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बृजभूमि में उतरी रिश्तों पर चढ़ी ‘दुश्मनी’ की धूल, एक मंच पर आए दुष्यंत और जयंत चौधरी, किया रालोद प्रत्याशी का प्रचार

Prateek Saini

Publish: Apr 16, 2019 18:47 PM | Updated: Apr 16, 2019 18:47 PM

Bhiwani

अब चरण सिंह का परिवार हरियाणा में दिख सकता जेजेपी के साथ...

 

(चंडीगढ़,भिवानी): तीस से भी अधिक बरसों से चली आ रही स्व़ चौ़ चरण सिंह और स्व़ चौ़ देवीलाल के कुनबों के बीच की ‘राजनीतिक दुश्मनी’ अब खत्म होती दिख रही है। दशकों के बाद दोनों के पोतों ने बृजभूमि में एक मंच पर आकर इसकी शुरूआत कर दी। मौका था यूपी के मथुरा लोकसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार का। इस सीट पर दूसरे चरण में मतदान होना है और मंगलवार को चुनाव प्रचार का आखिरी दिन था।

 

जेजेपी नेता और हिसार सांसद दुष्यंत सिंह चौटाला ने दोनों सियासी घरानों पर बरसों से जमी ‘दुश्मनी’ की धूल को झाड़ते हुए मथुरा से रालोद प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह के लिए वोट मांगे। चौ़ चरण सिंह के पोते और चौ़ अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी ने दुष्यंत का मथुरा पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों युवाओं के बीच काफी देर तक बातचीत चलती रही।

 

मंच पर दोनों ने जिस तरह एक-दूसरे का गले लगकर स्वागत किया, उससे चौ़ चरण सिंह और चौ़ देवीलाल के समय की राजनीति जीवंत होती नज़र आई। रालोद प्रत्याशी के लिए वोट की अपील करते हुए दुष्यंत ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी जमकर हमले बोले। उन्होंने दोनों परिवारों के पुराने राजनीतिक रिश्तों का भी जिक्र किया। एक तरह से दोनों ही युवा नेता, पुराने समय की बातों को भूलकर नई शुरूआत करने का संकेत देते नज़र आए।

 

मथुरा की छाता विधानसभा के पंद्रह से अधिक गांवों में दुष्यंत चौटाला और जयंत चौधरी ने मिलकर नरेंद्र सिंह के लिए नुक्कड़ सभाओं को सम्बोधित किया। दोनों नेताओं ने रालोद प्रत्याशी के लिए रोड-शो का भी आयोजन किया। कुंवर नरेंद्र सिंह भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी के सामने चुनावी मैदान में डटे हैं। यूपी में रालोद भी सपा-बसपा गठबंधन का पार्ट है।


दुष्यंत के यूपी में जाकर प्रचार करने के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जयंत चौधरी भी हरियाणा में जेजेपी प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार कर सकते हैं। दुष्यंत और जयंत के बीच पिछले तीन-चार वर्षों से नजदीकियां बढ़ी हुई हैं। दशकों पूर्व चौ़ चरण सिंह और देवीलाल के बीच मधुर रिश्ते रहे हैं। बताते हैं कि 1980 के बाद से ही दोनों के बीच राजनीतिक दूरियां बढ़नी शुरू हो गई थीं।