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घर का ये स्थान है बहुत महत्वपूर्ण, भूलकर भी न करें ये काम वरना हो जाएंगे कंगाल!

Deepesh Tiwari

Publish: Jul 19, 2019 17:51 PM | Updated: Jul 19, 2019 19:53 PM

Bhopal

अगर गलती हो गई है तो इन उपायों से करें निदान...

भोपाल। कई बार लाख कोशिशों के बावजूद हमें सफलता नहीं मिलती या यूं कहें तमाम कोशिशें करने के बावजूद हम मनचाही ( vastu shastra ) स्थिति को प्राप्त नहीं कर पाते। जानकारों की मानें तो ये स्थिति तब पैदा होती हैं, जब हम कुछ नियमों का पालन करने में चूक जाते हैं। इन्हीं नियमों में से एक खास बात घर की दहलीज ( House threshold ) से भी जुड़ी हुई है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार घर की दहलीज ( House threshold ) नियमों का पालन नहीं करने से केवल मनचाही सफलता को मिलने में ही कठिनाई नहीं होती, बल्कि इसके नियमों की अनदेखी इनसान को कंगाल तक बना देती है।

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पंडित शर्मा के मुताबिक दहलीज घर का एक महत्वपूर्ण स्थान होती है। दरअसल घर को मंदिर ( mandir ) माना जाता है, वहीं दहलीज को इसका प्रवेश द्वार ( entrance gate ) माना जाता है। और मंदिर के प्रवेश द्वार के समान ही इसकी दहलीज को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

वहीं कुछ और जानकारों के अनुसार आजकल हम अपनी प्राचीनतम सभ्यता और संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। जिसका परिणाम हमें जाने-अनजाने बुरा ही भोगना पड़ता है।

क्या है होती दहलीज : House threshold ...
द्वार के चौखट के नीचे वाली लकड़ी या पत्थर जो ज़मीन पर रहती है दहलीज कहलाती है। इसे देहरी या देहली भी कहते हैं। घर के बाहर मुख्य द्वार पर दहलीज बनाई जाती थी, वास्तु अनुसार जिस घर में दहलीज होती है, वहां धन रुकता है। धन व्यर्थ के कार्यों पर खर्च नहीं होता है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।

House threshold

वास्तुशास्त्र की जानकार रचना मिश्रा के अनुसार यदि वास्तु की नजर से गौर करें तो हम पाएंगे कि आजकल जितने भी घर बनाए जाते हैं, वे सिंगल दरवाजे वाले होते हैं। डबल दरवाजे वाले घर बनने लगभग बंद से हो गए है। घर की चौखट भी डिजाइन वाली होती है, लेकिन दहलीज नहीं होती है।


आपने मंदिरों में देखा होगा, वहां सिंगल दरवाजे नहीं होते। कोई भी मंदिर में सीधे प्रवेश नहीं कर पाता, मंदिरों में दहलीज लांघ कर ही अंदर जाया जाता है।

मिश्रा कहती हैं यदि हम अपने घर के मुख्य द्वार को दो पल्ले वाला बनाएं और दहलीज भी लगाएं तो हम अनेक कुप्रभाव को रोक सकते हैं।
दरअसल ऐसे में कोई भी व्यक्ति हमारे घर में प्रवेश करे तो दहलीज लांघकर ही आ पाए। यानि सीधे घर में प्रवेश न करें।

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वहीं पहले दहलीज पूजन का भी चलन था। जो अब कम होता जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं दहलीज पूजन घर में आने वाली निगेटिव एनर्जी को कम कर देता है। अतः हम भी अपने घरों में दहलीज बना लें, तो कई अशुभ परिणामों से बच सकते हैं।


दहलीज के लिए ये है खास: Don't do
: इसका कभी अपमान नहीं करना चाहिए।
: जैसे दरवाजा पटकना यानि कस कर धक्का देना।
: दहलीज पर पैर पटकना।
: दहलीज को गंदा रखना।

दहलीज के सामने कभी कुड़ा या कचरा न रखें :
दहलीज पर कभी किसी के चरण न छुएं। यानि मेहमान का स्वागत या विदाई कभी दहलीज पर खड़े होकर न करें। शास्त्रों के अनुसार मेहमान का स्वागत दहलीज के अंदर से व विदाई दहलीज से बाहर आ कर करें।


ऐसे समझें दहलीज की उपयोगिता...
पुरानी मान्यता के अनुसार ऐसे भवन जिनमें चौखट या दहलीज न हो उसे बड़ा अशुभ संकेत माना जाता थे, मान्यता है की मां लक्ष्मी ऐसे घर में प्रवेश ही नहीं करती जहां प्रवेश द्वार पर चौखट न हो, यहां तक की ऐसे घर के सदस्य संस्कारहीन होने की बात तक कही जाती है।

इसकी दूसरी अनिवार्यता यह है की इससे भवन में गंदगी भी कम प्रवेश कर पाती है तथा नकारात्मक उर्जाओ या किसी शत्रु द्वारा किया गया कोई भी नीच कर्म भी भवन में प्रवेश नहीं कर पाता।

चौखट अथवा दहलीज पुरातनकाल से ही हमारे संस्कार व जीवनशैली का एक प्रमुख अंग रही है।

