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फ्लाई एश ईंटों से बनेंगे प्रधानमंत्री आवास

Ashok Gautam

Publish: Oct 21, 2019 13:53 PM | Updated: Oct 21, 2019 13:57 PM

Bhopal

फ्लाई एश ईंटों से बनेंगे प्रधानमंत्री आवास
स्व-सहायता समूह तैयार करेंगे फ्लाई एश ईंटे

भोपाल। प्रदेश में फ्लाई एश ईंटों से प्रधानमंत्री आवास बनाए जाएंगे। ईंटे बनाने का काम स्व-सहायता समूहों को दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें मिट्टी, रेत और सीमेंट के ईंटों से ज्यादा दाम मिलेगा। फ्लाई एश ईंटे बनाने का काम अभी भोपाल, छिंदवाड़ा, बैतूल सहित दस जिलों के स्व सहायता समूहों को दिया जा रहा है, प्रयोग सफल होने के बाद इस व्यवस्था को सभी जिलों में लागू किया जाएगा। स्व- सहायता समूहों को ईंटा बनाने का प्रशिक्षण और मशीन उपलब्ध का काम पंचायतें करेंगी।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिन क्षेत्रों में फ्लाई एश का भंडारण किया गया है अथवा थर्मल पावर के आस-पास वायु प्रदूषण की ज्यादा होता है। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए फ्लाई एश का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने पर सरकार कार्ययोजना तैयार कर रही है। इसके उपयोग के लिए ईंटे तैयार करने कांक्रीट, सड़कों तथा पुल-पुलिया के निर्माण कार्य में करने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा सभी निर्माण एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। वहीं बिल्डरों को भी इसका उपयोग करने के लिए कहा गया है। सरकार स्व सहायता समूहों को फ्लाई एस मुफ्त में उपलब्ध कराएगी। इधर लोक निर्माण विभाग ने सभी निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों और विभाग में काम कर रहे ठेकेदारों को फ्लाई एश ईंटे और फ्लाई एस का निर्माण कार्यों में ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने करने के लिए कहा है।

फ्लाई एश के डेरों पर पानी छिड़काव के निर्देश

सरकार ने थर्मल पावर कंपनियों को भी निर्देश दिए हैं कि फ्लाई एश को धूल में उडऩे से रोकने के लिए उपाय करें। सुबह-शाम इस पर पानी का छिड़काव करें अथवा इसे ढकने की व्यवस्था करें, जिससे हवा के साथ इनके कण मिलकर वायुमंडल को दूषित न करें।

इसके अलावा इसे रखने के लिए टैंक बनाने तथा जमीन के अंदर गड्डा खोद कर रखने के लिए भी कहा गया है। फ्लाई एश सरकार के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। थर्मल पावर के आस-पास इसके बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। पिछले कई सालों से इसका उत्पादन हो रहा है, थर्मल पावर के पास इसे रखने के लिए जगह ही नहीं मिल रही है। इधर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे कम करने के लिए कई बार निर्देश दे चुका है।