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व्यापमं घोटाले में 100 से अधिक लोगों के बयान दर्ज, नेताओं के नाम वाली शिकायतों पर निर्णय बाकी

Radheshyam Dangi

Publish: Sep 17, 2019 07:47 AM | Updated: Sep 17, 2019 07:47 AM

Bhopal

अब तक की प्रगति और तथ्यों को लेकर स्पेशल डीजी पुरुषोत्तम शर्मा जल्द करेंगे समीक्षा

 

भोपाल। व्यापमं घोटाले से जुड़ी 197 शिकायतों की जांच में भोपाल, इंदौर और ग्वालियर स्पेशल टास्क फोर्स की एसआईटी ने 1 सितंबर से अब तक 100 से ज्यादा शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर लिए हैं। लेकिन इनमें कई ऐसी शिकायतें ऐसी भी हैं, जिनमें भाजपा सरकार के तत्कालीन मंत्रियों, पदाधिकारियों और कुछ अधिकारियों के नाम है।

बयान के लिए बुलाया जा रहा है
ऐसी शिकायतों पर अभी एसटीएफ ने कोई खास रणनीति नहीं बनाई है। तीनों ही एसआईटी द्वारा हर दिन 10-10 शिकायतकर्ताओं को नोटिस देकर बयान के लिए बुलाया जा रहा है। लेकिन कहीं दो तो कहीं चार ही लोगों के बयान दर्ज हो पा रहे हैं।

 

ढील बरती जा रही है
तीनों एसआईटी को अलग-अलग शिकायतों की जांच का जिम्मा दिया गया है। पीएमटी-प्री पीजी परीक्षा और व्यापमं घोटाले की अन्य भर्ती परीक्षाओं संबंधी शिकायतों में बड़े नेताओं का एक बार फिर नाम होने से कुछ शिकायतों में अभी बयान तक दर्ज करने में ढील बरती जा रही है।

 

अन्य राज्यों के भी शिकायतर्ता
भोपाल में करीब 33, इंदौर में 35 और ग्वालियर एसआईटी ने 32 से ज्यादा बयान अब तक दर्ज कर लिया है। कुछ मामलों में अन्य राज्यों के भी शिकायतर्ता हैं, जिन्हें बयान के लिए बुलाकर बयान लिए गए हैं।

दस्तावेज पेश कर चुके हैं
पीएमटी, प्री-पीजी से संबंधित शिकायतों में शिकायतकर्ता आशीष चतुर्वेदी और पारस सकलेचा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा, अध्यक्ष व्यापमं, परीक्षा नियंत्रक, परीक्षा केंद्रों के संचालक, ऑब्र्जवर, इंविजिलेटर, काउंसलिंग कमेटी के सदस्यों, तत्कालीन डीन, निजी व सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अफसर आदि की भूमिकाओं से संबंधित दस्तावेज पेश कर चुके हैं।


फूंक-फूंक कर कदम रख रहे
लेकिन एसटीएफ को इनके बयानों और दस्तावेजों में नेताओं और तत्कालीन अधिकारियों के नाम आने से जांच में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। हर बयान से संबंधित दस्तावेज की गहराई से जांच कर उसे बार-बार पुष्ठ कर रहा है।


कार्रवाई नहीं की गई
कार्रवाई करने में भी सतर्कता बरता जा रहा है। अब तक के बयानों में शिकायतकार्ताओं ने यह तक बयान दिया है कि एसटीएफ के तत्कालीन अधिकारियो ने भी नेताओं की भूमिका पर रिपोर्ट बनाई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। एडीजी एसटीएफ डॉ अशोक अवस्थी का कहना है कि अलग-अलग एसआईटी द्वारा जांच की जा रही है। हर एसआईटी द्वारा 10-10 लोगों को बयान के लिए रोजाना बुलाया जा रहा है।