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पराली नहीं, जाड़े का मौसम व जहरीला वेस्ट बन रहा प्रदूषण का कारण

Ashish Kumar Shukla

Publish: Nov 05, 2019 21:53 PM | Updated: Nov 05, 2019 21:53 PM

Chandauli

जानकारों की मानें तो बढ़ते प्रदूषण के स्तर के लिए पराली जिम्मेदार नहीं है

वाराणसी/ प्रयागराज. यूपी के कई जिलों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह लोग भले ही पराली जलाना मान रहे हों पर जानकारों की मानें तो बढ़ते प्रदूषण के स्तर के लिए पराली जिम्मेदार नहीं है।

इस संबन्ध में पत्रिका ने पर्यावरणविदों से बात की तो कई अहम बातें सामने आईं। पत्रिका से बातचीत में बनारस में बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर व पर्यावरणविद प्रो बीडी त्रिपाठी ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण को पराली से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। क्यूंकि यूपी के इन शहरों में पराली का कोई खास प्रभाव है नहीं उन्होने कहा कि हर साल बारिश के बाद जब ठंड अचानक आती है तो यह स्थिति पैदा होती है।

दरअसल वायुमंडल में नमी होती है जिसके कारण धरती के ऊष्मीकृत डस्ट ऊपर जा कर बिखर नहीं पाते जिसके चलते धुंध बनती है। कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। इसके अलावा और कोई कारण नहीं है। वहीं प्रयागराज के रहने वाले वैज्ञानिक डॉ मोहम्मद आरिफ बताते हैं कि ये स्मॉग पटाखों से निकलने वाले सल्फर सहित हर दिन डीजल वाहनों से निकलने वाले धुंए, खेती के लिए काम किए जाने वाले डीजल से संचालित होने वाले संयंत्र उद्योगो से निकलने वाला जहरिला वेस्टेज। हर दिन ईट भट्ठे से निकलने वाला धुंआ । उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 15,000 से ज्यादा ईट भट्टे हर दिन चलते हैं। इन सबके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

प्रदूषण के चलते निचली सतह पर रुका कोहरा

डॉ मोहम्मद आरिफ ने बताया कि हर दिन लाखों लीटर डीजल फ्यूल हम इस्तेमाल कर रहे हैं । उन्होंने कहा इस इस मौसम में वातावरण ठंडा हो जाता है लेकिन धरती की गर्मी बनी रहती है और धरती पर एकत्रित जलवाष्प की तरह ऊपर जाता है। जो कोहरे के स्वरूप में होता है। लेकिन प्रदूषण की मात्रा अधिक होने कर चलते प्रदूषण उसी कोहरे के साथ मिलकर कोहरे को भारी बना देता है। जिसके चलते वह एक सीमा से ऊपर नहीं जा पा रहे हैं। कोहरा लगातार निचली सतह पर ही बना हुआ है । जो खतरनाक स्मॉग का रूप ले लिए है।
भौगोलिक स्थिति भी कारण
बनारस में वायु प्रदूषण का एक और बड़ा कारण यहां की भौगोलिक स्थिति है। एक तो यह गलियों का शहर है, सड़कें भी सकरी हैं उसी बीच जगह-जगह ऊंची-ऊंची बिल्डिंग खड़ी हो गई हैं। इसके चलते भी जमीन के गर्द-ओ-गुबार को बिखरने का मौका नहीं मिल पाता है जिसके चलते धुंध की चादर बन जाती है।

ये भी है वजह

प्रो त्रिपाठी ने बताया कि हर साल बारिश के बाद जब ठंड अचानक आती है तो यह स्थिति पैदा होती है। दरअसल वायुमंडल में नमी होती है जिसके कारण धरती के ऊष्मीकृत डस्ट ऊपर जा कर बिखर नहीं पाते जिसके चलते धुंध बनती है। कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। इसके अलावा और कोई कारण नहीं है।

बनारस में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारक

- ऊंची बिल्डिंग के बीच गलियों और रास्तों का सकरा होना
-पूरे शहर की सड़कों का गड्ढों में तब्दील होना
-बिना पर्दा लगाए हो रहे निर्माण कार्य
-अंधाधुंध पेड़ों की कटाई
-ट्रैफिक जाम की समस्या
बचाव के लिए उठायें ये कदम
1- सभी कार्यदायी संस्थाओं को सख्त हिदायत दी जाए कि जहां भी निर्माण कार्य चल रहा है वहां पर्दा डाला जाए
2- सभी निर्माण स्थलों पर दिन में तीन बार जल का छिड़काव हो
3-जहां कहीं भी सड़कें उखड़ी हैं और धूल ज्यादा है वहां भी पानी का छिड़काव किया जाए
4-जो भी वृक्ष हैं उनकी पत्तियों पर स्प्रिंगलर विधि से यानी पतली धार के साथ जल का छिड़काव हो
5-चौराहों पर ट्रैफिक जाम की स्थित न बनने दी जाए
6-जहां-तहां सड़कों पर रखे गए या बिखेरे गए बिल्डिंग मेटेरियल को हटाया जाए, खास तौर पर सुर्खी, बालू, गिट्टी आदि
7- वाहनों की नियमित जांच हो और प्रदूषित हवा छोड़ने वाले वाहनों को प्रतिबंधित किया जाए
8- ज्यादा से ज्यादा चौड़ी पत्ती वाले पौधे लगाए जाएं
9- कूड़ा-कचरा और खास तौर पर पेड़ों की पत्तियों को कतई न जलाया जाए
10-एहतियात के तौर पर लोग मॉस्क लगाएं

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