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प्लांट में बन रहा था दही और जब ढक्कन खोलकर देखा तो बिलबिला रहे थे कीड़े

Murari Soni

Publish: Sep 20, 2019 11:20 AM | Updated: Sep 20, 2019 11:20 AM

Bilaspur

कोनी दुग्ध चिलिंग प्लांट में जांच, दही में मिले कीड़े, अधिकारियों ने नाली में बहवाया, मैनेजर को नोटिस

0 गंदे हाथों व जूता चप्पल पहन कर हो रहा था काम
0 मानक के अनुरूप नहीं मिला दूध, गंदगी का आलम
0 जांच में पहुंचे अधिकारियों की टीम भी हैरान
0 कीड़ायुक्त लगभग 25 लीटर दही को तुरंत नाली बहवाया गया
0 छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध सहकारी संघ के कोनी के चिलिंग प्लांट में खाद्य सुरक्षा के सभी नियमों का उल्लंघन मैनेजर को थमाया नोटिस

बिलासपुर. खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने गुरुवार को कोनी स्थित दुग्ध चिलिंग प्लांट में जांच की। इस जांच के दौरान उन्हें कई हैरान करने वाली बातें मिली। जो दही मौके पर रखे गए थे उसमें कीड़े बिलबिला रहे थे। मौके पर कार्य कर रहे लोग दूध को गंदे हाथों से डिब्बों और चिलिंग प्लांट के प्रोसिसिंग प्लांट डाल रहे थे। बकौल जांच अधिकारी वहां पर गंदगी का आलम यह था कि पांच मिनट रुकना भी दूभर हो गया था। इसके बाद तीस लीटर से अधिक दही को अफसरों ने नाली फेंकवा दिया। किसी भी कर्मचारी के पास हाईजेनिक सुरक्षा कवच नहीं होने आदि अनियमितताओं को लेकर जांच टीम ने मौके पर ही प्लांट के मैनेजर को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। विदित हो कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध संघ का कोनी में चिलिंग प्लांट है। इस प्लांट से ही प्रदेश के सुप्रसिद्ध ब्रांड देवभोग के उत्पाद तैयार किए जाते है । साथ ही इसी केंद्र से वितरण भी किया जाता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र विंध्यराज व मोहित बेहरा की टीम ने गुरुवार को इस चिलिंग प्लांट में अचानक निरीक्षण किया।

गंदगी देखकर हतप्रद
खाद्य सुरक्षा के अधिकारियों को दूध के प्रोसिसिंग प्लांट और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के हाथों की गंदगी देखकर हैरान रहे। वहां काम करने वाले किसी भी कर्मचारी ने तय मानक के तहत सुरक्षा किट धारण नहीं किया था।

दही को नाली में फिंकवाया
जांच टीम के अधिकारियों ने बताया कि प्लांट के जिस स्थल पर दही का कंटेनर रखा गया था। वो तो गंदा था ही साथ ही दही में कीड़े बिलबिला रहे थे। जांच अधिकारियों ने इस दही को वहां मौजूद कर्मचारियों के हाथों तुरंत नाली में फिंकवाया गया। बताया जा रहा है कि तीस लीटर से अधिक दही को फिंकवा दिया गया।

दूध भी अमानक
जांच टीम को चिलिंग प्लांट में दूध भी अमानक मिला है। जांच अधिकारियों ने बताया कि जांच करने पर दूध में फैट 3.8 से 3.9 प्रतिशत मिला। जबकि खाद्य सुरक्षा मानक के अनुसार दूध में न्यूनतम फैट की मात्रा 4.5 से 5 प्रतिशत होनी चाहिए।

हाईरिस्क श्रेणी में है दूध, पर परवाह नहीं
खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में दूध हाईरिस्क श्रेणी में है। इसलिए इसकी प्रक्रिया और देखरेख में विशेष सतर्कता बरतने का नियम बनाया गया है। इसमें प्रत्येक कर्मचारी को हैंड ग्लब्स, हैंड कवर पहनना है लेकिन यहां पर कर्मचारियों ने पहना ही नहीं था ऐसे ही प्रोसिसिंग क्षेत्र में चप्पल -जूते पहनकर कार्य करते पाए गए।

बैच लॉट का कोई रिकार्ड नहीं
जांच टीम ने बताय कि देवभोग के सभी खाद्य उत्पाद के बैच नंबर किस वितरक को आपूर्ति की गई। इसका रिकार्ड मौके पर नहीं मिला। इससे किस वितरक को कौन से बैच नंबर का लॉट दिया गया इसकी जानकारी नहीं थी। यह जानकारी चिलिंग प्लांट के अफसरों तक मालूम नहीं है। नियम के अनुसार इसका रिकार्ड रखना आवश्यक है ताकि उपभोक्ताओं की शिकायत पर कौन से बैच का उत्पाद किस वितरक को दिया गया यह पता चल सके।

सारे वितरक अवैध!
अधिकारियों का कहना है कि देवभोग के उत्पाद विक्रय के लिए समिति ने सात वितरक नियुक्त किए हैं। इन सभी वितरकों के पास खाद्य सुरक्षा लायसेंस नहीं है। जांच टीम अधिकारियों के अनुसार सभी वितरक अवैध तरीके से देवभोग के उत्पादों का विक्रय कर रहे हंै। नियमत: इन वितरकों को खाद्य सुरक्षा का लायसेंस लेना अनिवार्य है।

ये है सजा का प्रावधान
दुग्ध उत्पाद करने वाले और इसके वितरक दोनों समान रूप से जिम्मेदार है। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2011 के तहत इस नियम का उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर 5 लााख का जुर्माना और 6 माह के कारावास का प्रावधान है। इसमें खाद्य वस्तुओं का निर्माण करने और वितरक दोनों पर अर्थदंड व कारावास का नियम बनाया गया है।
एजीएम से नहीं हुई बात
देवभोग के यहां पदस्थ एजीएम रंजीत कुमार सिंहदेव के सेलफोन नंबर पर संपर्क किया गया । लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।