स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

घर-घर जाकर परफॉर्म करता था ये बैंड, अब यूथ की है पहली पसंद

hitesh sharma

Publish: Sep 22, 2019 12:22 PM | Updated: Sep 22, 2019 12:22 PM

Bhopal

युवा उत्सव में सुखन-उर्दू अदब और सूफी संगीत की सजी महफिल

भोपाल। अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के अंतर्गत रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित युवा उत्सव के दूसरे दिन रवीन्द्र भवन में सुखन सूफियाना बैंड द्वारा उर्दू अदब और सूफी संगीत की महफिल में अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से राजधानी की शाम को रंगीन और खुशनुमा बना दिया। लगभग 2 घंटे की महफिल में सूफी संगीत, उर्दू अदब और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से मंच सराबोर हुआ। उर्दू की दास्तानगोई शैली, नज्मों, गजलों की नुमाइंदगी और कव्वाली, उर्दू गद्य और शायरी के अंदाज से इस महफिल में एक अलग ही समां बांधा। सुखन में कुल 12 कलाकार मंच पर नमुदार हुए। बैंड प्रस्तुति को 'महफिल' कहता है। सुखन की सूफियाना महफिल में जावेद अख्तर, जॉन एलिया, राजेश रेड्डी जैसे मशहूर शायरों के कलाम सुनाए।

जावेद अख्तर-फैज की नज्में की पेश

इसमें फैज अहमद फैज द्वारा लिखित कुछ इश्क किया कुछ काम किया..., जावेद अख्तर की मैं और मेरी आवारगी..., मग्लूब पूनावाला की लिखा कलाम गलती मेरी दिखे है तुमको हिजाब में क्या...पेश किया। इसके बाद कुमार विश्वास की लिखी नज्म तुम्हारा फोन आया है... को म्यूजिकल अंदाज में प्रस्तुति किया। बैंड का निर्देशन व संयोजन ओम भुटकर ने किया है। सुखन बैंड के सदस्य ओम भुटकर, नचिकेत देवस्थली ने नज्मों का पाठ किया, जयदीप वैद्य, अभिजीत ढेरे, मुक्ता जोशी ने अपनी सुरिली आवाज में नज्मों को पेश कर दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर संगत में हारमोनियम पर देवेन्द्र भोमे, तबले पर केतन पवार, ढोलक एवं सारंगी पर मंदार भागड़े ने जुगलबंदी पेश की।

रेख्ता से सीखी उर्दू
ओम ने बताया कि पहले हम घरों में परफॉर्म करते थे। जब लोगों ने तारीफ कि और प्रोत्साहित किया तो अन्य मंचो पर परफॉर्मेंस देना शुरू किया। जश्ने रेख्ता में परफॉर्मेंस देना सबसे बड़ी उपलब्धि है। ग्रुप के नचिकेत बताते हैं कि हमने उर्दू सीखने की प्रेरणा ही रेख्ता की वेबसाइट से उर्दू पढ़ते हुए ली थी। जब लगातार 2 साल इसमें परफॉर्म का मौका मिला तो सपने सच होने जैसा रहा। आठ साल पहले उर्दू पढऩा शुरू किया था। फिर चार साल पहले गजलों और नज्मों को म्यूजिक में पिरोकर पेश करना शुरू किया। हमारी खासियत है कि हम प्रस्तुति में गजलों और नज्मों के भाव को लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहते हैं। म्यूजिक पर फोकस सिर्फ जरूरत के मुताबिक रखते है।