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घर की छत पर बैठकर मेहमानों की सूचना देने वाले कौवे अब गायब से हो गए हैं, लेकिन शहर में यहां अभी भी सुनाई देती है कौवों की कांव-कांव

Murari Soni

Publish: Sep 19, 2019 22:14 PM | Updated: Sep 19, 2019 22:14 PM

Bilaspur

पूर्वजों की प्रथा को आगे बढ़ा रहे लोग, कौवों को प्रतिदिन खिलाते हैं खाना

बिलासपुर. संचार क्रांति आने के पहले छांनी (घर की मुढ़ेर) पर कांव-कांव की आवाज देकर घर में मेहमान आने की सूचना देने वाले कौवे अब शहर और गांव से गायब से हो गए हैं। वहीं बिलासपुर शहर में एक जगह ऐसी भी है जहां प्रतिदिन कौवों की भीड़ लगी रहती है। यहां कौवों को खाना खिलाने की परंपरा लोग वर्षों से निभाते आ रहे हैं, जिससे आज भी कौवे रोज पहुंचते हैं।
गौरतलब है कि कुछ वर्षों से लगातार इनकी संख्या गिरती जा रही है। हालात ये हैं कि कभी कौवों को देखकर चलने वालों लोगों को ढूडऩे से भी कौवे दिखाई नहीं देते हैं। पुरखों को श्राद्ध भोजन देने के लिए लोग कौवों को खोजते नजर आते हैं पर दिखाई नहीं देते।
वहीं शहर के गोल बाजार में अभी भी लोग पूर्वर्जों की प्रथा बरकरार रखे हुए हैं और कौवों को भोजन देकर उनका संरक्षण किए हैं। स्थानीय लोगों की माने तो यहां प्रतिदिन सुबह 7 बजे से कौवों की आवाज सुनाई देने लगती है। चौराहे के मंदिर के पास लोग नमकीन विस्किट और अन्य खाद्य सामग्री कौवों को खिलाते हैं। यहां प्रतिदिन आधा सैकड़ा से अधिक कौवे आते हैं और खाना खाकर उड़ जाते हैं।

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वर्जन..
--वर्षों पहले हमारे पूर्वज भी कौवों को खाना खिलाते थे, पूर्वजों के इस कार्य को धीरे-धीरे व्यापारी कौवों को नमकीन डालने लगे। प्रतिदिन करीब 50 से 60 कौवे और अन्य पक्षी आते हैं।
विनय गुप्ता
स्थानीय दुकानदार गोलबाजार

--बरसात हो, ठंड या गर्मी यहां 12 महिनें सुबह-सुबह कौवे दिखाई देते हैं। हम सभी लोग पक्षियों को खाने पीने की सामग्री डालते हैं। यहां तक की कुछ कौओं को यहां के लोग पहचाने भी लगे हैं।
रवि गुप्ता
स्थानीय दुकान संचालक गोलबाजार