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जन्मदिन विशेष: जब रामप्रकाश गुप्ता ने जेल में राजनाथ सिंह के लिए की थी ये भविष्यवाणी, 24 साल बाद हुआ सच

Sarweshwari Mishra

Publish: Jul 10, 2019 13:41 PM | Updated: Jul 10, 2019 13:41 PM

Chandauli

13 साल की उम्र से ही आरएसएस से जुड़ गए थे, दो साल रहे यूपी के सीएम

वाराणसी. बीजेपी के सीनियर नेताओं में से एक है राजनाथ सिंह का आज 68वां जन्मदिवस है। वर्तमान में राजनाथ सिंह केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री हैं। इनका जन्म यूपी में वाराणसी के पास स्थित चंदौली जिले के भभौरा गांव में 10 जुलाई 1951 को हुआ था। 1964 में जब वह सिर्फ 13 साल के थे तभी आरएसएस से जुड़ गए थे। इन्होंने गोरखपुर विश्विद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय तक वह लेक्चरर भी रहे। राजनाथ एक कुशल प्रशासक के रूप में जाने जाते रहे हैं। 1974 में वो मिर्जापुर यूनिट के भारतीय जनसंघ के सेक्रेटरी बने। 1976 में राजनाथ सिंह जेल में भी रहे। उस समय इनके साथ यूपी के पूर्व सीएम रामप्रकाश गुप्ता भी जेल में बंद थे और वहीं उन्होंने राजनाथ सिंह का हाथ देखते हुए भविष्यवाणी किया था कि तुम एक दिन बहुत बड़े नेता बनोगे। राजनाथ ने कहा कितना बड़ा तब गुप्ता जी बोले सीएम जितना बड़ा। उनकी इस बात को सुनकर राजनाथ हंसने लगे। उस समय राजनाथ की उम्र महज 25 साल थी। लेकिन 24 साल बाद रामप्रकाश गुप्ता की भविष्यवाणी सच हुई और राजनाथ सिंह सीएम बन गए।

दो साल रहे यूपी के सीएम
राजनाथ सिंह 2000 से लेकर 2002 तक यूपी के सीएम पद पर रहे। अटल-आडवाणी के समय में राजनीथ सिंह बीजेपी के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक थे। राजनाथ सिंह 2005, 2009 और 2013-2014 के बीच दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। 2014 की मोदी सरकार में उन्होंने गृहमंत्री का पद सम्भाला। इस बार उन्हें रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।

राजनाथ सिंह को रिटायरमेंट के बाद चपरासी से भी कम मिली पेंशन
एक दौर था जब राजनाथ सिंह को चपरासी से भी कम पेंशन मिला करता था। राजनाथ सिंह ने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद मिर्जापुर डिग्री कॉलेज में लेक्चरर की नौकरी की थी। सन् 2000 में वह वहां से रिटायरमेंट ले लिए। रिटायरमेंट के बाद राजनाथ सिंह को बहुत कम पेंशन मिला करता था। उनका वेतन कितना था ये कम ही लोग जानते हैं। उस समय राजनाथ सिंह को चपरासी से भी कम पेंशन मिलती थी। दिलचस्प तो यह है कि जब उनके पेंशन की रकम 9500 बनी थी। लेकिन राजनाथ सिंह ने उसे लेने से इनकार कर दिया था। जब कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन ने इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि 1992 के बाद से उन्होंने छात्रों को नहीं पढ़ाया है। इसलिए जब तक उन्होंने छात्रों को पढ़ाया है उसी साल के हिसाब से उन्हें पेंशन की रकम मिलनी चाहिए। इसके बाद पेंशन की जो रकम कॉलेज ने तय की वो चपरासी से भी कम थी। उस समय उनको 1350 रुपये पेंशन मिलना शुरू हुआ।