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विधायक भीमा मंडावी हत्याकांड मामले की जांच एनआईए करेगी, राज्य शासन की अपील खारिज

Murari Soni

Publish: Nov 20, 2019 12:21 PM | Updated: Nov 20, 2019 12:21 PM

Bilaspur

Bhima mandavi death: जस्टिस आरसीएस सामंत की एकलपीठ ने विधायक भीमा मंडावी हत्याकांड मामले की जांच का जिम्मा एनआईए को देते हुए राज्य शासन की अपील खारिज कर दी है।

बिलासपुर. जस्टिस आरसीएस सामंत की एकलपीठ ने विधायक भीमा मंडावी हत्याकांड मामले की जांच का जिम्मा एनआईए को देते हुए राज्य शासन की अपील खारिज कर दी है। इस मामले में एकलपीठ ने 13 नवंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 20 नवंबर को सुनाया गया। अपने दिए आदेश में हाईकोर्ट ने कहा नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एक्ट के प्रावधानों के तहत किसी मामले की जांच का विशेषाधिकार एनआईए को है, उक्त एक्ट को राज्य शासन द्वारा चुनौती नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने की जानकारी दी है।

मामले की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने हत्याकांड की जांच का जिम्मा एनआईए को देते हुए राज्य शासन को 15 दिनों में जांच से संबंधित समस्त दस्तावेज एनआईए को सौंपने के निर्देश दिए थे। इस पर शासन द्वारा आपत्ति जताते हुए स्थानीय पुलिस द्वारा मामले की जांच कराए जाने की मांग की गई। 13 नवंबर को दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाया गया।

ज्ञात हो कि विधायक भीमा मंडावी हत्याकंड मामले में स्टेट पुलिस के साथ एनआईए जांच के कारण दोनों में टकराव की स्थिति बन गई थी। एनआईए ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस पर जांच में सहयोग नहीं करने व जांच से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया था। इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने 25 जून की प्रारंभिक सुनवाई के बाद पुलिस जांच पर रोक लगा दी थी। 23 अक्टबूर की सुनवाई में एनआईए की ओर से कहा गया कि संयुक्त जांच चलने के के कारण प्रगति नहीं हो रही है और राज्य पुलिस द्वारा असहयोग की स्थिति बरकरार है। जांच का जिम्मा उसे दिया जाए। इस पर एकलपीठ ने जांच की जिम्मेदारी एनआईए को देते हुए स्टेट पुलिस को अब तक की गई जांच से संबंधित समस्त दस्तावेज 15 दिनों में एनआईए को देने का निर्देश दिया था। इसे राज्य शासन द्वारा चुनौती दी गई थी।

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