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लेट हुई सरसों की बोवनी, घटा रकबा

Rajeev Goswami

Publish: Oct 17, 2019 12:12 PM | Updated: Oct 16, 2019 23:41 PM

Bhind

गत साल 16 अक्टूबर को हो चुकी थी 90 फीसदी से अधिक बोवनी, इस वर्ष अब तक हुई महज 10 फीसदी

भिण्ड. बेमौसम आवश्यकता से अधिक बरसात हो जाने से सरसों की फसल 15-20 दिन तक लेट हो जाने से किसान को पैदावार प्रभावित होने की चिंता सता रही है। क्योंकि लेट होने के कारण फसल में क ीटों के प्रकोप की भी आशंका बढ़ गई है। यहीं नहीं अब 20 फीसदी तक सरसों का रकबा इस साल कम होने की संभावना है।

ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी कम समय में ’यादा उत्पादन देने वाली उन्नति किस्में बोने की सलाह दे रहे हैं।

भिण्ड जिले में आम तौर पर सरसों की बोवनी 15 सितंबर से होनी शुरू हो जाती है। 30 सितंबर तक अधिकांश किसान बोवनी कर लेते हैं। गत साल भी 16 अक्टूबर तक 90 फीसदी से अधिक किसान सरसो की बोवनी का काम पूरा कर चुके थे। इस बार हालात उलट हैं अभी तक सिर्फ 10 से 15 फीसदी रकवे में ही बोअनी हो पाई है। समय पर बोवनी हो जाने पर फरवरी के अंतिम सप्ताह सरसों की कटाई शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार लेट हो जाने के कारण कटाई 20 मार्च तक शुरू होगी।

इस अवधि तक मौसम में तापमान की वृद्धि के चलते फसल में माहू, चितकबरा कीट के अलावा आरा मक्खी के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। सरसों भिण्ड जिले की प्रमुख फसलों में से एक है। किसान अधिकांश रकवे में सरसों की फसल की बोअनी करते हैं। प्रमुख फसल के प्रभावित होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पडऩे की संभावना है।

सरसों की बोवनी के लिए 26 से लेकर 28 डिग्री सेल्सियस तक तक तापमान की आवश्यकता होती है। तापमान अधिक होने से बीज का अंकुरण झुलस जाने की संभावना रहती है।

फसल को रोगों से बचाने के लिए करें ये उपाय

फसल को माहू के प्रकोप से बचाने के लिए मैटासिस्टॉक्स 25 इसी अथवा डायमिथोएट-30 इसी एक लीटर मात्रा को 1000 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें।

चितकबरा कीट पर काबू पाने के लिए क्लोरोपाइरीफास या पैराथियान का 10-10 किग्रा प्रतिहैक्टेयर छिडक़ाव करें।

आरा मक्खी से फसल को बचाने के लिए मैलाथियान की 500 मिली मात्रा का 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

बीज को वाबस्टिन अथवा थायरम में उपचारित कर बोवनी करें। 50 दिन बाद रिडोमिल एमजेड -72 का छिडक़ाव 10-12 के अंतर से करें।

रोगों से यदि फसल को बचाना है तो 22 अक्टूबर के बाद बोवनी से बचे। रोग प्रतिरोधी किस्मों का ही उपयोग करें।

फसल में रसायनिक खादों का संतुलित उपयोग करें। बोवनी से पहले चार-पांच जुताई करें।

&सितंबर माह में आवश्यकता से अधिक बरसात हो जाने से सरसों की फसल 20 दिन तक लेट हो चुकी है लेकिन जिले में किसानों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि रोग प्रतिरोधी किस्में चुने तथा जल्दी आने वाली कि स्मों की बोवनी करें।

राकेश कुमार त्रिपाठी, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, डीडीए कार्यालय