलेगी। आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा वन मित्र एप में दर्ज केस को ग्राम वन समितियों को भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच पड़ताल में ये दावे सहीं पाए जाते हैं तो वनवासियों को 4 हैक्टेयर वन भूमि का पट्टा मिल सकता है।
विभागीय जानकारी के अनुसार वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद अब तक सघन जांच पड़ताल के बाद व्यक्तिगत स्तर पर 7898 तथा 1524 सामुदायिक दावों को स्वीकार कर चार हैक्टेयर भूमि के पट्टे दिए जा चुके हैं। व्यक्तिगत 3575 वन भूमि के दावों को ग्राम वन समितियों से लेकर जिला स्तरीय समिति निरस्त कर चुकी है। इन निरस्त दावों की फिर से छानबीन कराने का निर्णय कमलनाथ सरकार द्वारा लिया गया है। इनमें से 2518 निरस्त दावों को वनमित्र एप में दर्ज किया गया है और इसके दस्तावेज पुन: जांच के लिए ग्राम वन समितियों में भेजे गए हैं। इन दावों की जांच पड़ताल 26 जनवरी को होनेवाली ग्राम सभाओं में होगी। उसके ब्लॉक और जिला स्तरीय समिति के पास रिपोर्ट आएगी। उसके बाद इन दावों पर निर्णय लिया जाएगा।
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वनवासियों के अलावा दूसरे भी दावेदार
वनाधिकार कानून के वर्ष 2006 से हो रहे क्रियान्वयन को देखा जाए तो पूरे जिले में आदिवासियों द्वारा 10592 तथा अन्य परम्परागत निवासियों द्वारा 1124 की संख्या में वन भूमि पर कब्जे का दावा किया गया था। इसके अलावा सामूहिक रूप से खेती करने के 2305 दावे आए थे। इन सभी की संख्या 14021 थी। लगातार जांच पड़ताल तथा दस्तावेजों के आधार पर 9422 लोगों को 11879 हैक्टेयर वनभूमि दी गई थी। वंचित दावेदार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान हो रहे थे। इसे देखते हुए सरकार ने उनके दावों का पुन: परीक्षण करने का निर्णय लिया है। इनमें से कितने दावे स्वीकार होंगे,यह दो-तीन माह में पता लग जाएगा।
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इनका कहना है..
आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा ढाई हजार से ज्यादा निरस्त वनभूमि दावों को ग्राम वन समितियों को भेजा गया है। इन दावों का परीक्षण कर रिपोर्ट आएगी,तब उन्हें पट्टा दिए जाने का निर्णय लिया जाएगा।
-एनएस बरकड़े,सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग।
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