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बस शेल्टर बना दिए, रखरखाव होता नहीं!

Dhannalal Sharma

Publish: Oct 22, 2019 15:45 PM | Updated: Oct 22, 2019 15:45 PM

Chennai

इन बस शेल्टरों के लगाने का उद्देश्य राहगीरों और यात्रियों (Passengers) को धूप और बारिश से बचाना है लेकिन विडम्बना है कि महानगर में अनेक बस शेल्टर (bus shelters) ऐसे हैं जो जर्जरित हालत में पहुंच गए हैं और आमजन को बारिश (rain) और धूप से बचा पाने में समर्थ नहीं हैं।

चेन्नई. ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने यात्रियों की सुविधा के लिए महानगर में २ हजार से अधिक बस स्टाप्स पर स्टीलयुक्त बस शेल्टर लगाए हैं। इन बस शेल्टरों के लगाने का उद्देश्य राहगीरों और यात्रियों को धूप और बारिश से बचाना है लेकिन विडम्बना है कि महानगर में अनेक बस शेल्टर ऐसे हैं जो जर्जरित हालत में पहुंच गए हैं और आमजन को बारिश और धूप से बचा पाने में समर्थ नहीं हैं। यात्रियों का आरोप है कि महानगर में बस स्टॉप पर लगाए गए अधिकांश शेल्टर जो स्टील और फाइबर से बने हुए हुए हैं, लोगों को न छाया दे पाते हैं और न ही इस बारिश से बचा पाते हैं। ऐसे शेल्टर न होने के समान है।


बारिश में भीगने से कैसे बचेंगे यात्री
महानगर में मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है और हर दिन बारिश हो रही है। ऐसे में न केवल यात्री, आमजन भी बारिश से बचने के लिए बस शेल्टरों के नीचे जाकर पनाह लेते हैं लेकिन जब उनके नीचे भी वे भीगने से नहीं बच पाते तो वहां खड़े रहना ही बेकार हो जाता है। वहां भी उनको छाता लेकर खड़े रहना पड़ता है। यात्रियों के पास मजबूरी में वहां खड़े रहने के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं होता।


शेल्टर केवल एक संकेतक
बारिश के दौरान पाडी बस शेल्टर के नीचे खड़ी होकर बच्चों के साथ बस का इंतजार कर रही दिवयानी का कहना था कि बारिश भी तेज है और हवा के तेज झोंके हैं जिसके चलते यहां खड़े रहना मुश्किल हो रहा है उस पर एक अन्य परेशानी शेल्टर की छत के टपकने की है। इसी प्रकार ईगा थियेटर बस शेल्टर में बस का इंतजार कर रहे इलंगोवन का कहना था कि यह शेल्टर सिर्फ एक संकेतक है जिससे यही पता चलता है कि यहां बसें रुकती हैं जबकि इस शेल्टर के नीचे न तो यात्रियों का बारिश से बचाव होता है और न ही सूर्य की किरणों का प्रवेश रुकता है।


कभी देखभाल नहीं होती
यात्रियों का कहना है कि बस शेल्टर लगाने के बाद शेल्टरों की कभी देखभाल नहीं की जाती। यदि समय-समय पर देखभाल हो तो इनकी मरम्मत हो जाए। ऐसा लगता है यह सरकार ने केवल पैसा बनाने का माध्यम बना लिया है। मोक्षम थियेटर बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रही आर्यनंदिनी ने कहा एक तो बस शेल्टरों की बैंचें बहुत नीची लगी हुई हैं, जिन पर ठीक से बैठा ही नहीं जा सकता, दूसरे ऊपर लगी छत इतनी जर्जरित हो चुकी है कि बारिश आने पर पानी तेजी से टपकता है जिससे इनके नीचे बैठना मुश्किल होता है।