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अफसरों ने साइकिल भंडारण के नाम पर सरकार को लगाई 3 करोड़ की चपत

Harish Divekar

Publish: Nov 12, 2019 22:18 PM | Updated: Nov 12, 2019 22:42 PM

Bhopal

— बच्चों को लैपटॉप और किताबें बांटने में भी किया गोलमाल
— आठ लाख बच्चों को नहीं दी स्कॉलरशिप, पैसा खाते में जमा
- ऑडिट जांच में सामने आई जानकारी

स्कूली छात्रों को साइकिल बांटने की योजना में अधिकारियों ने सरकार को तीन करोड़ की चपत लगा दी। साइकिलों को सुरक्षित रखने के नाम पर ये अतिरिक्त राशि सरकार से ली गई थी। लोक शिक्षण संचालनालय ने छात्रों को नि:शुल्क साइकिल वितरण करने के लिए लघु उद्योग निगम से 2017-18 में 4 लाख 29 हजार 357 साइकिल खरीदी थीं, जिनकी कीमत ३०० करोड़ रपए थी। इसमें विकास खंड स्तर पर साइकिलों के भंडारण के लिए लघु उद्योग निगम को प्रति साइकिल 30 रुपए अतिरिक्त भुगतान भी किया गया। लेकिन संचालानालय के अधिकारियों ने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी भवनों और स्कूलों में ही साइकिलों को रखवा दिया। इससे सरकार को सीधे-सीधे सवा चार लाख साइकिल भंडारण के लिए दी गई अतिरिक्त 3 करोड़ रुपए की चपत लग गई। महालेखाकार की जांच टीम की आपत्ति पर आयुक्त, लोक शिक्षण ने जांच के बिन्दुओं पर सहमति दी, लेकिन आपत्ति का जवाब महालेखाकार को नहीं दिया गया।

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- ऑडिट जांच में सामने आई जानकारी :

- ऑडिट जांच में पता चला कि 4 जिला शिक्षा अधिकारियों के पास 3696 और 21 विकास खंड अधिकारियों के पास 5639 साइकिलें शेष बची हुई थीं। यानी आवश्यकता से अधिक साइकिलें खरीदी गईं।

- आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय ने छात्रों को साइकिल वितरित करने के नाम पर 2018 में 166.58 करोड़ रुपए लघु उद्योग निगम के खाते में जमा करवा दिए।

- ऑडिट टीम ने अपनी जांच में साफ लिखा है कि मध्यप्रदेश वित्त संहिता के अनुसार बिना आवश्यकता के सरकारी खजाने से पैसा नहीं निकाला जा सकता।
- संचालनालय ने शिक्षण संस्थाओं को पूर्व में दिए गए करोड़ों रुपए के अनुदान के उपयोगिता प्रमाण पत्र लिए बिना ही अप्रैल 2017 से जून 2018 तक पोषण, अधोसंरचना विकास, लायब्रेरी समेत अन्य कामों के लिए 14 करोड़ 33 लाख रुपए दे दिए।

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लैपटॉप और किताबें देने में गड़बड़ी :

- प्रदेश में मेधावी छात्र योजना में लैप-टॉप बांटने के लिए 110 करोड़ रुपए खर्च करना बताए गए हैं। छात्रों के खाते में लैप-टॉप के लिए जमा किए गए 25 हजार रुपए के बैंक स्टेटमेंट नहीं मिलने से ऑडिट में इसकी पुुष्टी नहीं हो पार्ई कि ये राशि चिन्हित छात्र के खाते में जमा हुई है कि नहीं।
- ऑडिट जांच में पता चला कि लोक शिक्षण संचालनालय ने कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क दी जाने वाली पुस्तकों के वितरण में ही पाठ्य पुस्तक निगम को 82 करोड़ 47 लाख रुपए का भुगतान कर दिया।

बिना टेंडर के खरीदी की गई :

- 7 जिलों की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि शिक्षा अधिकारी बगैर टेंडर के करोड़ों की खरीदी कर रहे हैं। नीमच, रतलाम, भिण्ड, बालाघाट, सतना, सीधी और राजगढ़ के जिला अधिकारियों ने बगैर टेंडर बुलाए 2 करोड़ रुपए की किताबें, फर्नीचर, सहित अन्य उपकरण खरीदे हैं।

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छात्रों को नहीं मिली स्कॉलरशिप :

- कक्षा 1 से 12वीं तक के प्रतिभावान बच्चों को छात्रवृत्ति देने के लिए 52 करोड़ रुपए लोक शिक्षण संचालनालय के खाते में होने के बाद भी अफसरों ने छात्रवृत्ति नहीं बांटी। सरकार ने 2017-18 में 83 लाख से ज्यादा प्रतिभावान छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए संचालनालय को 550 करोड़ रुपए दिए थे। इसमें से अफसरों ने जुलाई 2018 तक 76 लाख छात्रों के खाते में छात्रवृत्ति जमा करवाई, जबकि 8 लाख से ज्यादा छात्रों की छात्रवृत्ति नहीं दी गर्ई। इनके हिस्से के 52 करोड़ रुपए संचालनालय के खाते में जमा है।

- ऑडिट में इस बात का भी खुलासा हुआ कि राजगढ़, सीहोर, मंदसौर, कटनी, सतना और रीवा के विकासखंड स्थित 6 स्कूलों ने सवा चार लाख रुपए की छात्रवृत्ति को छात्रों के खाते में जमा न करते हुए दूसरे बैंक खातों में जमा कर दी।

- स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा के लिए लोक शिक्षण संचालनालय के खाते में 16 करोड़ रुपए जमा हैं, लेकिन संचालनालय के अधिकारियों ने इस राशि का उपयोग ही नहीं किया, जिसके चलते कई स्कूलों में कम्प्यूटर लैब नहीं बन पाई। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को कम्प्यूटर शिक्षा से वंचित होना पड़ा।

अफसरों ने जांच में नहीं किया सहयोग :

ऑडिट टीम ने विभाग को भेजे गए आपत्ति नोट में साफ लिखा है कि उन्हें लोक शिक्षण संचालनालय के अफसरों ने जांच के लिए सहयोग नहीं किया और उनसे कई अभिलेख और जानकारी छिपाई गई। उन्होने ये भी स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश वित्त संहिता नियम के अनुसार महालेखा परीक्षक को वैधानिक अधिकार हंै कि वह किसी भी विभाग की जानकारी और अभिलेख की सत्यता जांच सकता है। इसके बाद भी 5 जिला शिक्षा अधिकारी एवं 29 विकास खंड शिक्षा अधिकारियों ने ऑडिट के दौरान मांगे गए अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए।