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आर्मी क्लब में सैंडविच बेचने वाला ये अभिनेता ऐसे बना 'ट्रेजडी किंग', अमिताभ और शाहरुख भी करते हैं सैल्यूट

Bhup Singh

Publish: Dec 11, 2019 13:07 PM | Updated: Dec 11, 2019 13:07 PM

Bollywood

आर्मी क्लब में सैंडविच बेचता था ये एक्टर, आगे चल कर कहलाया बॉलीवुड का ट्रेजडी किंग.....

गंभीर भूमिकाएं निभा इंडस्ट्री में 'ट्रेजडी किंग' के नाम से मशहूर हुए दिलीप कुमार को सदी के सुपरस्टार के रूप में जाना जाता है। वे महज 25 साल की उम्र में ही बॉलीवुड में शीर्ष के अभिनेताओं में शुमार हो गए थे। महानायक अमिताभी बच्चन और शाहरुख खान सहित कई ऐसे स्टार्स हैं जो दिलीप साहब को किसी यूनिवर्सिटी से कम नहीं समझते। उन्होंने पाच दशक तक अपने अभिनय कौशल के दम पर दर्शकों के दिलों पर राज किया है। उन पर फिल्माया गया 'गंगा जमुना' का गाना नैना जब लड़िहें काफी पॉपुलर हुआ था।

 

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कोई नहीं तोड़ पाया उनका ये रिकॉर्ड
दिलीप कुमार 8 फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड जीत चुके हैं। उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। भारत सरकार उन्हें पद्म भूषण, दादा सहाब फाल्के अवॉर्ड, और पद्म विभूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। यह एक ऐसा कीर्तिमान है जिसे अभी तक तोड़ा नहीं जा सका है। शाहरुख खान ने 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतकर उनकी बराबरी कर ली है। किंग खान को को दिलीप साहब अपना बेटा मानते हैं। इसके अलावा उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज से भी सम्मानित किया गया है। अभिनय के क्षेत्र में पाकिस्तान से इतना बड़ा सम्मान किसी को नहीं दिया गया।

 

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आर्मी क्लब में बेचते थे सैंडविच
दिलीप कुमार का असली नाम मुहम्मद यूसुफ खान है। उनका जन्म पेशावर 'पाकिस्तान' में 11 दिसंबर, 1922 को हुआ था। उनके पिता फल बेचा करते थे और मकान का कुछ हिस्सा किराए पर देकर गुजर-बसर करते थे। दिलीप ने नासिक के पास एक स्कूल में पढ़ाई की। वर्ष 1930 में उनका परिवार मुंबई आकर बस गया। वर्ष 1940 में दिलीप कुमार की पिता से किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया। मतभेद के कारण वह पुणे आ गए। यहां उनकी मुलाकात एक कैंटीन के मालिक ताज मोहम्मद से हुई, जिनकी मदद से उन्होंने आर्मी क्लब में सैंडविच स्टॉल लगाया। इसके बाद वह मुंबई वापस लौट आए और इसके बाद उन्होंने पिता को मदद पहुंचने के लिए काम तलाशना शुरू किया।

पहली मूवी थी 'ज्वार भाटा'
दिलीप की पहली मूवी थी फिल्म 'ज्वार भाटा' थी। जो 1944 में आई। 1949 में फिल्म 'अंदाज' की सफलता ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। 'दीदार' (1951) और 'देवदास' (1955) जैसी फिल्मों में दुखद भूमिकाओं के मशहूर होने की वजह से उन्हें ट्रेजडी किंग कहा गया।