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मध्य प्रदेश में डेंगू का कहर: स्वास्थ्य मंत्री ने भी माना- रोकथाम में स्वास्थ्य विभाग असफल

Deepesh Tiwari

Publish: Nov 12, 2019 19:16 PM | Updated: Nov 12, 2019 19:16 PM

Bhopal

अधिकारियों के साथ होगी वन टू वन चर्चा...

भोपाल@हर्ष पचौरी की रिपोर्ट...
मौसम में आए बदलाव के साथ ही मध्य प्रदेश में डेंगू ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इसी सब के बीच मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट डेंगू फैलने से सख्त नजर आए।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि डेंगू की रोकथाम के लिए खुद स्वास्थ्य विभाग असफल रहा है।

उनके अनुसार लोगों को जागरूक करने में हम रहे असफल रहे, फिर भी अब प्रयास जारी रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों के साथ होगी वन टू वन चर्चा की बात भी कही है। जिसके तहत कल समीक्षा बैठक की बात भी उनकी ओर से कही गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि कल होने वाली इस बैठक में कई अधिकारियों की खिंचाई हो सकती है।

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भोपाल शहर में अब तक मिले 1200 से अधिक मरीज
राजधानी भोपाल में अभी तक डेंगू पॉजीटिव मरीजों की संख्या 1200 से ज्यादा हो गई है। जबकि पिछले वर्ष नवंबर में यह आंकड़ा 738 था। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस बार डेंगू से शहर में एक भी मौत नहीं हुई है। लेकिन चार संदिग्ध मरीजों की जो मौत हुई है, उसे विभाग गिनती में शामिल नहीं कर रहा है। जबकि डेंगू मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है।
वहीं राजधानी से लगे रायसेन में भी एक सप्ताह पहले जहां डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 74 था। वहीं अब डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 84 पर जा पहुंचा है।

दो दिन बंद रही डेंगू की जांच

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला शनिवार को आया था। इसके मद्देनजर प्रशासन ने शहर में धारा 144 को सख्ती के साथ लागू किया था। इस कारण शनिवार और रविवार को बैरागढ़ और जेपी अस्पताल में डेंगू की जांच नहीं हो सकी।

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वहीं इस बार डेंगू का वायरस ज्यादा ताकतवर होकर सामने आने की बात कही जा रही है। जानकारों के अनुसार डेंगू का वायरस लगातार अपने को बदलता जा रहा है,जिसके चलते वह अपने को और पावरफुल करके समाने आ रहा है।


राजधानी में भी डेंगू से मौतें...
वहीं राजधानी में डेंगू लगातार अपने पैर पसारता जा रहा है। डेंगू मरीजों और उसके दंश से होने वाली मौतों की संख्या भी बढती जा रही है। सोमवार को डेंगू से भोपाल में पांचवी मौत दर्ज की गई है। बंसल अस्पताल में सोमवार को साजिदा नगर निवासी निशा उम्र 40 वर्ष ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

निशा के बड़े भाई अलीम ने बताया कि उनकी बहन साजिदा नगर में निवास करती थीं। निशा को बुखार तो सात दिन पहले से आ रहा था, लेकिन तीन दिन पहले उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई। हाथ पैरों में दर्द तेज हो गया तो उसे ताजुल मसाजिद के सामने एक निजी अस्पताल ले गए।

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यहां एक दिन भर्ती रखने के बाद जब हालत नहीं सुधरी तो निशा को बंसल अस्पताल में भर्ती कराया। वहां भी इलाज चला लेकिन उसकी हालत नहीं सुधरी और सोमवार को निशा की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार भोपाल केयर अस्पताल में निशा का डेंगू का टेस्ट किया गया था। यहां के चिकित्सकों ने बताया कि आपके मरीज को डेंगू है, उसकी प्लेट्लेट्स सिर्फ 14 हजार बची हैं।

डेंगू से बचाव के तरीके...
डॉ. यशपाल बाल्यान के अनुसार डेंगू से बचाव के लिए सबसे पहले घर में और आसपास कई दिनों से जमा पानी को हटाएं। डेंगू का लार्वा सबसे ज्यादा घरों में रखे कूलर, गमले सहित अन्य स्थानों पर रुके साफ पानी में होने की संभावना ज्यादा रहती है। वहीं ज्यादा दिन और तेज बुखार आने पर तुरंत डॉक्टरों से सम्पर्क करना चाहिए।

नपा का फॉगिंग वाहन दुर्घटना के कारण खराब हो गया है। जिसे सुधारन के लिए भेजा गया है। जैसे ही वाहन दुरुस्त होकर आता है, शहर में फॉगिंग कराई जाएगी।
- ओमपाल सिंह भदोरिया, सीएमओ नगर पालिका

