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Environment: विकास जितना ही जरूरी पर्यावरणः सबकुछ दांव पर लगाना बुद्धिमानी नहीं

Manish Geete

Publish: Jul 19, 2019 15:31 PM | Updated: Jul 19, 2019 15:31 PM

Bhopal

पर्यावरणविद और एनजीटी के एडवोकेट डॉ. सुदेश बाघमारे कहते हैं याद रखें, विकास जरूरी पर उसके लिए सबकुछ दांव पर लगाना बुद्धिमानी नहीं कही जा सकती।

डॉ. सुदेश बाघमारे

पेड़-पौधे पूरे पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। राजधानी को उसकी प्रकृति जैसे बड़ा तालाब और हरियाली के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ सालों में विकास कार्यों के चलते हरियाली के साथ खेत भी कम होते जा रहे हैं। दूसरी ओर पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कारक जैसे वाहन, उद्योग और निर्माण बढ़ते जा रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है। हरियाली घटने का असर हम इस बार गर्मियों में देख चुके हैं। इस साल अधिकतम तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया। बारिश कम होना भी उसी का परिणाम है। पर्यावरण के लिए तमाम नियम-कानून तो बने हुए हैं, लेकिन पालन पूरी तरह से नहीं हो रहा है। तालाब किनारे, उसके कैचमेंट में, जंगल के बीच में निर्माण की अनुमतियां जारी हो जाती हैं।

 

कई निर्माण इन क्षेत्रों में बिना अनुमति ही हो जाते हैं, उन्हें देखने वाला कोई नहीं। अब अलार्मिंग स्थिति आ चुकी है। विकास कार्य तो शहर के लिए जरूरी है, पर इनमें पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। विकास नियोजित और व्यवस्थित होना चाहिए। उसमें ग्रीन बेल्ट की बिल्कुल उपेक्षा नहीं हो। हरियाली को सहेजने और बढ़ाने का काम केवल सरकारी एजेंसियां नहीं कर सकती हैं। हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अपने जन्मदिन या अन्य विशेष मौके पर हर साल एक पौधा रोपकर उसकी रक्षा का संकल्प लें तो हरियाली को बढऩे से कोई नहीं रोक सकता।

 

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