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प्रदेश में एक और घोटाला : 10 साल तक एक ही कंपनी को मिलते रहे अरबों रुपए के टेंडर

Amit Mishra

Publish: Sep 17, 2019 10:52 AM | Updated: Sep 17, 2019 11:00 AM

Bhopal

10 साल तक एक ही कंपनी को मिलते रहे अरबों रुपए के टेंडर
कोयले में काला खेल: प्रतिस्पर्धा आयोग की रिपोर्ट में खुला टेंडरिंग घोटाला

भोपाल। प्रदेश में बिजली के कोयले की टेंडरिंग में बड़ा खेल scam उजागर हुआ है। इसमें भाजपा राज में 2004 से 2014 तक दस सालों 10 years में एक ही कंपनी company को अरबों के ठेके billions rupees दे दिए गए। हर बार टेंडर भरने वाली कंपनियों tender ने आपसी और अफसरों से सांठ-गांठ करके दाम कम-ज्यादा किए। इससे दस साल में 19 बार ठेका एक ही कंपनी को मिला। यह खुलासा भाजपा नेता और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने भारतीय प्रतिस्पर्धा जांच आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर किया है। विश्नोई ने कहा है पिछले दस सालों में अरबों का कोयला टेंडर घोटाला हुआ है।


घोटाले को लेकर निशाना नहीं साधा
2004 से 2014 तक प्रदेश में भाजपा का राज रहा है। इस दौरान अजय विश्नोई भी मंत्री और विधायक रहे, लेकिन अजय ने तब इस घोटाले को लेकर निशाना नहीं साधा, जबकि अब भाजपा नेता के तौर पर ही विश्नोई ने यह खुलासा किया है। भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने के सवाल पर विश्नोई ने कहा कि भाजपा सरकार में कोई मंत्री और नेता गड़बड़ी नहीं पकड़ सकता था। सारा घोटाला अफसरों ने किया है। प्रतिस्पर्धा जांच आयोग ने जांच की तो कंपनियों के ई-मेल से भी इस घोटाले के सबूत मिले हैं। नायर व बाकी कंपनी के ई-मेल एक समान हैं।

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ऐसे चला खेल
विश्नोई ने बताया कि इस खेल की शुरुआत 2004 से हुई थी। तब, कोयले की लाइजनिंग के नाम पर करोड़ों का खेल हुआ। हर बार टेंडर प्रक्रिया में 3 से 5 कंपनियां भाग लेती रहीं, लेकिन इन कंपनियों की आपस में और अफसरों से सांठ-गांठ रही। नतीजा ये कि हर बार नायर कंपनी को ही ठेका मिला। जब कभी दूसरी कंपनी का दाम ज्यादा रहा, तो उसे घटा दिया गया। इसके सबूत जांच आयोग को इन कंपनियों के ई-मेल से मिले हैं। आयोग की जांच के मुताबिक नायर कोल सर्विसेस लिमिटेड को 2004 से 2014 तक 19 बार कोयले की लाइज़निंग के टेंडर मिले और हर बार सबसे कम बिड नायर कोल सर्विसेस लिमिटेड को ही मिली।


बिजली आपूर्ति की आड़
आंकड़ों के मुताबिक साल 2002-2003 में एक करोड़ 15 लाख 685 मीट्रिक टन कोयला पॉवर जनरेटिंग कंपनी को सप्लाई हुआ, जबकि 2009- 2010 में ये आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 21 लाख 67 हज़ार मीट्रिक टन हो गया। फिलहाल 2 करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा कोयले की डिमांड को पूरा किया गया है। इस साल 26 हजार मिलियन यूनिट आपूर्ति का दावा किया गया है। इस साल 206 लाख यानी 2 करोड़ 6 लाख मिट्रिक टन कोयले के दम पर कंपनी ने इस मुकाम को हासिल किया है।


ये कंपनियां शामिल
मेसर्स नायर कोल सर्विसेस लिमिटेड
मेसर्स करम चंद थापर एंड ब्रदर्स
मेसर्स नरेश कुमार एंड कंपनी प्राईवेट लिमिटेड
मेसर्स अग्रवाल एंड एसोसिएट्स
नोट- कंपनियों ने आपसी सहमति से टेंडर दाम तय किए। इसके ई-मेल भी आयोग को मिले हैं।


यह कोयला खरीदी का पुराना मामला है, मेरी जानकारी में नहीं है। मैं स्वतंत्र डायरेक्टर हूं, इसलिए रूटीन काम की बजाए केवल मीटिंग्स में जाता हूं। खरीदी के निर्णय मेरे नहीं हैं।
महेंद्र कुमार दुबे, डायरेक्टर-स्वतंत्र, स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, मप्र


इस गड़बड़ी के पीरियड में पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में नहीं था। कुछ समय पूर्व ही पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में आया हूं और यह पूरा मामला पॉवर जनरेटिंग कंपनी से संबंधित है। जनरेटिंग कंपनी का पूरा काम अलग रहता है।
सुखवीर सिंह, एमडी, पॉवर मैनेजमेंट कंपनी, मप्र