पौराणिक भारतीय संस्कृति व परम्परानुसार इसे कलश, नारियल व पुष्प, अशोक, केले के पत्र से या स्वास्तिक आदि से अथवा उनके चित्रों से सुसज्जित करने की प्रथा है। जो आज के इस अध्युनिक युग के शहरी जीवन में भोग, विलासिता के बीच कही विलुप्त सी हो गई है।

कुछ जानकार तो यहां तक कहते है कि आजकल हम अपनी प्राचीनतम सभ्यता और संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। जिसका परिणाम हमें जाने-अनजाने बुरा ही भोगना पड़ता है।

ये है मान्यता...
: मुख्य द्वार चार भुजाओं की चौखट वाला होना अनिवार्य है। इसे दहलीज भी कहते हैं। यह भवन में निवास करने वाले सदस्यों में शुभ व उत्तम संस्कार का संगरक्षक व पोषक है।

: यदि हम अपने घर के मुख्य द्वार को दो पल्ले वाला बनाएं और दहलीज भी लगाएं तो हम अनेक कुप्रभाव को रोक सकते हैं। कोई भी व्यक्ति हमारे घर में प्रवेश करे तो दहलीज लांघकर ही आ पाए। सीधे घर में प्रवेश न करें। पहले दहलीज पूजन का चलन था।

: ध्यान रखें किसी भी बाथरूम और कमरे के फर्श के बीच दूरी बनाने के लिए थोड़ी ऊंची दहलीज भी बनाई जा सकती है। जब बाथरूम का दरवाजा बंद रहेगा तब दहलीज के कारण दरवाजे के नीचे से भी नकारात्मक ऊर्जा कमरे में प्रवेश नहीं कर पाएगी।

: प्रवेश द्वार पर दहलीज का निर्माण शुभ फलप्रद रहता है।

: अशुभ नजर व ग्रहदोषों का प्रवेश भवन में रोकने में दहलीज महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

: दहलीज बनाते समय उसके नीचे चांदी का तार डाल देना चाहिए।

: मुख्य द्वार की चौखट या दहलीज को ट्रैफिक के लिए रास्तों पर बनाए जाने वाले अवरोध / स्पीड ब्रेकर जैसा या सीढ़ीनुमा अवश्य बनाएं।

: यदि चौखट तथा दरवाजों में अंदर तथा बाहर की ओर झुकाव हो तब सम्भव है भवन स्वामी की आर्थिक स्थति में उत्तरोत्तर कमी हो।

: यदि हम भी अपने घरों में दहलीज बना लें, तो कई अशुभ परिणाम से बच सकते हैं।

वहीं वास्तु की नजर से गौर करें तो हम पाएंगे कि आजकल जितने भी घर बनाए जाते हैं वे सिंगल दरवाजे वाले होते हैं। डबल दरवाजे वाले घर बनने लगभग बंद से हो गए है। घर की चौखट भी डिजाइन वाली होती है, न ही दहलीज होती है।
पंडित शर्मा का कहना है कि आपने मंदिरों में देखा होगा, वहां सिंगल दरवाजे नहीं होते। कोई भी मंदिर में सीधे प्रवेश नहीं कर पाता, मंदिरों में दहलीज लांघ कर ही अंदर जाया जाता है।

मुख्य द्वार पर दहलीज बनाएं घर में रुकेगा धन :
घर के बाहर मुख्य द्वार पर दहलीज बनाई जाती थी ,वह इसलिए बनाई जाती थी की वास्तु अनुसार जिस घर में दहलीज होती है वहां धन रुकता है। धन व्यर्थ के कार्यों पर खर्च नहीं होता है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। बस हमें दहलीज के नियमों के अनुसार कार्य करना होता है।

खास उपाय: Special Vastu Tips
ऐसे कम करें घर की नकारात्मकता...

: घर से दुर्भाग्य दूर करने के लिए एक तांबे के लोटे में गंगा जल, पानी, दूध और गोमूत्र समान मात्रा में ले लें। फिर करीब 1 से 1.30 घंटे बाद इस जल से दहलीज को धोएं। यह कार्य 43 दिन तक लगातार करने से घर की नकारात्मकता कम होती है। साथ ही घर में बरकत आनी शुरू हो जाती है।
वहीं यदि दूर्वा घास के द्वारा घर में इस जल का छिड़काव करते हैं। तो नकारात्मकता पूरी तरह से दूर हो जाती है।

ये रखना है खास ध्यान:
दहलीज पर छिड़का जल कुछ देर वहां पर रहने दे , फिर एक साफ कपड़े से उसे पोछ दें।

ये चीजें बनाती हैं कंगाल:
दहलीज पर जुते चप्पल नकारात्मकता देते हैं, इससे सकारात्मक उर्जा नष्ट हो जाती है। वहीं वास्तु शास्त्र के अनुसार भी जुते चप्पल दहलीज पर रखना या घर के अंदर ले जाना अनुचित बताया गया है।

ऐसे दूर करें दुर्भाग्य... : throw out your bad Luck
दहलीज पर पत्थर की स्लैप के नीचे किसी चिपकाने वाले पदार्थ से दो सिक्के लगवा दें।
या दहलीज के नीचे 6 गड्ढे करके उसमें काले हकीक गड़वा दें और उसके बाद हकीक वाली साइड को ज्वाइंट करवा दें। ऐसा करने से किसी भी स्थिति में निगेटिव इनर्जी या यूं कहें निगेटिविटी आपके घर में प्रवेश नहीं कर पाएगी।