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सर्वे टीमें चिन्हित एरिया में लार्वा सर्वे कार्य कर रही हैं। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने के बाद लोगों से एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
- डॉ. प्रियंवदा गुप्ता, जिला मलेरिया अधिकारी रायसेन


ऐसे करें बचाव: 20 का खास फॉर्मूला...
डेंगू में कुछ एक्सपर्ट 20 के फॉर्मूले की बात करते हैं। अगर धड़कन यानी पल्स रेट 20 बढ़ जाए, ऊपर का ब्लड प्रेशर 20 कम हो जाए, ऊपर और नीचे के ब्लड प्रेशर का फर्क 20 से कम हो जाए, प्लैटलेट्स 20 हजार से कम रह जाएं, शरीर के एक इंच एरिया में 20 से ज्यादा दाने पड़ जाएं - इस तरह का कोई भी लक्षण नजर आए तो मरीज को अस्पताल में जरूर भर्ती करना चाहिए।

डेंगू और प्लेटलेट्स...
आमतौर पर तंदुरुस्त आदमी के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती हैं। अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो उसकी वजह डेंगू हो सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि जिसे डेंगू हो, उसकी प्लेटलेट्स नीचे ही जाएं।

प्लेटलेट्स अगर एक लाख से कम हैं तो मरीज को फौरन हॉस्पिटल में भर्ती कराना चाहिए। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। 40-50 हजार प्लेटलेट्स तक ब्लीडिंग नहीं होती।

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डेंगू का वायरस आमतौर पर प्लेटलेट्स कम कर देता है, जिससे बॉडी में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। अगर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं, मसलन सुबह एक लाख थे और दोपहर तक 50-60 हजार हो गए तो शाम तक गिरकर 20 हजार पर पहुंच सकते हैं।

ऐसे में डॉक्टर प्लेटलेट्स का इंतजाम करने लगते हैं ताकि जरूरत पड़ते ही मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाए जा सकें। प्लेटलेट्स निकालने में तीन-चार घंटे लगते हैं।

खतरा ज्यादा बच्चों को...
चाइल्ड स्पेशिलिस्ट डॉ. इंदू के अनुसार बच्चों का इम्युन सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है और वे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए उनके प्रति सचेत होने की ज्यादा जरूरत है।

पैरंट्स ध्यान दें कि बच्चे घर से बाहर पूरे कपड़े पहनकर जाएं। जहां खेलते हों, वहां आसपास गंदा पानी न जमा हो।

वहीं स्कूल प्रशासन इस बात का ध्यान रखे कि स्कूलों में मच्छर न पनप पाएं। बहुत छोटे बच्चे खुलकर बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाते इसलिए अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।

बच्चों को डेंगू हो तो उन्हें अस्पताल में रखकर ही इलाज कराना चाहिए, क्योंकि बच्चों में प्लेटलेट्स जल्दी गिरते हैं और उनमें डीहाइड्रेशन (पानी की कमी) भी जल्दी होता है।

डॉक्टर को दिखाएं
डेंगू होने पर किसी अच्छे फिजिशियन के पास जाना चाहिए। बच्चों में डेंगू के लक्षण नजर आएं तो उसे पीडिअट्रिशन के पास ले जाएं।

ये है इलाज...
- अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है।
- डॉक्टर की सलाह लेकर पैरासिटामोल (क्रोसिन आदि) ले सकते हैं।
- एस्प्रिन (डिस्प्रिन आदि) बिल्कुल न लें। इनसे प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं।
- अगर बुखार 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा है तो मरीज के शरीर पर पानी की पट्टियां रखें।
- सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें। बुखार की हालत में शरीर को और ज्यादा खाने की जरूरत होती है।
- मरीज को आराम करने दें।

मरीज में यदि DSS या DHF का एक भी लक्षण दिखाई दे तो उसे जल्दी-से-जल्दी डॉक्टर के पास ले जाएं। DSS और DHF बुखार में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, जिससे शरीर के जरूरी हिस्से प्रभावित हो सकते हैं।

डेंगू बुखार के हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ डेंगू हैमरेजिक और डेंगू शॉक सिंड्रोम बुखार में ही जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती हैं। अगर सही समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो DSS और DHF का पूरा इलाज मुमकिन है।

डेंगू Dengue: आयुर्वेद में इलाज...
आयुर्वेद के डाक्टर राजकुमार के अनुसार आयुर्वेद में डेंगू की कोई पेटेंट दवा नहीं है। लेकिन डेंगू न हो, इसके लिए यह नुस्खा अपना सकते हैं।

