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सांपों का जहर निकालने तीन कंपनियों ने लाइसेंस लेने दिए प्रस्ताव

Ashok Gautam

Publish: Oct 21, 2019 15:09 PM | Updated: Oct 21, 2019 15:13 PM

Bhopal

सांपों का जहर निकालने तीन कंपनियों ने लाइसेंस लेने दिए प्रस्ताव
- कंपनियों को बताना होगा इस क्षेत्र में काम का अनुभव और इनफ्रास्टेक्चर
- वन विभाग ने तमिलनाडु सरकार से मांगे नियम-शर्तों की जानकारी

भोपाल। प्रदेश में सांपों का जहर निकालने के लाइसेंस के लिए वन विभाग में तीन कंपनियों ने अपने प्रस्ताव दिए हैं। विभाग ने इन प्रस्ताव में कुछ कमियां होने के कारण कंपनियां से इसे पूरा कर दोबारा प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही कंपनियों से सांपों के जहर निकालने तथा इस क्षेत्र में काम करने का अनुभव भी मांगा गया है। कंपनियों को यह भी बताना होगा कि इस कार्य को करने के लिए उनके पास वर्तमान में क्या इन्फ्रास्टेक्चर है और आगे की क्या कार्ययोजना है।

वन विभाग ने तमिलनाडु सरकार से सांपों के जहर निकालने से जुड़ी गाइड लाइन और नियम-कानून की प्रति मांगी है। इन कार्यों वन विभाग भी भूमिका के संबंध में भी जानकारी देने के लिए तमिलनाडु सरकार से कहा गया है। जिससे राज्य सरकार तमिलनाडु की तर्ज पर प्रदेश में सांपों के जगह निकालने के संबंध में नियम और शर्ते तैयार कर सके। हालांकि वन विभाग की एक टीम जुलाई में चेन्नई जाकर इरूला स्नेक केचर्स इंडस्ट्रियल कारर्पोरेशन का अध्ययन करने गई थी, उसने अपनी रिपोर्ट दो माह पहले ही सरकार को सौंप दी है। वनमंत्री उमंग सिंघार ने पिछले दिनों वन अधिकारियों को सर्प विष के व्यवसायिक उपयोग की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे।


वन समितियों के माध्यम से पकड़े जाएंगे सांप-

वन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार सांप का जहर निकालने के इस काम में स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाए भी खुलेंगी। सांप पकडऩे का काम वन समितियों को दिया जाएगा। वन समितियों को सांप पकडऩे और उसके काटने से बचाव की ट्रेनिंग भी वन विभाग की टीम देगी। इन समितियों को एंटी वीनम किट भी दी जाएगी। समिति के सदस्यों को प्रति सांप के हिसाब से भुगतान करने का प्रस्ताव है। समितियां जंगल से सांप पकड़ कर उन्हें वन विहार स्थित केंद्र तक लाने का काम करेगी। सांप पकडऩे की अनुमति प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी द्वारा तय शर्तो के आधार पर दी जाएगी।

किस तरह काम करेगा स्नेक कैचर सेंटर-

वन विहार में स्नेक केचर सेंटर स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। समितियों द्वारा लाए गए सांपों का यहां सबसे पहले डाक्टरों और वैज्ञानिकों द्वारा परीक्षण किया जाएगा। स्वस्थ सर्प को ही केंद्र स्वीकार करेगी। सांप को पकडऩे के बाद उन्हें कैचर सेंटर में एक माह के लिए रखा जाएगा। माह में चार बार ही सांप का जहर निकाला जाएगा। उसके बाद सांप को वापिस उसी स्थान पर वन समिति के माध्यम से छुड़वाया जाएगा जहां से वह लाया गया था।

माइनस दस डिग्री में रखा जाएगा विष

जहर निकालने के बाद उसे -१० डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाता है। इसके बाद उसका पाउडर बनाया जाता है। सांप पकडऩे के एक माह के अंदर ही उसे प्राकृतिक रहवास में छोडऩा आवश्यक होता है। प्रयोगशाला अप्रैल से जुलाई तक बंद रहती है।

 

सांपों को मिलेगा प्राकृतिक रहवास-

स्नेक कैचर सेंटर में सांपों को रहने के लिए यहां प्राकृतिक रहवास तैयार किया जाएगा। उनके रहने के लिए अलग-अलग आकार के मटके रखे जाएंगे और मिट्टी के पिट भी बनाए जाएंगे, जिससे वे यहां असहज महसूस न करें। सांपों को मौसम के हिसाब से प्राकृतिक तापमान की व्यवस्था भी की जाएगी।

यह होंगे मांपदंड-

सांप पकडऩे के लिए मांपदंड भी निर्धारित किए जाएंगे। प्रस्तावित मांपदंड के अनुसार एक मीटर से कम लंबाई वाले रसल वाइपर और इंडियन कोबरा नहीं पकड़े जाएंगे। जबकि कॉमन करैत के लिए यह मांप दंड 90 सेंटीमटर तय किया गया है। सॉ स्किल्ड पाईपर सिर्फ 9 से 12 इंच के लम्बाई वाले ही पकड़े जाएंगे।


ये हैं जहर के सबसे बड़े ग्राहक
सांपों के जहर का उपयोग एंटी विनम तैयार करने एवं शोध कार्यों में किया जाता है। इसके इसके सबसे बड़े ग्राहक किंग इंस्टीट्यूट चेन्नई, भारत सीरम मुम्बई और सेंट्रल रिसर्च इंस्टट्यूट शिमला है।

संस्थान स्थापित करने बनाई जाएगी टीम

चेन्नई और भोपाल की जलवायु में अंतर होने के कारण इस पर भी अध्ययन कराया जाएगा किस मौसम में सांपों का जहर निकालना उपयुक्त रहेगा। इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम प्रायोग शाला तैयार करने से लेकर सांपों के जहर निकालने तक के लिए अध्ययन करेंगी और इसकी रिपोर्ट सारकार को सौंपेगी।


तीन कंपनियों ने सांपों के जहर निकालने के लाइससें के लिए आवेदन किए हैं। आवेदनों का परीक्षण किया जा रहा है। इनसे कुछ और दस्तावेज मांगे गए हैं। - यू प्रकाशम, वन बल प्रमुख मप्र