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मिशन गंगा पर उमा भारती, यात्रा की कहानी पढ़िए उन्हीं की जुबानी, किसान की झोपड़ी में गुजारीं रात

Muneshwar Kumar

Publish: Oct 21, 2019 17:08 PM | Updated: Oct 21, 2019 17:08 PM

Bhopal

उमा भारती ने यात्रा में शामिल होने की इच्छा रखने वाले लोगों से बोलीं- देवप्रयाग पहुंचने तक करनी होगी प्रतीक्षा

भोपाल/ मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती मिशन गंगा पर हैं। उन्होंने गंगा यात्रा के लिए पार्टी से डेढ़ साल की छुट्टी ली है। वो गंगोत्री से गंगा तक की यात्रा में विभिन्न जगहों पर प्रवास भी करेंगी। दो दिन पूर्व ही गंगोत्री से उनकी यात्रा शुरू हो गई है। यात्रा कैसी चल रही है और क्या कठिनाईयां आ रही हैं, उसे लेकर उमा भारती ने एक पोस्ट लिखी है। साथ ही कई लोग उनकी यात्रा में शामिल होने के लिए भी फोन कर रहे हैं।


उमा भारती ने फेसबुक पर कुछ तस्वीर शेयर की हैं। साथ ही उन्होंने एक पोस्ट भी लिखा है। जिसे हम हूबहू आपके सामने रख रहे हैं। वो है ये...

उमा भारती ने लिखा है कि परसों मैंने ट्विटर के जरिए आप सबको गंगोत्री से अपने गंगा प्रवास शुरू करने की सूचना दी थी। उसके बाद 2 दिन मैं बहुत गहरी घाटी में थी जहां से फोन नहीं लग पा रहा था। मेरे भोपाल ऑफिस ने मुझे जानकारी दी है कि कुछ लोग मेरे साथ गंगा प्रवास पर रहने के लिए आना चाहते हैं, साथ ही कुछ लोगों ने मेरे प्रवास की व्यवस्थाओं की चिंता व्यक्त की है। मैं दोनों के क्रमशः उत्तर देती हूं-

सिर्फ छोटे-छोटे ढाबे हैं
गंगोत्री से लगभग भटवारी तक कोई भी गांव रोड पर नहीं है सिर्फ छोटे-छोटे ढाबे हैं, जहां सीमित मात्रा में चाय या भोजन मिल सकता है। मैं परसों राणा जी नाम के एक किसान की झोपड़ी में रही जो उन्होंने सेब के बगीचे में रखवाली के लिए बनाई हुई है।

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पुष्प वर्षा करके मेरा स्वागत किया
दोनों पति-पत्नी ने पुष्प वर्षा करके मेरा स्वागत किया और गोबर से लिपी-पुती हुई झोपड़ी में हल्की सी आग जलाकर रोशनी का इंतजाम किया। मुझे ऐसा लगा जैसे उन्होंने मुझे स्वर्ग में रखा है। मेरे साथ करीब 10 लोग जिसमें मेरे सुरक्षाकर्मी, मेरे निजी सहयोगी और डोली वाले शामिल हैं। अभी तक हमें इतनी लोगों की व्यवस्था करने में भी कठिनाई हो रही है।


10 किलोमीटर की दूरी डोली में बैठ तय की
मैंने अभी तक लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय की है, जिसमें से 10 किलोमीटर की दूरी डोली में बैठकर करना पड़ा है। आप सबको पता ही है 1996 की दुर्घटना में मेरे दोनों घुटनों को काफी नुकसान पहुंचा था, जो अब तक पूरे तरीके से ठीक नहीं हो पाया है। मैं सपाट एवं उतार वाली सड़क पर पैदल चलती हूं फिर जैसे ही चढ़ाई की सड़क आती है मैं डोली में बैठ जाती हूं। इस दौरान मैं गाड़ी का प्रयोग नहीं कर रही हूं। गंगा के किनारे अकेले बहुत आनंद में चलती आती हूं।

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देवप्रयाग पहुंचने की प्रतीक्षा करनी होगी
जो लोग मेरे साथ प्रवास में शामिल होना चाहते हैं उन्हें उत्तरकाशी के बाद भैया दूज के बाद मेरे ऑफिस के लोग सूचना देंगे क्योंकि उत्तरकाशी से देव प्रयाग तक भी रुकने की व्यवस्थाओं में भारी अड़चन होगी। इसलिए सबको मेरे देवप्रयाग पहुंचने की प्रतीक्षा करनी होगी। यह मेरे जिंदगी के सबसे खुशनुमा दिन है मुझे आप सबका आशीर्वाद एवं सहयोग चाहिए। मैं ट्विटर के माध्यम से आपसे संपर्क बनाए रखूंगी।


किसान मुझे खूब प्रेम से भोजन कराते
मैं जहां भी पहुंच जाती हूं, वहीं पर रात में आसपास के ढाबे वाले या सेब की खेती करने वाले किसान मुझे खूब प्रेम से भोजन कराते हैं और रखते हैं। आपको जानकारी दे रही हूं कि उत्तराखंड के लोग अखबार बहुत पढ़ते हैं। उन्हें मेरे गंगा प्रवास की पहले से ही जानकारी है, इसलिए मुझे देख कर खूब खुश होते हैं। चाय पीने के लिए अपने-अपने ढाबे पर रोकते हैं। जिले के प्रशासन ने भी नियमानुसार मेरी सभी सुविधाओं की व्यवस्था की है। मैं बिल्कुल परमानंद में हूं। जय गंगा मैया।