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वर्ल्ड्स बेस्ट ब्वॉयफ्रेंड : दुर्जोय दत्ता

Divya Singhal

Publish: May 04, 2015 10:06 AM | Updated: May 04, 2015 10:06 AM

Books

बुक का टाइटल ही इतना कैची है कि लव स्टोरिज पढ़ने के शौकीन का ध्यान इस ओर बरबस ही खिंच जाएगा

काफी इंतजार के बाद दुर्जोय दत्ता अपनी 11वीं बुक "वर्ल्ड्स बेस्ट ब्वॉयफ्रेंड" के साथ हाजिर है। ये कहानी एक ऎसी लड़की की है जिसे बीमारी के चलते उसके फैमिली मेंबर्स का प्यार नहीं मिलता है। ये स्टोरी दुर्जोय की अब तक की बुक्स की रेग्यूलर कहानियों से कुछ डिफरेंट है। हालांकि इसमें दुर्जोय की अरबन लैंग्वेंज का टच जरूर मिलता है।

ये कहानी जन्म से ही विटीलिगो बीमारी से ग्रस्त अरण्या की है। जिसे इंटेलीजेंट होने पर भी बीमारी के चलते उसके भाई से कम आंका जाता है और वह अपने पैरेंट्स का प्यार से वंचित रहती है। ऎसे में जब अरण्या की लाइफ में ध्रुव की एंट्री होती है तो दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं। ध्रुव की जिंदगी भी अपने पैरेंट्स के अलग होने के बाद काफी कठिन हो जाती है। एक बार दोनों पकड़े जाते हैं और उन्हें अलग कर दिया जाता है। इसके बाद बहुत सालों बाद अरण्या और ध्रुव मिलते हैं, लेकिन दोनों के बीच प्यार की जगह बेइंतहा नफरत पनपने लगती है। अब क्या ये सच में नफरत है या दोनों ने अपने प्यार को दबाकर नफरत की चादर ओढ़ रखी है।

"वर्ल्ड्स बेस्ट ब्वॉयफ्रेंड" की एक खास बात ये है कि इसे दुर्जोय ने बाकी तरह की तरह को-राइटर्स के साथ नहीं बल्कि अकेले लिखा है। बुक की स्टोरी दुर्जोय की अन्य कहानियों से थोड़ी डिफरेंट हैं, हालांकि इसमें चैप्टर्स को थोड़ा छोटा किया जा सकता था। एक सिंपल सी बात को समझाने के लिए 20 लाइनों का इस्तेमाल करना रिपीटेशन और लैंदी लगने लगता है। लेकिन बुक का टाइटल ही इतना कैची है कि अगर आप लव स्टोरिज पढ़ने के शौकीन है तो आपका ध्यान इस ओर बरबस ही खिंच जाएगा। दुर्जोय यूथ की नस को काफी अच्छे से जानते हैं और इसी हिसाब से बुक लिखते हैं। "वर्ल्ड्स बेस्ट ब्वॉयफ्रेंड" को एक बार जरूर पढ़ा जा सकता है।