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जानलेवा लापरवाही: जर्जर नावों का भी कर रहे पंजीयन, अफसरों को बस सूची से मतलब

Ram kailash napit

Publish: Sep 17, 2019 04:04 AM | Updated: Sep 17, 2019 01:27 AM

Bhopal

नावों का फिटनेस होता है हैदराबाद से, पंजीयन में जुटे नगर निगम का दावा-'पर्यटनÓ से ले लेंगे

भोपाल. खटलापुरा नाव हादसे के बाद नगर निगम ने एक बार फिर राजधानीवासियों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। निगम प्रशासन नाव पंजीयन के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट मांग रहा है, लेकिन नाव फिटनेस सेंटर हैदराबाद में है। ऐसे में फिटनेस सर्टिफिकेट मिलना तकरीबन नामुकिन है। इसके बावजूद नगर निगम नावों का पंजीयन करने में जुटा है। सोमवार को बोट क्लब और काली मंदिर घाट पर निगम की टीम बैठी। यहां पंजीयन के लिए दिए फॉर्म की शर्तें पूरी करना मुश्किल है। यहां न तो नावों की मौजूदा स्थिति देखी जा रही है और न ही लाइफ जैकेट समेत अन्य सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता। पंजीयन के लिए लाई गई नावों में से अधिकतर जर्जर हैं तो कई में सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण नहीं थे। निगम अफसरों का कहना है कि जल्द सभी दस्तावेज तैयार कर लेंगे। अभी तो प्रक्रिया शुरू की है, धीरे-धीरे खामियां दूर कर ली जाएंगी।

पर्यटन की नावों का नहीं है पंजीयन
जानकारों के मुताबिक नगर निगम दिखावटी तौर पर तालाबों में पंजीकृत नावों को उतारने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि इसकी मॉनटीरिंग के लिए वह मप्र पर्यटन विकास निगम के भरोसे है। स्थिति ये है कि पर्यटन विकास निगम की खुद की नावों का पंजीयन नहीं है और वह नगर निगम को किराया तक नहीं देता। इसके बाद भी नगर निगम अफसरों का दावा है कि मप्र पर्यटन विकास निगम की नावों से मॉनीटरिंग की जाएगी।

नगर निगम के फौरी इंतजामात की पोल
निगम अफसरों के मुताबिक सूचीबद्ध नावों पर स्टील के लेबल पर पंजीयन नंबर होगा। इसके सिवाय कोई विकल्प नहीं है। झील संरक्षण प्रकोष्ठ अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह का कहना है कि नावों का फिटनेस सेंटर हैदराबाद है, लेकिन पर्यटन निगम से चर्चा कर रहे हैं। यदि वे फिटनेस की व्यवस्था करते हैं तो उनकी मदद ली जाएगी।

प्रशासन इन नियमों को बता रहा है कारगर
-नाव संचालन की अनुमति से जुड़े नगर निगम से जारी दस्तावेज होने चाहिए
-नाव का फिटेनस सर्टिफिकेट भी जरूरी है
-नाव में सुरक्षा उपकरण जैसे लाइफ जैकेट, स्ट्रेचर, फस्र्ट एड बॉक्स आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करनी है
-नाव एवं नाविक का फोटो और आवेदनकर्ता का आधार कार्ड भी जरूरी


ये सवाल हैं बड़े
-तालाब में अवैध नावों को किस तरह रोकेंगे
-झील प्रकोष्ठ के पास अमले की कमी है, ऐसे में मॉनीटरिंग कैसे होगी
-तालाब के अन्य क्षेत्रों से नावें आती हैं, इन का क्या
-अवैध नाव संचालन पर जुर्माने या सजा के कौन से नियम लागू होंगे
-राजधानी के अन्य जल स्रोतों की मॉनीटरिंग की क्या व्यवस्था होगी