एक कप पानी में एक चम्मच गिलोय का रस (अगर इसकी डंडी मिलती है तो चार इंच की डंडी लें। उस बेल से लें, जो नीम के पेड़ पर चढ़ी हो), दो काली मिर्च, तुलसी के पांच पत्ते और अदरक को मिलाकर पानी में उबालकर काढ़ा बनाए और 5 दिन तक लें। अगर चाहे तो इसमें थोड़ा-सा नमक और चीनी भी मिला सकते हैं। दिन में दो बार, सुबह नाश्ते के बाद और रात में डिनर से पहले लें।

Dengue: एलोपैथी में इलाज...
इसकी दवाई लक्षण देखकर और प्लेटलेट्स का ब्लड टेस्ट कराने के बाद ही दी जाती है। लेकिन किसी भी तरह के डेंगू में मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं आने देनी चाहिए। उसे खूब पानी और बाकी तरल पदार्थ (नीबू पानी, छाछ, नारियल पानी आदि) पिलाएं ताकि ब्लड गाढ़ा न हो और जमे नहीं। साथ ही, मरीज को पूरा आराम करना चाहिए। आराम भी डेंगू की दवा ही है।

ये बरतें एहतियात...
- ठंडा पानी न पीएं, मैदा और बासी खाना न खाएं।
- खाने में हल्दी, अजवाइन, अदरक, हींग का ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करें।
- इस मौसम में पत्ते वाली सब्जियां, अरबी, फूलगोभी न खाएं।
- हल्का खाना खाएं, जो आसानी से पच सके।
- पूरी नींद लें, खूब पानी पीएं और पानी को उबालकर पीएं।
- मिर्च मसाले और तला हुआ खाना न खाएं, भूख से कम खाएं, पेट भर न खाएं।
- खूब पानी पीएं। छाछ, नारियल पानी, नीबू पानी आदि खूब पिएं।

ये हैं बचाव के तरीके...
- जहां तक हो सके पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, ताकि मच्छर आपको नहीं काट सकें।
- बीमारी से बचने के लिए फिजिकली फिट, मेंटली स्ट्रॉन्ग और इमोशनली बैलेंस रहें।
- अच्छा खाएं, अच्छा पीएं और अच्छी नींद ले।
- नाक के अंदर की तरफ सरसों का तेल लगाकर रखें। इससे तेल की चिकनाहट बाहर से बैक्टीरिया को नाक के अंदर जाने से रोकती है।

- खाने में हल्दी का इस्तेमाल ज्यादा करें। सुबह आधा चम्मच हल्दी पानी के साथ या रात को आधा चम्मच हल्दी एक गिलास दूध या के साथ लें। लेकिन अगर आपको -नजला, जुकाम या कफ आदि है तो दूध न लें। तब आप हल्दी को पानी के साथ ले सकते हैं।
- आठ-दस तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ मिलाकर लें या तुलसी के 10 पत्तों को पौने गिलास पानी में उबालें, जब वह आधा रह जाए तब उस पानी को पीएं।
- विटामिन-सी से भरपूर चीजों का ज्यादा सेवन करें जैसे : एक दिन में दो आंवले, संतरे या मौसमी ले सकते हैं। यह हमारे इम्यून सिस्टम को सही रखता है।

अपने आप न लें दवाई...
अपनी मर्जी से कोई भी एंटी-बायोटिक या कोई और दवा न लें।यदि बुखार ज्यादा है तो डॉक्टर के पास जाएं और उसकी सलाह से ही दवाई ले।
इन दिनों के बुखार में सिर्फ पैरासिटामोल ले सकते हैं।

एस्प्रिन बिल्कुल न लें क्योंकि अगर डेंगू है तो एस्प्रिन या ब्रूफिन आदि लेने से प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं। मामूली खांसी आदि होने पर भी अपने आप कोई दवाई न लें।

डेंगू: ऐसे बचें...

डेंगू से बचने के दो ही उपाय हैं। एडीज मच्छरों को पैदा होने से रोकना। एडीज मच्छरों के काटने से बचाव करना।

इन मच्छरों को पैदा होने से रोकने के ये हैं उपाय...
- घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें।

- अगर पानी जमा होेने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें।

- रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें। घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर रखें तो उलटा करके रखें।

- डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।

- अगर मुमकिन हो तो खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें।

- मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि इस्तेमाल करें। गुग्गुल के धुएं से मच्छर भगाना अच्छा देसी उपाय है।

- घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवा का छिड़काव जरूर करें। यह दवाई फोटो-फ्रेम्स, पर्दों, कैलेंडरों आदि के पीछे और घर के स्टोर-रूम और सभी कोनों में जरूर छिड़कें। दवाई छिड़कते वक्त अपने मुंह और नाक पर कोई कपड़ा जरूर बांधें। साथ ही, खाने-पीने की सभी चीजों को ढककर रखें।

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