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अदनान सामी ने गायकी से जीता लोगों का दिल, तो पिता नें घोंपा भारत के सीने में खंजर

Pratibha Tripathi

Publish: Jan 28, 2020 15:37 PM | Updated: Jan 28, 2020 15:39 PM

Bollywood

  • भारत सरकार ने गायक अदनान सामी(singer Adnan Sami ) को पद्म श्री से सम्मानित किया है
  • पिता अरशद सामी खान 1965 के युद्ध में भारत के खिलाफ लड़ाई में शामिल थे

नई दिल्ली। बॉलीवुड में हर सुरों के बीच एक अवाज जो हर किसी का दिल जीत लेती है जिसके गाने को सुन हर किसी के होंठ सुर से सुर मिलाने को तैयार हो जाते है यह अवाज है गायक अदनान सामी(singer Adnan Sami ) की, जिन्होनें अपनी अवाज का जादू ऐसे बिखेरा कि लोग उनके गानों के दिवाने हो गए। और इसी के चलते अभी हाल ही में उन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित किया है। लेकिन अब यह मामला तूल पकड़ रहा है कि एक तरफ अवाज के जादू, तो दूसरी ओर भारत के सीने में खंजर का घोंपना।

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दरअसल गायक अदनान सामी के पिता अरशद सामी खान (Adnan Sami) नें भारत के विरूध लड़ाई लड़ी थी। इसलिये उनके बेटे को सम्मान कैसे मिल सकता है? अदनान सामी के पिता अरशद सामी खान ने पाकिस्तानी एयरफोर्स की तरफ से 1965 के युद्ध में भारत के खिलाफ हो रही जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आइए जानते हैं अदनान के पिता अरशद सामी खान के बारे में..

अदनान सामी (Adnan Sami) के पिता अरशद सामी खान अफगानिस्तान के हेरात में पैदा हुए थे। अदनान के दादा यानी अरशद के पिता अब्दुल सामी खान हेरात के डिप्टी जनरल ऑफ पुलिस (DGP) थे। तब भारत और पाकिस्तान में विभाजन नहीं हुआ था।

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लेकिन इसी दौरान अफगानिस्तान में हुई एक क्रांति में भारी मारकाट में उनके घर के सदस्य को मार दिया जाता है। और इसी घटना से अरशद सामी खान अपना परिवार को लेकर अफगानिस्तान से भाग जाते है। और भागकर पाकिस्तान के पेशावर में आकर बसने का फैसला लेते हैं।

यंहा पर आकर अदनान(Adnan Sami) के पिता अरशद सामी खान पाकिस्तानी वायुसेना को अपनी सेवा देनी शुरू कर देते हैं। और इस तरह से वो पाकिस्तान के सबसे विश्वासपात्र सैनिक बन जाते है। अरशद सामी खान वहां के हीरो उस दौरान बने जब 1965 में भारत-पाकिस्तान का युद्ध हुआ। और अरशद सामी खान ने पाकिस्तानी एयरफोर्स में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर रहते हुए भारत के खिलाफ खड़े होकर मोर्चा संभाला था।

बताया जाता है कि इस लड़ाई के दौरान अरशद सामी खान ने भारत का 1 लड़ाकू विमान, 15 टैंक और 22 सैन्य गाड़ियों को ध्वस्त किया था। और इसी बहादुरी के लिए पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें सितारा-ए-जुर्रत अवॉर्ड दिया था यह अवार्ड पाकिस्तानी सेना की ओर से दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा बहादुरी का सम्मान है