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श्रुति को चुनाव जिताने के लिए 12 साल बाद एक मंच पर आ सकता है बंसीलाल परिवार!

Prateek Saini

Publish: Apr 18, 2019 20:27 PM | Updated: Apr 18, 2019 20:27 PM

Bhiwani

संपत्ति विवाद में अलग-थलग हुआ था पूर्व सीएम का परिवार...

 

(भिवानी,संजीव शर्मा): चुनावी सीजन में राजनीतिक समीकरण आए दिन बनते रहते हैं। ताजा घटनाक्रम भिवानी लोकसभा सीट पर है। जहां कांग्रेस प्रत्याशी श्रुति चौधरी को मजबूती देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बंसीलाल का परिवार एक मंच पर आ सकता है। बंसीलाल परिवार में यह घटनाक्रम करीब बारह साल बाद होने की संभावना है। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की संपत्ति को लेकर उनके बड़े बेटे बीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन रणवीर सिंह महेंद्रा व पौत्री पूर्व सांसद श्रुति चौधरी के बीच वसीयतनामे को लेकर वर्ष 2006 से विवाद चला आ रहा है। 31 मार्च 2005 को बंसीलाल के पुत्र सुरेंद्र सिंह का हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया था। इसके एक साल बाद ही 28 मार्च 2006 को बंसीलाल का भी निधन हो जाने के बाद परिवार में संपत्ति विवाद छिड़ गया। कोठी खाली करने को लेकर सुरेंद्र की पत्नी किरण चौधरी व रणवीर सिंह महेंद्रा के बीच लंबा विवाद चला।


भिवानी को राजनीतिक रूप से असल पहचान बंसीलाल से मिली थी। बंसीलाल कभी इंदिरा गांधी और संजय गांधी के बेहद करीबी हुआ करते थे। उनके छोटे बेटे सुरेंद्र सिंह की उद्योगपति ओमप्रकाश जिंदल के साथ विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। सुरेंद्र सिंह की पत्नी किरण चौधरी और बेटी श्रुति चौधरी कांग्रेस की राजनीति करती हैं। किरण कांग्रेस विधायक दल की नेता हैं और श्रुति भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं। बंसीलाल के बड़े बेटे रणबीर महेंद्रा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष और मुंढाल व बाढसा से दो बार विधायक रह चुके हैं। उनके बेटे अनिरुद्ध चौधरी बीसीसीआइ के कोषाध्यक्ष रहे। बंसीलाल के दामाद सोमवीर सांगवान लोहारू से दो बार विधायक रहे। दोनों ने दो-दो चुनाव हारे भी। एक समय था, जब इस परिवार के सदस्यों में खुलकर राजनीतिक विरोधाभास थे। प्रोपर्टी के झमेले इसमें एक बड़ा कारण रहे हैं। बंसीलाल परिवार के राजनीतिक बिखराव की बड़ी वजह भी आपस की फूट रही। अब धीरे-धीरे परिवार के सदस्यों को समझ आने लगा कि राजनीतिक तौर पर स्थापित रहने के लिए एक दूसरे का साथ बेहद जरूरी है। लिहाजा परिवार अब एकजुट होता नजर आ रहा है।


कांग्रेस ने श्रुति चौधरी को एक बार फिर भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से टिकट दिया है। खबरें आ रही हैं कि चुनाव में ताऊ रणबीर महेंद्रा (किरण चौधरी के जेठ) तथा फूफा सोमवीर सांगवान (किरण के ननदोई) खुलकर श्रुति की मदद करेंगे। विधानसभा चुनाव में इसी तरह की मदद किरण और श्रुति भी रणबीर महेंद्रा और सोमवीर की मदद करेंगी।


यूं लगाए जा रहे है कयास

पिछले दिनों पूर्व विधायक सोमबीर सिंह के साथ श्रुति चौधरी लोहारू में मंच भी सांझा कर चुकी है। रिश्तों में खटास दूर करने की शुरूआत किरण चौधरी ने 27 मार्च को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के भिवानी मंच से यह कह कर कर दी थी कि हम यहां आए हमारे जीजा जी सोमबीर सिंह का भी स्वागत करते हैं। उसी दिन से यह कयास लगाए जाने लगे थे कि अब दोनों परिवारों के रिस्तों में बदलाव आएगा। बाद में लोहारू में दोनों ने मंच सांझा भी कर लिया था। इसके साथ ही पूर्व विधायक रणबीर सिंह महेन्द्रा और किरण चौधरी के जेठ-बहु के रिस्तों में भी खटास कम होने लगा है। महेन्द्रा के नजदीकी समर्थकों ने कहा है कि अब बंसीलाल परिवार के बीच पैदा हुई दरार को पाटने का वक्त आ गया है और सभी एक मंच पर आ सकते है।

 

2004 में बंसीलाल परिवार के एक साथ तीन लोग जीते थे चुनाव

वर्ष 2004 में कांग्रेस की लहर के चलते भिवानी जिले से बंसीलाल परिवार के तीन लोग विधायक चुने गए थे। इनमें किरण चौधरी तोशाम, रणबीर महेंद्रा मुंढ़ाल तथा सोमवीर सांगवान लोहारू से विधायक बने थे। वर्ष 2009 में किरण चौधरी फिर से चुनाव जीतीं। रणबीर महेंद्रा कम मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे।